चुनावी पवेलियन से फ्रंटलाइन तक का सफर, जानिए ये अहम बातें

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देश की राजनीति में एक चुनावी रणनीतिकार के रूप में स्‍थापित प्रशांत किशोर अभी तक पेवेलियन में बैठकर खिलाडि़यों के लिए काम करते रहे थे, लेकिन अब वे फ्रंटलाइन पर खुद भी खुलकर खेलने वाले हैं। जी हां, वे अपने सियासी सफर जनता दल यूनाइटेड (जदयू) से कर चुके हैं। प्रशांत किशोर रविवार को पटना में जदयू की राज्य कार्यकारिणी की अहम बैठक में जदयू में शामिल हो चुके हैं। पार्टी सुप्रीमो व मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी में वे विधिवत रूप से जदयू में शामिल हो गए।
हालांकि, बीते सप्‍ताह ही उनकी सियासी पारी को लेकर चर्चाएं सामने आईं थीं, लेकिन तब उन्‍होंने इससे इनकार कर दिया था। उन्‍होेंने फिलहाल ऐसी किसी संभावना को नकार दिया था। पर, रविवार को उन्‍होंने खुद इसकी जानकारी दी, फिर मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार के आवास पर जदयू राज्‍य कार्यकारिणी की बैठक में शामिल होने पहुंचे, जहां नीतीश कुमार ने उनका पार्टी में स्‍वागत किया।

ट्वीट कर लगाया चर्चाओं पर विराम
विदित हो कि बीते दिनों प्रशांत किशोर के राजनीति में आने की चर्चाए हुईं थीं, लेकिन उन्‍होंने इसे खारिज कर दिया था। हालांकि, आज प्रशांत किशोर ने खुद ट्वीट कर इसकी जानकारी दी।

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इंजीनियरिंग की पड़ाई के बाद पहली नॉकरी यूनिसेफ में
मूलत: बिहार के बक्‍सर के रहने वाले प्रशांत किशोर के पिता डॉ. श्रीकांत पांडे बक्‍सर में डॉक्‍टर हैं। उनके बड़े भाई अजय किशोर का पटना में कारोबार है। पटना में प्रारंथिक शिक्षा के बाद प्रशांत किशोर ने हैदराबाद में इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने यूनिसेफ में ब्रांडिंग की नौकरी शुरू की।
‘वाइब्रैंट गुजरात’ से नरेंद्र मोदी के हुए करीब
साल 2011 में भारत लौट कर प्रशांत किशोर गुजरात के ‘वाइब्रैंट गुजरात’ से जुड़े। उन्‍होंने इसकी ब्रांडिंग की जिम्‍मेदरी का सफल निर्वाह किया। इससे वे भारत में चर्चा में आ गए। इसी आयोजन के दौरान वे तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के करीब हुए। फिर, उन्‍होंने नरेंद्र मोदी के लिए काम शुरू किया।
2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए किया काम
आगे साल 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रशांत किशोर ने भाजपा के लिए काम किया। चुनाव में भाजपा की जीत का श्रेय प्रशांत किशोर की रणनीति को ही गया। 2014 के चुनाव में भाजपा के दो अभियान ‘चाय पर चर्चा’ तथा ‘थ्री-डी नरेंद्र मोदी’ प्रशांत किशोर के ब्रन चाइल्‍ड रहे। दोनों अभियान सफल रहे। इस चुनाव में मोदी लहर चल गई तथा भाजपा को जीत मिली। साथ ही इससे प्रशांत किशोर को उनकी राजनीतिक रणनीतिकार के रूप में पहचान भी मिली।

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2014 में बिहार में महागठबंधन के लिए बनाई रणनीति
साल 2014 में भाजपा की जीत तो हो गई, लेकिन प्रशांत किशोर की पार्टी से दूरियां बढ़ गईं। इसके बाद उन्‍होंने अपने गृह राज्‍य बिहार में 2015 के विधानसभा के चुनाव में विपक्षी महागठबंधन के लिए काम किया। इस चुनाव में भी उनकी रणनीति सफल रही।
2014 के विधानसभा चुनाव में धुर विरोधी रहे लालू प्रसाद यादव व नीतीश कुमार को कांग्रेस के साथ जोड़कर एक साथ महागठबंधन की दतरी के नीचे लाने में प्रशांत किशोर की बड़ी भूमिका रही। यह रणनीति काम आई। इससे भाजपा विरोणी वोटो का बिखराव रुका। साथ ही अन्‍य युक्तियाें ने भी कमाल किया।

अब जदयू के साथ शुरू की राजनीतिक पारी
साल 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद प्रशांत किशोर मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार से करीब आ गए। हालांकि, जब महागठबंधन की सरकार गिरा नीतीश कुमार फिर भाजपा के साथ गए तो दोनेां के बीच दूरियों की खबरें भी आती रहीं। इस बीच प्रशांत किशोर ने विभिन्‍न चुनावों में कई अन्‍य दलों के लिए काम किया।
लेकिन, अंतत: नीतीश कुमार व प्रशांत किशोर ने तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया है। प्रशांत किशोर ने बिहार में जदयू के साथ अपनी सियासी पारी शुरू कर दी है।

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अब लोकसभा चुनाव लड़ने के कयास शुरू
ठीक आम चुनाव के पहले प्रशांत किशोर की जदयू में एंट्री से यह कयास तेज हो गई है कि पार्टी उन्‍हें लोकसभा चुनाव के मैदान में उतारेगी। पार्टी की ब्रांडिंग में उनकी उपयोगिता तो जग-जाहिर रही ही है।

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