किसानों की आय बढ़ाने के लिए जैविक खेती को बढ़ावा जरूरी

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आज राज्यपाल सहकुलाधिपति लाल जी टंडन से बिहार कृषि विविद्यालय, सबौर के कुलपति डॉ. अजय कुमार सिंह ने राजभवन आकर मुलाकात की तथा विविद्यालय की गतिविधियों से अवगत कराया। राज्यपाल श्री टंडन ने कुलपति डॉ. सिंह से बातचीत के दौरान कहा कि बिहार की अर्थव्यवस्था मूलत: कृषि पर आधारित है, इसलिए ‘‘तीसरे कृषि रोड मैप’ के अनुरूप, समेकित कृषि के विकास के लिए यह विविद्यालय शोध एवं प्रशिक्षण की गतिविधियों को भी कृषि शिक्षा के साथ-साथ आवश्यक रूप से विस्तारित करे। राज्यपाल श्री टंडन ने कुलपति को ‘‘जैविक खेती’ को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक निर्देश प्रदान किया तथा कहा कि सब्जियों एवं फल-फूलों की खेती पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ‘‘जैविक खेती’ को विकसित करने के लिए गो-पालन हेतु पशुपालकों को प्रेरित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि गो-पालकों को दुग्ध उत्पादन के साथ-साथ, गोमूत्र एवं गोबर के जरिये भी अच्छी आय हो जाती है। राज्यपाल ने कहा कि कृषकों को यह बताया जाना चाहिए कि आम-अमरूद के बड़े-बड़े बगीचों में भी हल्दी एवं अदरक आदि की उन्नत कृषि करते हुए अच्छी आमदनी प्राप्त की जा सकती है। श्री टंडन ने कहा कि इन फसलों के अलावा जैविक हरी साग-सब्जियों के जरिये भी किसान अपना आर्थिक सुदृढ़ीकरण कर सकते हैं। राज्यपाल ने गंगा एवं अन्य नदियों के तटीय इलाकों एवं टाल क्षेत्र में भी सब्जियों की ‘‘जैविक खेती’ को बढ़ावा देने का सुझाव दिया। उन्होंने सब्जियों के संग्रहण एवं विपणन हेतु भी आवश्यक व्यवस्था के लिए शोध-कायरे को प्रश्रय देने का निर्देश बिहार कृषि विविद्यालय के कुलपति को दिया। राज्यपाल ने कहा कि आगामी जाड़े के महीने में राजभवन में फूलों एवं सब्जियों की एक प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी, जिसमें कृषि-वैज्ञानिकों एवं किसानों को भी आमंत्रित किया जाएगा। राज्यपाल ने कहा कि राजभवन में जैविक खेती को बढ़ावा देने वाले किसानों को सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जायेगा। राज्यपाल ने कहा कि बिहार कृषि विविद्यालय, सबौर को इस प्रदर्शनी के संयोजन का दायित्व प्रदान किया जाएगा। कुलपति डॉंिसंह ने राज्यपाल को आास्त किया कि ‘‘जैविक खेती’ को प्रोत्साहित करने के लिए वे अपने विविद्यालय के माध्यम से भरपूर प्रयास करेंगे तथा चरणबद्ध कार्यक्रम संचालित करेंगे। उन्होंने कहा कि राजभवन में ‘‘जैविक कृषि प्रदर्शनी’ के आयोजन हेतु भी वे शीघ्र प्रस्ताव समर्पित करेंगे। कुलपति ने राज्यपाल को विविद्यालय की विगत तीन वर्षो की गतिविधियों पर आधारित एक पुस्तिका तथा अपनी एक पुस्तक भी भेंट की।

