चालू वित्तीय वर्ष के बीत गये छह महीने बीतने के बाद भी नही मिला पीएम आवास योजना का कोटा

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मौजूदा केंद्र सरकार ने देश के ग्रामीण क्षेत्रों के सभी आवासविहीन परिवारों को 2021 तक पक्का मकान देने का लक्ष्य निर्धारित किया है। परंतु चालू वित्तीय वर्ष 2018-19 के छह महीने बीत जाने के बावजूद अभी तक प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) का कोटा बिहार को नहीं मिला है। जबकि 17 वीं लोकसभा चुनाव कार्यक्रम आने का कुछ ही महीने बाकी है। समय पर लक्ष्य नहीं मिलने का असर आवास की स्वीकृति और निर्माण पर भी पड़ेगा। हालांकि बिहार वित्तीय वर्ष 2016-17 और 2017-18 में मिले टारगेट को साहिल करने में भी फिसड्डी साबित हुआ है। पिछले दो वर्षो में मिले 11.76 लाख आवास के विरुद्ध अभी तक बिहार में 1,56,074 आवासों का ही निर्माण कार्य पूर्ण हो पाया है। ग्रामीण विकास विभाग के आधिकारिक सूत्र ने बताया कि अभी तक केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत बिहार को वित्तीय वर्ष 2018-19 में कितना कोटा मिलेगा यह निर्धारित नहीं कर पायी है। समय पर केंद्र से लक्ष्य नहीं मिलने के कारण जिला, प्रखंड और पंचायतवार टारगेट निर्धारित करने में भी देर होगी। इसका असर निर्माण पर पड़ना लाजिमी है। जब केंद्र से कोटा मिलेगा तब तक प्रशासन पूरी तरह चुनावी मोड में आ गया रहेगा। जिस कारण समय पर कार्य को पूर्ण करने में कठिनाई होगी। आवास सॉफ्ट पर जारी आंकड़े के अनुसार वित्तीय वर्ष 2016-17 और 2017-18 को मिलकार पर बिहार को प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत 11,76, 617 आवास निर्माण कराने का लक्ष्य मिला है। इनमें से 9,96, 816 लाभार्थियों का निबंधन कर लिया गया है और 9,60,477 लाभार्थियों का जीओ टैग भी कर दिया गया है। आवास की स्वीकृति देकर 9,23,716 लाभार्थियों का जीओ टैग किया गया है। 909565 लाभार्थियों के बैंक खाते की जांच भी कर ली गयी है। इनमें से 8,70,748 लाभार्थियों को प्रथम किस्त की, 4,57,946 लाभार्थियों को द्वितीय किस्त और 1,75,267 लाभार्थियों को तृतीय किस्त की राशि उपलब्ध करा दी गयी है। राज्य में चौथी किस्त एक भी लाभार्थियों को नहीं मिली है। वहीं अभी तक 1,56,074 आवासों का निर्माण पूर्ण कर लिया गया है।मालूम हो कि बिहार सरकार ने सामाजिक आर्थिक एवं जातीय जनगणना 2011 की सूची के आधार पर 65 लाख आवासविहीन परिवारों को सूची केंद्र को भेजी थी। इनमें से 35 लाख परिवारों को ही केंद्र ने आवासविहीन माना है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत सामान्य जिले के लाभार्थियों को प्रति आवास 1.20 लाख और नक्सल प्रभावित राज्य के 11 जिलों के लाभार्थियों को 1.30 लाख रुपये की दर से सहायता राशि आवास निर्माण के लिए उपलब्ध करायी जाती है। इसके अतिरिक्त शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार रुपये और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत 90 दिनों की मजदूरी 177 रुपये प्रतिदिन की दर से 15,930 रुपये उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। इस तरह सामान्य जिलों के लाभार्थियों को 1,47,930 और नक्सल प्रभावित जिलों के लाभार्थियों को 1,57,930 रुपये आवास निर्माण के लिए उपलब्ध कराये जाते हैं।

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