क्लाईमेट स्मार्ट गांवों में काम शुरू : डॉ. प्रेम कुमार

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राज्य के कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि बिहार के किसानों को संरक्षित खेती पर आधारित फसलों के लिए तकनीक प्रशिक्षण तथा प्रत्यक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा। लगभग 2,500 किसान प्रतिवर्ष संरक्षित खेती पर आधारित स्थायी फसल संघनीकरण की तकनीकों का प्रशिक्षण पा सकेंगे। छोटे किसानों को मशीनीकरण के लिए कस्टम सेवा सुविधा का विकास किया जायेगा। किसानों को बदलते मौसम के अनुकूल खेती करने के लिए संरक्षित खेती में प्रशिक्षित किया जायेगा। इसके अंतर्गत क्लाईमेट स्मार्ट कृषि क्रियाओं विशेषकर संसाधन संरक्षित कृषि क्रियाओं यथा जीरो टिलेज, धान प्रबंधन, बीज और चारा बैंक आदि पर स्थानीय विशिष्टता पर शोध किये जा रहे हैं। डॉ. कुमार ने कहा कि परियोजना के क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तर पर प्रथम चरण में चार कॉरिडोर क्रमश: पूर्णिया-कटिहार हाईवे, समस्तीपुर-दरभंगा हाईवे, पटना-बिहारशरीफ हाईवे तथा भागलपुर-मुंगेर हाईवे का चयन किया गया है। चयनित गांवों में बिहार कृषि विविद्यालय, सबौर, भागलपुर, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर तथा पटना स्थित भारतीय अनुसंधान संस्थान बॉरलोग इंस्टीट्यूट के साथ मिलकर चयनित गांवों में किसानों को प्रशिक्षित करेंगे। सरकार द्वारा चार कॉरिडोर को कार्य के निष्पादन हेतु प्रत्येक कॉरिडोर 1,69,75,600 रुपये की राशि की दर से कुल 6,79,02,400 रुपये सभी कॉरिडोर को उपलब्ध कराया गया है। इसमें प्रत्येक कलस्टर में 25 गांव तथा प्रत्येक गांव में 100 किसानों का चयन किया जा रहा है। इस प्रकार, कुल 100 गांवों में 2500 किसानों को क्लाईमेट स्मार्ट किसान बनाने का लक्ष्य है। इस मौके पर बामेती परिसर में बिहार कृषि विविद्यालय के लिए अतिथिशाला का उद्घाटन भी कृषि मंत्री द्वारा किया गया। समारोह में डॉ. अजय कुमार सिंह, कुलपति, बिहार कृषि विविद्यालय, सबौर, भागलपुर, डॉ. आरके सुहाने, निदेशक, प्रसार शिक्षा, बिहार कृषि विविद्यालय, सबौर, भागलपुर, धनंजयपति त्रिपाठी, अपर निदेशक (शष्य) तथा डॉ. जितेन्द्र प्रसाद, निदेशक, बामेती एवं विभाग के वरीय पदाधिकरीगण एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

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