गांधीनगर लोकसभा सीट बीजेपी के सबसे बड़े नेताओं के लिए

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बीजेपी के सबसे बड़े नेताओं के लिए गांधीनगर लोकसभा सीट 1989 से ही एक सुरक्षित सिहांसन रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 1996 में यह सीट जीती थी। इसके बाद 1998 में आडवाणी ने इसे जीता। अब बीजेपी के दूसरे नंबर के सबसे बड़े नेता और पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह इस सीट से मैदान में हैं।

बीजेपी के सबसे बड़े नेताओं के लिए गांधीनगर लोकसभा सीट 1989 से ही एक सुरक्षित सिंहासन रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 1996 में यह सीट जीती थी। इसके बाद 1998 में आडवाणी ने इसे जीता। अब बीजेपी के दूसरे नंबर के सबसे बड़े नेता और पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह इस सीट से मैदान में हैं। अमित शाह का राजनीतिक करियर 1982 में शुरू हुआ था, जब उन्हें नारनपुरा के संघवी हाई स्कूल के बूथ का इंचार्ज बनाया गया। यह गांधीनगर लोकसभा सीट के विधानसभा क्षेत्र में है।

बीते 3 अप्रैल को पार्टी अध्यक्ष अमित शाह अपना नामांकन पत्र दाखिल करने गांधीनगर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने अपनी पुरानी यादों को ताजा करते हुए बताया, ‘मैंने यहां दीवारों पर पोस्टर चिपकाए हैं, दीवारों को पार्टी के रंग में रंगा है। आज मैं उसी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष हूं। मेरा यह सफर साफ दर्शाता है कि इस पार्टी में कोई भी व्यक्ति आगे तक पहुंच सकता है।’ अमित शाह के इस मुकाम तक पहुंचने के सफर को करीब से देखने वाले मानते हैं कि उनकी इस तरक्की के पीछे सबसे बड़ी बात यह रही कि उन्होंने कभी भी गुजरात को पीछे नहीं छोड़ा।

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नामांकन से पहले हुए कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली, नितिन गडकरी और पीयूष गोयल के अलावा एनडीए की सहयोगी पार्टी शिवसेना के प्रमुख उद्धव ठाकरे, शिरोमणि अकाली दल के प्रकाश बादल और एलजेपी के राम विलास पासवान भी शामिल हुए। इस दौरान ठाकरे ने कहा कि उनका बीजेपी के साथ कोई मतभेद नहीं है।

1989 से बीजेपी का गढ़
1989 में बीजेपी ने पहली बार गुजरात की सभी 26 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, उस दौरान भी बीजेपी ने यह सीट जीती थी। ऐसे में पार्टी के कार्यकर्ताओं की पूरी कोशिश है कि शाह को भारी अंतर से चुनाव जिताकर लोकसभा भेजा जाए। वहीं इस सीट से कांग्रेस ने सीजे चावड़ा को मैदान में उतारा है। चावड़ा उत्तर गांधीनगर से विधायक हैं। इस सीट से 2014 में बीजेपी के सीनियर नेता लाल कृष्ण आडवाणी 4.83 वोटों के अंतर से जीते थे, वहीं 2009 में उनकी जीत का अंतर 1.21 लाख वोटों का था।
“अटल जी और आडवाणी जी गांधीनगर सीट से सांसद रहे हैं। यहां से चुनाव लड़ना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। मैं गांधीनगर के विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हूं।”
-अमित शाह, बीजेपी उम्मीदवार

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बीजेपी के भीतर के लोगों का कहना है कि पार्टी काडर लंबे समय से इसकी मांग कर रहा था कि अमित शाह को गांधी नगर से चुनाव लड़ाया जाए। शायद इसी कारण से शाह के नामांकन दाखिल करने से पहले अहमदाबाद अर्बन डिवेलपमेंट अथॉरिटी ने करीब 500 करोड़ रुपये के प्रॉजेक्ट की घोषणा की। इन प्रॉजेक्ट्स में पानी, गटर और ट्रैफिक की समस्याओं को खत्म करना शामिल है। इसके अलावा अफॉर्डेबल हाउसिंग बनान भी इसका हिस्सा है।
“गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र के कलोल, सानंद, वेजलपुर इलाके में कांग्रेस आगे रहेगी। बीजेपी शहरी इलाकों में कुछ वोट मिल सकते हैं, लेकिन कुल मिलाकर कांग्रेस जीतेगी”
-सीजी चावड़ा, कांग्रेस उम्मीदवार

परीसीमन से बदली स्थिति
2008 के परीसीमन के बाद गांधीनगर लोकसभा सीट का 82 प्रतिशत हिस्सा शहरी और 18 प्रतिशत ग्रामीण है। इससे पहले यह आंकड़ा दोनों तरफ लगभग बराबर था। गांधीनगर दक्षिण और दाहेगाम जैसे ग्रामीण इलाके इस क्षेत्र से बाहर हो गए। वहीं कलोल और सानंद सीट इसमें जोड़ दी गई। इस क्षेत्र में नारनपुरा और घटलोडिया लोकसभा सीट ऐसी हैं, जहां बीजेपी को बंपर वोट मिलते हैं। गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने 2012 में घटलोडिया सीट से 1.10 लाख वोटों के अतंर से जीत उर्ल की थी। वहीं इसी चुनाव में अमित शाह ने 63,335 वोटों से नारानपुरा सीट जीती थी।

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गुजरात की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी यहां
बीजेपी के एक सीनियर नेता ने बताया कि परीसीमन के बाद इस सीट से बीजेपी को काफी अच्छी वोटिंग होती है। गांधीनगर में सरकारी कर्मचारियों की काफी अच्छी संख्या होती है। इस सीट पर शेड्यूल कास्ट के वोटरों की संख्या 11-13 प्रतिशत है, पटेल वोटर करीब 13 प्रतिशत और ठाकोर वोटर करीब 11 प्रतिशत हैं। इस लोकसभा सीट में वेजलपुर क्षेत्र भी है, जहां मुस्लिम वोटरों की संख्या 40 प्रतिशत है। जुहापुरा, जहां मुस्लिमों की सबसे ज्यादा संख्या (करीब 3 लाख) है, इसी इलाके में आता है। इस लोकसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा वोटर वेजलपुर और घटलोडिया हैं। शाह इन दो इलाकों के ठाकोर और राबारी समुदाय के लोगों को लुभाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। शाह ने अपने प्रस्तावक के लिए इन समुदाय के लोगों को ही चुना है।

पूर्व ब्यूरोक्रेट और पशु चिकित्सक चावड़ा ने कहा, ‘यदि मोदी खुद भी यहां चुनाव प्रचार करें, तो भी शाह चुनाव हारेंगे। कांग्रेस, गांधीनगर कलोल, सानंद और वेजलपुर में काफी अच्छा प्रदर्शन करेगी। यदि बीजेपी जीत के लिए इतनी ही आश्वस्त है तो शाह हाउसिंग सोसायटियों को वोट करने के लिए क्यों कह रहे हैं?’

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