क्या कभी-कभार शराब पीने वाले युवा को जेल में बंद कर अपराधी बनायेंगे:हाईकोर्ट

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नये शराबबंदी कानून से हो रही सामाजिक परेशानियों को लेकर पटना उच्च न्यायालय ने तीखी टिप्पणी की। न्यायालय ने कहा कि किसी युवा ने एक बार शराब पी ली तो क्या उसे जेल में बंद कर अपराधी बनायेंगे। जेल जाने के बाद उसका बड़े-बड़े अपराधियों से संसर्ग होगा और उसका अपराध की तरफ झुकाव हो सकता है।न्यायालय ने यह टिप्पणी नेपाल के लिये आस्ट्रेलिया से आ रही खेप को नवादा में जब्त किये जाने के मामले में सुनवाई करते हुये की। मुख्य न्यायाधीश राजेन्द्र मेनन व न्यायमूर्ति डा. अनिल कुमार उपाध्याय की पीठ ने आगे कहा कि पूरे राज्य में लगभग सवा लाख मुकदमे सिर्फ शराब के मामले को लेकर ही दर्ज किये गये हैं। इसे निपटाने में अधिकतर अधिकारी लगे हुये हैं और उच्च न्यायालाय से लेकर निचली अदालत तक इसी मामले की सुनवाई कर रही है। अदालतों में शराब संबंधी मुकदमों का अंबार लग गया है। अदालत के पास और भी काम हैं। कई मामलों में तो प्राथमिकी दर्ज ही नहीं होना चाहिये। पीठ ने सरकार को सीख देते हुये कहा कि अपने अधिकारियों से शराब संबंधी कानून को व्यावहारिक रूप से लागू करने को कहें। वे आखों पर पट्टी बांधकर कानून को लागू नहीं करें। कानून के सामाजिक पहलू पर भी विचार करें। युवा जेल जाने के बाद अपराधियों की संगत में पड़कर अपराधी ही बनेंगे। उसने कहा कि किसी होटल की रसोई में एक बोतल शराब मिलती है तो क्या 40 करोड़ का होटल जब्त कर लेगे। न्यायालय परिसर में शराब की कोई खाली बोतल फेंक देता है तो उच्च न्यायालय को सील कर देंगे। आपने शराब मामले में 70 पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। अदालतों में शराब संबंधी मुकदमों की संख्या बढ़ती जा रही है। इससे सरकारी धन का भी दुरुपयोग हो रहा है। न्यायालय ने महाधिवक्ता ललित किशोर से कहा कि जब शराब ले जानेवाली कंपनी मेसर्स ग्लोबल ट्रेडिंग कंसर्न प्राईवेट लिमिटेड ने सभी वैध दस्तावेज दिखाये और उससे आपने टैक्स भी वसूल लिया फिर उसे कैसे जब्त कर लिया। जब एक देश से दूसरे देश सामान जा रहा है तो उस पर बिहार का कानून कैसे लागू हो सकता है। जब लॉरी में शराब लदी हुई थी तो आपको चाहिये कि स्कार्ट कर उसे रक्सौल सीमा पर छोड़ देते। न्यायालय ने महाधिवक्ता से कहा कि वे इसपर संबंधित अधिकारी से पूछकर 16 जनवरी को जवाब दें। मालूम हो कि कंपनी शराब की खेप आस्ट्रेलिया से नेपाल ले जा रही थी। कोलकाता डॉक पर उतरने के बाद उसे सील कर दिया गया और लॉरी पर कंटेनर लादकर सड़क के रास्ते उसे नेपाल ले जाया जा रहा था। उसे नवादा में जब्त कर लिया गया था। कंपनी ने इसे अपने वरीय अधिवक्ता वाईबी गिरी व निखिल अग्रवाल के माध्यम से चुनौती दी है और लॉरी को छोड़ देने की मांग की है ताकि उसे नेपाल पहुंचाया जा सके। अन्यथा राज्य सरकार उसे नष्ट कर देगी।

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