गया में विश्‍व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला शुरू,उपमुख्यमंत्री ने पितृपक्ष महासंगम-2019 का किया उद्घाटन

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‘‘विश्वविख्यात गयाधाम में विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला गुरुवार से आरंभ हो गया। पितृपक्ष मेले का शुभारंभ उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, शिक्षा सह प्रभारी मंत्री कृष्ण नंदन वर्मा, पर्यटन मंत्री कृष्ण कुमार ऋषि, राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री राम नारायण मंडल एवं कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलित कर किया। हजारों की संख्या में लोग गयाधाम पितरों के ¨पडदान के लिए पहुंचने लगे हैं। पूर्वजों के प्रति श्रद्धा प्रकट करने का सबसे बड़ा पर्व ‘‘पितृपक्ष’ को माना जाता है। पंचांग के अनुसार, भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन माह की अमावस्या तक 15 दिन की विशेष अवधि को पितृपक्ष कहा जाता है। इस बार पितृपक्ष 13 सितम्बर से शुरू होकर 28 सितम्बर आश्विन कृष्ण पक्ष अमावस्या तक रहेगा।

विश्व प्रसिद्ध पारम्पारिक अनुष्ठान एवं पितरों की आत्मा की शांति के निमित गुरूवार को पितृपक्ष मेला का शुभारंभ सूबे के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने फीता काटकर किया । यह मेला 15 दिनों 28 सितम्बर तक चलेगा। इस दौरान देश-विदेश के लगभग आठ लाख श्रद्धालुओं को यहां आने की संभावना है। श्रद्धालु अपने-अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान तथा श्राद्ध करते हैं। पितृपक्ष मेला का उदघाटन बृहस्पतिवार की संध्या चार बजे बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने किया। इस अवसर पर आयोजित समारोह की अध्यक्षता राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री राम नारायण मंडल ने किया। इस अवसर पर शिक्षा विभाग के मंत्री सह जिला प्रभारी मंत्री डा. कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा, कृषि मंत्री डा. प्रेम कुमार, पर्यटन सचिव कृष्ण कुमार ऋषि, विधान पार्षद कुमार बाबू, संजीव श्याम सिंह सहित अन्य विधायक एवं विधान पार्षद मौजूद थे। पितृपक्ष मेले के दौरान प्रतिदिन प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर के समीप निर्मित पंडाल में भजन, सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा कथा का आयोजन किया जाएगा। जिला प्रशासन ने इस दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पूरी तैयारी की है।

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पितृपक्ष का महत्व
वायु पुराण की तरह ही कई प्राचीन ग्रंथों में पितृपक्ष और गया में पिंडदान की महत्ता का वर्णन किया गया है. आश्विन माह के कृष्ण पक्ष को पितृपक्ष कहा जाता है. वैसे तो गया शहर में सालभर पिडंदानी आते हैं, लेकिन आश्विन माह में पिंडदान करने का विशेष महत्व है. पितृपक्ष में मृत शरीर की आत्मा गया धाम के ऊपर विचरण करती है और यहां उनके बेटे-बेटी, बहु या अन्य रिश्तदारों द्वारा दिया गया पिंडदान उन्हें मोक्ष यानी स्वर्ग की राह ले जाता है. गया में यह परंपरा गयासुर नामक असुर के साथ शुरू हुई है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां भगवान विष्णु अवतरित हुए थे जिनके पैरों के निशान की पूजा विष्णुपद मंदिर में होती है. यहां भगवान राम और सीता ने राजा दशरथ के लिए पिंडदान किया था, इसलिए गया को पितरों की मुक्ति का मुख्य द्वार कहा जाता है.

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