चार जिलों में खुलेंगे कृषि विज्ञान केन्द्र :केंद्रीय कृषि मंत्री

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केंद्र सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह ने कहा कि बिहार में नये अतिरिक्त कृषि विज्ञान केन्द्रों की स्थापना से कृषि के विकास की रफ्तार में तेजी आएगी और किसान ज्यादा खुशहाल होंगे। बिहार में मधुबनी ,समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण और गया में नये कृषि विज्ञान केन्द्रों की स्थापना का काम शुरू हो गया है। इनमें से दो स्थानों पर पहले ही काम शुरू हो गया था और बाकी के चार जिलों में आज से शुरू हो गया। बिहार सरकार द्वारा सभी अतिरिक्त कृषि विज्ञान केन्द्र हेतु भूमि उपलब्ध करा दी गई है। बड़े जिलों में अतिरिक्त कृषि विज्ञान केन्द्र की स्थापना से सभी पंचायतों तक कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों की आधुनिकतम तकनीक अन्नदाता किसान भाई-बहनों तक पहुंच पायेगी। कृषि वैज्ञानिकों की नियुक्ति में भी पारदर्शिता आयेगी। साथ ही इससे कृषि विभाग में अन्य पदों पर ही नयी नियुक्तियों का रास्ता भी खुल गया। भारत सरकार द्वारा देश के 109 जिलों में नयी कृषि विज्ञान केन्द्र स्थापित किया जा रहा है। इन जिलों में 55 बड़ा जिले ऐसे हैं, जहां पूर्व से एक-एक कृषि विज्ञान केन्द्र कार्यरत है तथा 25 ऐसे जिले है, जिनमें 11वीं पंचवर्षीय योजना में कृषि विज्ञान केन्द्रों की स्थापना की सहमति दी गई थी। हालांकि इस कार्य की शुरुआत अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्रित्व काल में ही हो गयी थी। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने वर्षो से रुकी इस योजना को जमीन पर उतारने का काम किया है। उक्त बातें केन्द्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने बामेती से चार नव सृजित कृषि विज्ञान केन्द्रों के शिलान्यास के बाद कही। शिलान्यास कार्यक्रम बिहार के कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार के साथ संयुक्त रूप से किया गया। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह ने कहा कि चार नवसृजित कृषि विज्ञान केन्द्रों के स्थापना के बाद अब बिहार में कुल छह कृषि विज्ञान केंद्र हो गये हैं। हालांकि जिलो में पहले से ही कृषि विज्ञान विकास का काम हो रहा था जिसमें अब कृषि से जुड़े अनुसंधान समेत समस्त कृषि कायरे में तेजी आएगी। इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वर्ष 2022 में किसानों की आय दुगुना करने का उद्देश्य पूरा हो सकेगा। उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् अपनी 642 कृषि विज्ञान केन्द्रों में किसानों तक प्रसार कार्यक्रमों के माध्यम से नयी-नयी तकनीकों के प्रत्यक्षण, ग्रामीण युवाओं तथा कृषक प्रशिक्षण, कृषि संबधी सलाह आदि पहुंचाने का कार्य कर रही है। देश के 24 नवसृजित जिलों में भी कृषि विज्ञान केन्द्रों की स्थापना की जा रही है। इसके साथ ही 5 ऐसे जिले जो सीमांचल अथवा पहाड़ी जिले हैं ,जैसे कि हिमाचल प्रदेश में लाहोल स्पीती, जम्मू कश्मीर में करगिल एवं बारामूला, उत्तराखंड में पिथौरागढ़ तथा चमोली में भी एक अतिरिक्त कृषि विज्ञान केन्द्र की स्थापना की जा रही है । मौके पर बिहार के कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि राज्य में पूर्व से 38 कृषि विज्ञान केन्द्र कार्यरत हैं लेकिन छह बड़े जिले गया, पूर्वी चम्पारण, पश्चिम चम्पारण, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर तथा मधुबनी में एक-एक अतिरिक्त कृषि विज्ञान केन्द्र की स्थापना की जा रही है। उन्होंने कहा कि सभी चार नवसृजित कृषि विज्ञान केन्द्र डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर के अधीन कार्य करेंगे। एक अतिरिक्त कृषि विज्ञान केन्द्र की कार्य संरचना में पूर्व की भांति एक प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर, छह विषय वस्तु विशेषज्ञ, एक कम्प्यूटर प्रोग्रामर, एक प्रयोगशाला सहायक, एक फार्म मैनेजर, एक सहायक, एक टंकक, एक वाहन चालक तथा एक सहायता कर्मी यानि कुल 16 पदों का सृजन होगा। मंत्री ने कहा कि कृषि अनुसंधान केन्द्रों के शोध एवं कृषि की आधुनिकतम तकनीक को किसानों एवं प्रसार कर्मियों के बीच पहुंचाने की आवश्यकता है। एक अतिरिक्त कृषि विज्ञान केन्द्र की स्थापना से उस जिले के सभी प्रखंडों में कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा विविद्यालय द्वारा किये गये शोध का किसानों की खेतों में विभिन्न प्रकार का प्रत्यक्षण आयोजित कर प्रसार किया जायेगा, जिससे अन्नदाता किसान भाई-बहन नयी तकनीक अपनाकर फसल के उत्पादन तथा उत्पादकता में वृद्धि कर सकेंगे। साथ ही, उनकी आय में भी बढ़ोतरी होगी। इस अवसर पर कृषि विभाग के प्रधान सचिव सुधीर कुमार, कृषि निदेशक आदेश तितरमारे, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विविद्यालय के कुलपति डॉ. रमेश चन्द्र श्रीवास्तव एवं निदेशक, प्रसार शिक्षा डॉ. केएम सिंह, बामेती के निदेशक डॉ. जितेन्द्र प्रसाद सहित बड़ी संख्या में विभागीय एवं कृषि विविद्यालय के वैज्ञानिक, पदाधिकारी एवं कर्मचारीगण उपस्थित थे।

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