क्लोनिंग संबंधी शोध के लिए आज का दिन अहम है

0
45

क्लोनिंग संबंधी शोध के लिए आज का दिन अहम है. 1996 में आज ही के दिन डॉली का जन्म हुआ था.

डॉली नाम की भेड़ पहली क्लोन जीव थी जिसका जन्म न्यूक्लियर ट्रांसफर प्रक्रिया के जरिए सोमेटिक सेल से हुआ था. स्कॉटलैंड में डॉली के जन्म के बारे में सात महीने बाद घोषणा की गई थी, यह विज्ञान जगत की एक बड़ी उपलब्धि थी. इस काम को अंजाम देने वाले वैज्ञानिक थे इयान विलमुट, कीथ कैंपबेल और उनके साथी. 6 साल तक जीवित रही डॉली की फेफड़ों की बीमारी के कारण 14 फरवरी 2003 में मौत हो गई. इस दौरान डॉली ने 6 बच्चों को जन्म भी दिया.

डॉली की उत्पत्ति तीन भेड़ों की मदद से हुई थी. एक का अंडा, दूसरी का डीएनए और तीसरी के गर्भ को डॉली के लिए इस्तेमाल किया गया. न्यूक्लियर ट्रांसफर की प्रक्रिया में एक परिपक्व सेल के न्यूक्लियस को अनिषेचित अंडे में प्रत्यर्पित किया जाता है. संकरित कोषिका को फिर इलेक्ट्रिक शॉक से विभाजित करते हैं. और फिर उसे मां की कोख में डाला जाता है.

यह भी पढ़े  भारत सरकार ने दी सोशल मीडिया कंपनियों को चेतावनी, 'फेक न्यूज़ को रोको, वरना...

आमतौर पर भेड़ों का जीवन 11 से 12 साल का होता है. लेकिन डॉली को तैयार करने वाले रोसलिन इंस्टिट्यूट को नहीं लगता कि डॉली की मात्र 6 साल की उम्र में मौत का उसके क्लोन होने से कोई संबंध है क्योंकि फेफड़ों की बीमारी भेड़ों में आम है. खासकर उनमें जो ज्यादातर घर के अंदर रख कर पाली जाती हैं. हालांकि उन्होंने माना इसके पीछे दूसरे जेनेटिक कारण हो सकते हैं जो उस जीन की आयु पर निर्भर करते हैं जिनसे डॉली को पैदा किया गया था.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here