चमकी बुखार जैसी आपदा से निपटने को केन्द्र और राज्य सरकार पूरी तरह मुस्तैद : मोदी

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उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि केन्द्र और राज्य सरकार चमकी बुखार से मुकाबले के लिए हर तरह से तत्पर है। चमकी बुखार प्रभावित जिलों के प्रभावितों के आर्थिक-सामाजिक सव्रे के साथ ही जो बच्चे स्वस्थ होकर लौटे हैं उनकी भी सरकार ट्रैकिंग करेगी।यह बात उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने भाजपा विधानमंडल दल की बैठक में कहीं। उपमुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में शुरुआत में चमकी बुखार से मुजफ्फरपुर और आस-पास के जिलों में बच्चों तथा लू से औरंगाबाद व नवादा आदि जिलों में हुई सैकड़ों लोगों की मौत पर दो मिनट का मौन रखकर शोक व्यक्त किया गया। बाद में बैठक को संबोधित करते हुए श्री मोदी ने कहा कि महत्वपरूण दायित्वों व पदों पर बैठे विपक्ष के नेताओं को चमकी और लू प्रभावित इलाकों में झांकने तथा विधान मंडल में इस पर हुई बहस में हिस्सा लेने तक की फुर्सत नहीं मिली। विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार पर अर्नगल आरोप लगा कर केवल घड़ियाली आंसू बहा रहा है। जलवायु परिवर्तन के कारण देश और दुनिया को तरह-तरह की आपदाओं का सामना करना पड़ रहा है। ऐसी आपदाओं के मुकाबले की जहां मुकम्मल तैयारी और जारूकता की जरूरत है वहीं राज्य सरकार पीड़ित परिवारों को तत्काल 4-4 लाख रुपये मुआवजा देने में भी पीछे नहीं है। बैठक में भाजपा विधानमंडल दल के सदस्यों को पीएम किसान योजना व आयुष्मान योजना के बारे में विस्तृत जानकारी दी गयी तथा अपने-अपने क्षेत्रों में आम लोगों को इन योजनाओं से अवगत कराने को कहा गया ताकि अधिक से अधिक लोग इनका लाभ उठा सकें।

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उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि राहुल गांधी को मनाने के लिए खून से चिट्ठी लिखने, धरना देने और आत्महत्या की धमकी देने जैसी इमोशनल नौटंकी के बाद कांग्रेस ने अंतत: उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया, लेकिन 132 साल पुरानी पार्टी महीने भर में भी नया अध्यक्ष नहीं चुन पायी। इस पद के लिए जिन नामों की र्चचा है, वे गांधी परिवार के समय-सिद्ध वफादार मोतीलाल वोरा और सुशील कुमार शिंदे जैसे लोग हैं। संकेत साफ है कि पार्टी का वास्तविक पावर सेंटर गांधी परिवार में ही रहेगा। सोनिया गांधी ने जैसे रिमोट कंट्रोल से 10 साल तक यूपीए सरकार चलायी, वैसे ही पार्टी चलाने के लिए भी रोबोट खोज लिया जाएगा। श्री मोदी ने ट्वीट कर कहा कि राहुल गांधी ने लंबे त्यागपत्र में यह स्वीकार नहीं किया है कि देशद्रोह कानून समाप्त करने, ईमानदार प्रधानमंत्री को चोर कहने, तीन तलाक का विरोध करने और सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांग कर सेना का अपमान करने जैसी बड़ी नीतिगत गलतियों के कारण कांग्रेस हारी, बल्कि वे यह दिखाना चाहते हैं कि देश के मतदाताओं ने उनके साथ बुरा किया। राहुल अगर अपनी जिम्मेदारी लेने से ज्यादा मतदाताओं के विवेक पर सवाल उठा रहे हैं, तो यह लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है। श्री मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने परिस्थितिवश अगर गांधी परिवार के बाहर से किसी योग्य व्यक्ति को कमान सौंपी, तो उसे पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा या सीताराम केसरी की तरह अपमानित होना पड़ेगा। नये अध्यक्ष के किस निर्णय को पावरफुल कार्यकर्ता राहुल गांधी कब फाड़ कर फेंक देंगे, कौन जानता है।

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