गांधी की वजह से दलितों को मिला आरक्षण : मोदी

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उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि अगर गांधी नहीं होते तो लोकसभा-विधानसभा में आज दलितों को आरक्षण नहीं मिला होता। गांधी ने देश को आजादी दिलाने के साथ दलितोद्धार,खादी-चरखा, ग्रामोद्योग, स्वच्छता, गो रक्षा, हिन्दी प्रचार,कुष्ठरोगियों की सेवा, हिन्दू-मुस्लिम एकता जैसे अनेक रचनात्मक अभियान भी चलाये।राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती पर बापू सभागार में आयोजित राजकीय समारोह को सम्बोधित करते हुए श्री मोदी ने कहा कि 1932 में अंग्रेजों ने ‘‘फूट डालो राजकरो’ की नीति के तहत दलितों के लिए पृथक निर्वाचन की घोषणा करदी जिसके अन्तर्गत दलित उम्मीदवार को दलित ही वोट दे सकता था जिसका यरवदा जेल में बंद गांधी ने तीव्र विरोध किया और आमरण अनशन पर बैठ गए। बाद में अम्बेदकर के साथ पूना समझौता हुआ जिसमें तय हुआ कि दलित चुनाव में खड़े होंगे और समाज के सभी लोग उन्हें वोट देंगे। अंग्रेजों ने प्रांतीय विधान सभाओं में 71 सीटें दलितों को दी थीं जिसे पूना समझौते के बाद बढ़ा कर 151 तथा केन्द्रीय असेंबली में 19 प्रतिशत सीटें आरक्षित की गयीं। यरवदा जेल से निकलने के बाद गांधी ने छुआछूत के खिलाफ 21 दिनका उपवास किया। 1933-34 में 12500 मील की यात्रा कर दलितों के लिए मंदिरों के द्वार खोलने का अभियान चलाया तथा दलितोद्धार के लिए 8 लाख रुपये संग्रहित किये। ’हरिजन’ पत्रिका का प्रकाशन शुरू किया और साबरमती आश्रम को दलितोद्धार का केन्द्र बना दिया। गांधी जब बिहार के आरा में आए तो उन पर पत्थर फेंके गए और लाठियां चलाई गईं। हिन्दू-मुस्लिम एकता के लिए भी गांधी हमेशा संघर्ष करते रहे। देश को जब आजादी मिली तो गांधी दिल्ली में नहीं बल्कि कलकत्ता के नोआखली में हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच घूम-घूम कर शांति का संदेश दे रहे थे और दंगा रोकवाने के लिए आमरण अनशन कर रहे थे। गांधी के बताये मागरे पर चल कर ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सकती है। चम्पारण सत्याग्रह शताब्दी वर्ष में बिहार में जितना काम हुआ है शायद ही देश के किसी अन्य राज्य में हुआ हो।

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