किसान सीख रहे खेती की आधुनिकतम तकनीक ,लग रही किसान पाठशाला

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राज्य के कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने एवं वातावरण की सुरक्षा की आवश्यकता को ध्यान में रखकर बिहार सरकार द्वारा समेकित कीट प्रबंधन कार्यक्रम अपनाया गया है, ताकि कृषि उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ कृषि उपज की गुणवत्ता एवं पर्यावरण संरक्षण आदि में सुधार हो सके। उन्होंने कहा कि फसल सुरक्षा कार्यक्रम के अन्तर्गत राज्य के प्रत्येक जिला में खरीफ फसलों में 4-4 अर्थात कुल 152 कृषक प्रक्षेत्र पाठशाला चलायी गयी एवं टाल विकास योजना अन्तर्गत राज्य के 6 जिलों के टाल क्षेत्रों में दलहनी फसलों पर 29 प्रखण्डों में 4-4 यानि कुल 116 कृषक प्रक्षेत्र पाठशाला चलायी जा रही है। कृषि मंत्री ने कहा कि इनके अतिरिक्त राज्य में सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल एक्सटेंशन, आत्मा योजना के अधीन वर्ष 2018-19 में राज्य में 3 किसान पाठशाला प्रति प्रखण्ड की दर से कुल 1,602 किसान पाठशाला कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्रों में चलाने के लक्ष्य के आलोक में अब तक कुल 1122 किसान पाठशाला का आयोजन किया जा चुका है। गत वर्ष राज्य में 1,866 किसान पाठशाला का आयोजन किया गया था।उन्होंने कहा कि फसल की बुआई से लेकर कटाई तक संचालित किए गए नियमित सत्रों के माध्यम से कृषकों का समूह फसल की पारिस्थितिकीको देखता है तथा उसकी गतिशीलता के बारे में र्चचा करता है। किसान पाठशाला ऐसे नवाचार किसानों के खेतों में स्थापित की जाती है, जो वैज्ञानिक और संधारणीय कृषि के माध्यम से अपने खेतों में उत्पादकता और लाभ में वास्तव में वृद्धि कर रहे हैं। किसान पाठशाला ज्ञान-प्रबंधन के लिए एक शक्तिशाली उपकरण है। यह एक वैकल्पिक विस्तार उपकरण है तथा कृषक-से-कृषक के शिक्षण को सुलभ बनाता है। यह वैज्ञानिक ज्ञान और कृषकों की पद्धतियों के बीच बढ़ते हुए अंतर को भी कम करता है। फार्म स्कूल उपलब्धि हासिल करने वाले कृषकों की तकनीकियों एवं नवाचारों का प्रचार-प्रसार फार्मर फील्ड स्कूल की समान प्रक्रिया का अनुपालन करते हुए किया जाता है। यहां सहयोगकर्ता अथवा शिक्षक उपलब्धि प्राप्त करने वाला किसान होगा तथा उसके फार्म में उपयुक्त तकनीकियों/प्रौद्योगिकियों का प्रसार किया जाता है। डॉ. कुमार ने कहा कि कृषि की आधुनिकतम तकनीक को किसानों तक पहुंचाने के लिए ‘‘करके सीखो’ के साथ देखकर एवं ऊ पज प्राप्त कर विास करें, फार्म स्कूल का प्रमुख सिद्धांत है। यह खेत-खलिहानों में संचालित होने वाला एक ऐसा अनौपचारिक स्कूल है, जहां सीखने एवं सिखाने वाले स्वयं प्रगतिशील किसान ही होते हैं।

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