क्या बैकफायर कर रहा मोदी सरकार का ट्रैफिक कानून? भाजपा शासित राज्य ही हुए बागी

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नए मोटर वाहन अधिनियम के तहत भारी भरकम जुर्माने को लेकर घमासान छिड़ गया है। पश्चिमी बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तो अपने राज्य में इसे लागू करने से ही साफ इनकार कर दिया है। विपक्ष जहां नए अधिनियम को अव्यावहारिक करार दे रहा है, वहीं विधानसभा के आसन्न चुनावों के मद्देनजर भाजपा शासित राज्य भी इसे लागू करने में हिचकिचा रहे हैं। कई राज्यों ने इसे लागू न करने का ऐलान किया है।

एक देश एक विधान’ का नारा देने वाली भारतीय जनता पार्टी की केंद्र सरकार के लिए उसका ही एक कानून मुसीबत बन गया है. ट्रैफिक नियमों का पालन करने के लिए लाए गए नए मोटर व्हीकल एक्ट में जुर्माना राशि को काफी बढ़ाया गया. 1 सितंबर से लागू हुए कानून के तहत हजारों की राशि के चालान कटे, लेकिन कई राज्य सरकारें इससे सतर्क हो गई हैं. कई राज्य सरकारों ने कानून में संशोधन कर जुर्माना राशि को ही घटा दिया और इन राज्यों की लिस्ट में भारतीय जनता पार्टी के राज्य ही अव्वल हैं.

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भाजपा शासित राज्य गुजरात द्वारा यातायात नियमों के उल्लंघन पर बढ़ाए गए जुर्माने में भारी कटौती करने को ज्यादा तूल नहीं देते हुए कहा कि यह मामला समवर्ती सूची का है और इसमें राज्य अपने फैसले लेने को स्वतंत्र हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यदि राज्य जुर्माना घटाना चाहते हैं तो वे ऐसा कर सकते हैं, लेकिन लोगों का जीवन बचाया जाना चाहिए और दुर्घटनाओं में कमी लाई जानी चाहिए।’

केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के इस नए कानून के तहत जुर्माना राशि 1000 से बढ़कर 5 हजार या 10 हजार रुपये तक बढ़ा दी गई. नया कानून लागू हुआ तो 25 हजार, 50 हजार तक के चालान की खबरें आने लगीं और तीखी बहस शुरू हो गई.

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गुजरात ने दिखाया रास्ता
आम लोगों के बीच चालान को लेकर मची हलचल के बीच राज्य सरकारों ने इस कानून का ही एक जुगाड़ निकाल लिया और इस फॉर्मूले की अगुवाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के गृह राज्य गुजरात ने की. राज्य के मुखिया विजय रूपाणी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जुर्माना राशि में कटौती का ऐलान किया और कई जुर्मानों में राशि को 90 फीसदी तक घटा दिया.

चुनावी चिंता में डूबी भाजपा
गुजरात ने एक रास्ता दिखाया तो अन्य राज्य भी उसपर चल दिए. और इनमें सबसे आगे रहे वो राज्य जहां कुछ ही महीनों में चुनाव होने वाले हैं. और खास बात ये है कि ये तीनों ही राज्य भाजपा शासित प्रदेश हैं. गुजरात के बाद महाराष्ट्र जागा और राज्य के परिवहन मंत्री ने नितिन गडकरी को चिट्ठी लिख दी, जुर्माना राशि पर चिंता जताई. देवेंद्र फडणवीस की सरकार को चिंता है कि कहीं बढ़ी हुई राशि वोटों की संख्या ना घटा जाए.

महाराष्ट्र की ही राह पर झारखंड और हरियाणा चल पड़े, झारखंड जल्द ही विशेष सत्र बुलाकर केंद्र के नए मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन कर सकता है तो वहीं हरियाणा ने अभी 45 दिनों का जागरूक अभियान चलाने की बात कही है.

बिना चुनाव भी चिंता जारी है
महाराष्ट्र-झारखंड-हरियाणा में तो चुनाव हैं इसलिए जुर्माना घटाने के फैसले को राजनीतिक चश्मे से देखा जा रहा है लेकिन इनसे इतर उत्तराखंड और कर्नाटक में भी पंक्ति का हिस्सा बन गए हैं. उत्तराखंड ने 90 फीसदी जुर्माना राशि कम करने का ऐलान कर दिया तो कर्नाटक की ओर से अभी विचार कहे जाने की बात कही जा रही है.

