कैबिनेट का फैसला :राज्य में पूर्ण शराबबंदी को और प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए शुरू की जायेगी विशेष योजना

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 राज्य सरकार ने अपने कर्मचारियों को तोहफा देते हुए महंगाई भत्ता पांच से बढ़ाकर सात प्रतिशत कर दिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को हुई राज्य मंत्रि परिषद की बैठक में यह फैसला लिया गया। बैठक में 15 प्रस्ताव पर मुहर लगी, जिसमें सबसे महत्वपूर्ण राज्य के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी है। राज्यकर्मियों को बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता एक अप्रैल से मिलेगा। बैठक के बाद कैबिनेट विभाग के प्रधान सचिव अरुण कुमार सिंह ने बताया कि सरकार ने राज्य में पूर्ण शराबबंदी को और प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए सरकार ने एक विशेष योजना शुरू की है। इस योजना का मुख्य मकसद देसी शराब या महुआ की चुलाई या ताड़ी के व्यापार में कई पीढ़ियों से अवैध रूप से जुड़े निर्धनतम परिवारों को मुख्य धारा में शामिल करना है। योजना के अंतर्गत अगले तीन वर्षो में 840 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है। इसमें 25 फीसद राशि सरकार अनुदान के रूप में देगी, जबकि शेष 75 फीसद राशि का बंदोबस्त ग्रामीण विकास विभाग अपने स्तर पर करेगा। इसमें हर परिवार को न्यूनतम 60 हजार और अधिकतम एक लाख रुपये दिये जायेंगे। जो परिवार रुपये लौटाने की थोड़ी बहुत स्थिति में भी होंगे, उन्हें इसे बेहद कम दर पर लोन के रूप में रुपये दिये जायेंगे। जो परिवार किसी भी तरह से रुपये लौटाने की स्थिति में नहीं हैं, तो उन्हें ये रुपये अनुदान के रूप में मिलेंगे।
सड़क दुर्घटना से बचाव के लिए बुनियादी स्तर पर जरुरतों को बल देते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बृहस्पतिवार को स्कूली स्तर के पाठय़ पुस्तकों में सड़क सुरक्षा के संबंध में एक अध्याय सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को शैक्षणिक संस्थाओं के वाहनों में गति नियंत्रक उपकरण लगाने के साथ कई महत्वपूर्ण गाइडलाइन को जमीन पर उतारने का निर्देश दिया। विकास आयुक्त शिशिर सिन्हा की अध्यक्षता में गठित सड़क सुरक्षा से संबंधित उच्चस्तरीय कमिटी ने बृहस्पतिवार को अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी। रिपोर्ट देखने के बाद मुख्यमंत्री ने तय समय पर सड़कों की संरचनाओं में आवश्यक सुधार करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि यह ध्यान रखने की जरूरत है कि अब जो भी नयी सड़के बनायी जायें, उनमें जरूरत के मुताबिक अंडरपास और फुट ओवरब्रिज की भी व्यवस्था होनी चाहिये। फुटओवरब्रिज का डिजाइन और स्लोप ऐसा हो कि दिव्यांग और जानवर भी आसानी से उस पर जा सकें। मुख्यमंत्री ने दुर्घटनाओं को रोकने के लिए दुर्घटना स्थलों तथा ब्लैकस्पॉट पर आदेशात्मक, सचेतक एवं सूचनात्मक सांकेतिक चिह्न लगाने का निर्देश दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि बाइपास व सर्विस रोड पर पैदलयात्रियों के लिए विशेष रूप से फुटपाथ की व्यवस्था सुनिश्चित की जाये। मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों को कड़ाई से लागू करने एवं सुयोग्य चालकों को ही लाइसेंस जारी करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने सभी प्रकार के एम्बुलेंस की संख्या बढ़ाने का निर्देश दिया, ताकि सड़क दुर्घटना में घायलों को त्वरित चिकित्सा प्रदान किया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चे कल के जिम्मेदार नागरिक हैं। इस लिए सही समय पर इनके मन में सड़क सुरक्षा के प्रति संवेदनशील भावना जागृत करना आवश्यक है। सड़क हादसों से बच्चों पर मनोवैज्ञानिक एवं शारीरिक प्रभाव पड़ते हैं। ‘‘सड़क सुरक्षा नीति एवं कार्ययोजना’ के अंतर्गत सूचना, शिक्षा एवं संचार को महत्वपूर्ण मानते हुए मुख्यमंत्री ने नीति का निर्माण करने पर जोर दिया। इसके लिए विद्यालयों में शैक्षणिक कार्यक्रम, प्रिंट एवं दृश्य मीडिया के माध्यम से खतरनाक ड्राइविंग एवं इससे होने वाले दुष्परिणाम की जानकारी, नियमों के पालन के लिए प्रोत्साहन कार्यक्रम का आयोजन किया जाये। मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं के गंभीर कांडों में वर्तमान समय में धारा-304(1) (भादंवि) संख्या के अंतर्गत कांड अंकित किये जाते है, जो जमानतीय हैं। इसमें अधिकतम दो वर्ष की सजा का प्रावधान है। न्यायालय द्वारा कभी-कभी मात्र दंड के रूप में जुर्माने की राशि अदा करने के बाद दोषी चालकों को मुक्त कर दिया जाता है। इस धारा में आवश्यक सुधार की जरूरत है। इस संदर्भ में विधि विभाग से परामर्श लेकर सजा बढ़ाने के लिए कार्रवाई हो तो दुर्घटनाओं में कमी आ सकती है।

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