आज राज्यपाल सह कुलाधिपति लाल जी टंडन से बिहार के पर्यटन मंत्री प्रमोद कुमार ने राजभवन पहुंचकर शिष्टाचार मुलाकात की तथा पर्यटन विभाग द्वारा संचालित विभिन्न परियोजनओं से उन्हें अवगत कराया। राज्यपाल श्री टंडन को पर्यटन मंत्री ने बताया कि ‘‘स्वदेश दर्शन योजना’ के अन्तर्गत बिहार में ‘‘रामायण परिपथ (सर्किट)’ के विकास हेतु 103.17 करोड़ का डीपीआर तैयार कर स्वीकृति हेतु पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार को भेजा गया है। उन्होंने बताया कि इससे मां जानकी की जन्मभूमि सीतामढ़ी, दरभंगा और बक्सर को पर्यटकीय स्थल के रूप में विकसित करने हेतु विभिन्न योजनाएं कार्यान्वित होंगी। उन्होंने कहा कि ‘‘स्वदेशी दर्शन योजना’ के तहत ‘‘बौद्ध परिपथ’ एवं ‘‘गांधी परिपथ’ के विकास हेतु भी डीपीआर तैयार कर लिया गया है। राज्यपाल को मंत्री ने बताया कि 44.65 करोड़ की योजना गांधी परिपथ के विकास हेतु स्वीकृत हो चुकी है, जिसके अंतर्गत भीतिहरवा, चन्द्रहिया, तुरकौलिया आदि स्थलों का विकास होना है। उन्होंने कहा कि ‘‘स्वदेशी दर्शन योजना’ के तहत गया में 145.14 करोड़ की ‘‘कल्चरल सेन्टर’ के निर्माण की योजना स्वीकृत की गई है। इस योजना के तहत ‘‘जैन सर्किट’, ‘‘कांवरिया पथ’ तथा ‘‘अंग प्रदेश’ एवं ‘‘मंदार हिल सर्किट’ के विकास हेतु किए जा रहे कायरे की भी जानकारी दी। मंत्री ने राज्यपाल को पटना में बहुद्देशीय प्रकाश केन्द्र एवं उद्यान निर्माण तथा ‘‘प्रसाद योजना’ के तहत पटना साहिब के विकास आदि से संबंधित योजनाओं की भी जानकारी दी। मंत्री ने राज्यपाल को बताया कि पर्वतीय पर्यटकीय स्थलों के विकास हेतु राज्य में राजगीर, मंदार पर्वत बांका, रोहतासगढ़ किला, मुंडेवरी पर्वत, ब्रrायोणी पर्वत, डुंगेवरी पर्वत, प्रेतशिला पर्वत तथा वाणावर पर्वत पर ‘‘रोप-वे’ का निर्माण कराने के लिए भी योजनाएं पर्यटन विभाग द्वारा स्वीकृत की जा चुकी हैं। मंत्री श्री कुमार ने राज्यपाल को बताया कि बोधगया में धर्मारण्य वेदी में पर्यटकीय संरचनाओं के विकास तथा पर्वतपुरु ष दारथ मांझी की मूर्ति-स्थापना सहित मनेरशरीफ, कंगनघाट (पटना साहिब) आदि स्थलों पर पर्यटकीय सुविधाओं के विकास हेतु योजनाएं कार्यान्वित हुई हैं। राज्यपाल ने पर्यटन मंत्री से कहा कि बिहार की विरासतों और सांस्कृतिक समृद्धि को संरक्षित किया जाना निहायत जरूरी है। उन्होंने कहा कि बिहार के ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व के स्थलों को विकसित करते हुए राज्य की पर्यटकीय संभावनाओं को काफी बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि राजभवन में राज्य की ऐतिहासिक विरासतों की समृद्धि और विकास को लेकर एक सेमिनार आयोजित कराया जाना चाहिए। श्री टंडन ने कला-संस्कृति विभाग तथा पर्यटन विभाग को समेकित रणनीति तैयार करते हुए, बिहार की विरासतों और धरोहरों के विकास तथा राज्य की पर्यटकीय संभावनाओं को बढ़ाने का सुझाव मंत्री को दिया। राज्यपाल को मंत्री ने पर्यटन विभाग द्वारा प्रकाशित विभिन्न प्रचार-साहित्य भी भेंट किये।

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