इन राज्यों के अलावा भी कई बीजेपी शासित राज्य ऐसे हैं, जहां नए कानून का नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है. उदाहरण के तौर पर देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में अभी नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू नहीं हुआ है. सिर्फ बीजेपी राज्य ही नहीं बल्कि कई विपक्षी पार्टियों के राज्यों ने भी इस कानून को लागू नहीं किया है.

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अब तक इन राज्यों ने घटाई जुर्माना राशि
गुजरात
महाराष्ट्र
झारखंड (विचार)
उत्तराखंड
हरियाणा (जागरूकता अभियान)
कर्नाटक (विचार)
उत्तर प्रदेश (अभी लागू नहीं)
पश्चिम बंगाल (विरोध)

क्या बोले नितिन गडकरी?
नितिन गडकरी की गिनती उन मंत्रियों में होती है जो हमेशा कुछ नया फॉर्मूला सामने लाते हैं. गडकरी सड़क बनाने में नई तकनीक लाते हैं, लाइसेंस बनाने के लिए नए फॉर्मूले लाते हैं और अब ट्रैफिक नियमों का पालन करने के लिए गडकरी नया कानून लाए तो अकेले पड़ते नजर आ रहे हैं. हालांकि, नितिन गडकरी ने कहा है कि राज्य सरकार अपने अधिकार का इस्तेमाल कर कानून में बदवाव कर सकते हैं.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मोटर व्हीकल एक्ट 2019 को लागू करने से मना कर दिया है। ममता बनर्जी ने कहा है मैं इस नए मोटर व्हीकल एक्ट को अभी लागू नहीं कर सकती क्योंकि हमारे अधिकारियों का मानना है कि अगर हमने इसे लागू किया तो हमारे लोगों पर बोझ बढ़ेगा।
ममता बनर्जी ने नए मोटर व्हीकल एक्ट का जिक्र करते हुए कहा कि मोटर व्हीकल एक्ट को हम अभी लागू नहीं कर सकते। सही तरीके से ड्राइव करें और अपनी जिंदगी बचाएं। हम ऐसा हर किसी को कह रहे हैं, इसी से दुर्घटनाएं कम हुई हैं। उन्होंने कहा कि नया मोटर व्हीकल एक्ट लोगों पर बड़ा बोझ है। हमने सदन में भी इस एक्ट का विरोध किया था। यह केंद्र का राज्य के संघात्मक ढांचे में हस्तक्षेप हैं।

दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने कहा कि दिल्ली सरकार संशोधित मोटर वाहन अधिनियम के तहत यातायात नियमों के उल्लंघन करने वालों पर लगाए जा रहे भारी-भरकम जुर्माने से राहत देना चाहती है व इस बारे में विचार कर निर्णय किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार विभिन्न पक्षों से प्रतिक्रिया ले रही है और इस बात पर गौर कर रही है कि दूसरे राज्य इसे किस तरह लागू कर रहे हैं।

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उत्तराखंड में वाहन चालकों की हड़ताल के बाद प्रदेश कैबिनेट ने संशोधित मोटर यान अधिनियम के उल्लंघन पर विभिन्न मामलों में केंद्र सरकार द्वारा तय जुर्माना राशि में कुछ राहत देने का फैसला लिया है। अधिसूचना जारी होने के बाद जुर्माने (शमन शुल्क ) की ये दरें लागू होंगी। हेलमेट के बिना चलने पर 1000 रुपये जुर्माना होगा। ओवर स्पीडिंग पर प्रदेश में 2000 रुपये जुर्माना होगा। पहले यह 400 से 1000 रुपये था। वाहन चलाते वक्त मोबाइल के इस्तेमाल पर पहली बार 1000 रपए तो दूसरी बार 5000 रपए जुर्माना होगा। खतरनाक ढंग से वाहन चलाने पर 1000 की बजाय 2000 रुपये जुर्माना होगा। वायु व ध्वनि प्रदूषण पर केंद्र ने 10 हजार जुर्माना रखा है पर प्रदेश में पहली बार में 2500 रपए तो दूसरी बार में 5000 रपए जुर्माना होगा।

भाजपा शासित राज्य गुजरात ने जुर्माने की रकम को आधा कर दिया है तो उत्तराखंड ने जुर्माने में मामूली राहत दी है। वहीं महाराष्ट्र ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिख कर इस पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है।

इस बीच दिल्ली सरकार ने भी जुर्माने की रकम आधा करने के संकेत दिये हैं। राज्यों के रुख को देखते हुए नितिन गडकरी ने नियमों को लागू करने के तौर तरीकों का पूरा मामला राज्य सरकारों पर छोड़ दिया है।

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