कौमी एकजेहती मुल्क की तरक्की के लिए जरूरी: राज्यपाल

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Patna-Oct.16,2019-Bihar Governor Phagu Chauhan is delivering his lecture during national seminar on “Role of Arabic, Persian and Urdu in National Integration” at Maulana Mazharul Haq University, Haj Bhawan in Patna. Photo by – Sonu Kishan.

राज्यपाल-सह-कुलाधिपति फागू चौहान ने कहा कि जब हरेक इंसान को मुल्क के र्जे-र्जे से मुहब्बत होगी, तभी कौमी एकता मजबूत होगी और देश तेजी से तरक्की कर पायेगा।‘‘राष्ट्रधर्म’ से बढ़कर दूसरा कोई धर्म नहीं है। राष्ट्रीय एकता के विकास से ही भारत पूरी दुनिया का पुन: सिरमौर बनेगा। उर्दू, अरबी-फारसी ये सभी भाषाएं भारत की एकता, अखंडता, सामाजिक सद्भावना और समरसता में विास रखने वाली भाषाएं हैं। इनके साहित्यकार भी मुल्क की कौमी एकजेहती में विास रखते हैं तथा राष्ट्रीय एकता को वे सवरेपरि मानते हैं। राज्यपाल बुधवार को मौलाना मजहरूल हक अरबी-फारसी विविद्यालय के तत्वावधान में ‘‘राष्ट्रीय अखंडता में अरबी-फारसी एवं उर्दू भाषा की भूमिका’ विषयक राष्ट्रीय सेमिनार का उद्घाटन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि किसी देश की मजबूती और तरक्की में जितना बड़ा योगदान सामाजिक-राजनीतिक नेताओं-कार्यकर्ताओं का होता है, उससे किसी मायने में कम उस मुल्क के अदीबों (साहित्यकारों), कलाकारों, शायरों-कवियों आदि का नहीं होता। अरबी-फारसी और उर्दू भाषाओं के विद्वान और शायरों का भारतीय स्वतंत्रता-आन्दोलन में भी बहुत बड़ा योगदान रहा है। राज्यपाल ने मौलाना मजहरूल हक को याद करते हुए कहा कि मौलाना साहब दरअसल एक ऐसे इंसान थे, जिन्होंने कौमी एकजेहती और तालीमी व्यवस्था के विकास के लिए अपनी जिंदगी में भरपूर काम किया। उन्होंने हिन्दू-मुस्लिम एकता के लिए अपनी जिंदगी की आखिरी सांस तक काम किया। वस्तुत: मौलाना साहब को इस बात में पूरा यकीन था कि साम्प्रदायिक सद्भावना मुल्क की बेहतरी और तरक्की के लिए निहायत जरूरी है। प्यार, भाईचारा और आपसी मेलो-मोहब्बत के बल पर ही हिन्दुस्तान की हिफाजत और तरक्की निर्भर है। मौलाना साहब यह मानते थे कि हिन्दुस्तान उस बाग के समान है, जहां किस्म-किस्म के फूलों की खूबसूरती और सुगंध इसकी रौनक बढ़ा रही है। श्री चौहान ने कहा कि मौलाना साहब भारत की सामासिक-संस्कृति और ‘‘विविधता में एकता’ के बहुत बड़े हिमायती थे। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बेहद करीबी सहयोगी थे। राज्यपाल ने विास व्यक्त किया कि मौलाना साहब के सपनों को साकार करने की दिशा में उनके नाम पर स्थापित यह विविद्यालय काफी गंभीरतापूर्वक कार्य कर रहा होगा और आज के आयोजन को भी इसी नजरिये से देखा जाना चाहिए। राज्यपाल ने कार्यक्रम में ‘‘स्मारिका’ का भी विमोचन किया। कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री कृष्ण नन्दन प्रसाद वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार सूबे में भाईचारा, मेलो-मुहब्बत और सामाजिक सद्भावना के विकास के लिए भरपूर प्रयास कर रही है और इसमें पूरी कामयाबी भी मिल रही है। उन्होंने कहा कि कौमी एकजेहती के माहौल में ही मुल्क तेजी से तरक्की कर सकता है। प्रो. तलहा रिजवी बर्क ने कहा कि खयालात में एकजेहती के साथ-साथ व्यवहार में एकजेहती भी बहुत जरूरी होती है। उन्होंने उर्दू एवं अरबी-फारसी के कई शायरों के खूबसूरत शेरों को पेश करते हुए उर्दू और अरबी-फारसी भाषा की अमन और कौमी एकजेहती के विकास में सार्थक भूमिका को रेखांकित किया। कार्यक्रम में स्वागत भाषण विविद्यालय के कुलपति डॉ. खालिद मिर्जा एवं धन्यवाद-ज्ञापन प्रतिकुलपति प्रो. सैय्यद मो. रफीक आजम ने किया। कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव आमिर सुबहानी, राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव ब्रजेश मेहरोत्रा आदि उपस्थित थे। राष्ट्रीय सेमिनार में प्रो.अब्दुल बारी (अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी), प्रो. सैय्यद अख्तर हुसैन (जेएनयू), प्रो. आफाक अहमद (बीएचयू), प्रो. ख्वाजा मो. एकरामुद्दीन (जेएनयू) सहित कई राष्ट्रीय ख्याति के विद्वानों ने भी शिरकत की है।

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