घाटी में अलगाववादियों ने किया बंद का आह्वान, अमरनाथ यात्रा रोकी गई

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केंद्र सरकार के तमाम इंतजामों और सुरक्षा प्रबंधों के बावजूद अलगाववादियों के बंद के आह्वान को देखते हुए अमरनाथ यात्रा रोक दी गई है. बंद के कारण उपजे तनाव की वजह से अमरनाथ यात्रा का जत्था आगे नहीं जाने दिया गया. साथ ही बंद के मद्देनजर सुरक्षा बल भी हाई अलर्ट पर हैं. घाटी में इसको लेकर कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं. इसके पहले हिजबुल कमांडर बुरहान वानी की बरसी पर आतंकियों के बंद के कारण अमरनाथ यात्रा पर जा रहे जत्थे को रोक दिया गया था.

इसलिए मनाते हैं शहीदी दिवस
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में 13 जुलाई को शहीदी दिवस के रूप में मनाते हैं. यह दिन 1931 में श्रीनगर की सेंट्रल जेल के बाहर डोगरा महाराज की फौज की गोलीबारी में मारे गए लोगों की याद में मनाया जाता है. हालांकि जम्मू-कश्मीर राज्य सरकार इस दिन को उन स्वतंत्रता सेनानियों को समर्पित करती है, जिन्होंने 1947 की आजादी की लड़ाई में हिस्सा लिया था.

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इसके पहले 8 जुलाई को रोका गया था जत्था
कह सकते हैं कि घाटी में सक्रिय अलगाववादियों का असर अमरनाथ यात्रा पर आखिर पड़ ही गया है. यात्रियों को शनिवार को जम्मू-कश्मीर नहीं जाने दिया गया. इससे पहले, 8 जुलाई को हिजबुल कमांडर बुरहान वानी की बरसी पर अलगाववादियों ने विरोध प्रदर्शन के कारण अमरनाथ यात्रा के लिए तीर्थयात्रियों के जत्थे को भी रवाना होने से रोक दिया था. गौरतलब है कि आतंकी बुरहान वानी अपने दो साथियों के साथ 8 जुलाई, 2016 को अनंतनाग जिले के कोकेरनाग इलाके में सुरक्षा बलों संग मुठभेड़ में मारा गया था.

लगभग डेढ़ लाख श्रद्धालुओं ने किए बाबा बर्फानी के दर्शन
गौरतलब है कि अमरनाथ यात्रा के लिए शुक्रवार को जम्मू से 5,395 श्रद्धालुओं का एक और जत्था रवाना हुआ. इस साल एक जुलाई से यात्रा शुरू होने के बाद से 12 जुलाई तक 1.44 लाख से अधिक श्रद्धालु समुद्र तल से 3,888 मीटर ऊपर स्थित बाबा बफार्नी के दर्शन कर चुके हैं. अधिकारियों ने कहा कि एक जुलाई को यात्रा शुरू होने के बाद से अब तक 11 दिनों में 1,44,058 श्रद्धालुओं ने पवित्र शिवलिंग के दर्शन कर लिए हैं.

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