कांग्रेस वर्किंग कमेटी में पहली बार बिहार का कोई चेहरा नहीं

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राहुल गांधी ने कांग्रेस का अध्यक्ष बनने के सात महीने बाद मंगलवार को पार्टी की कार्यसमिति (वर्किंग कमेटी) का गठन किया है. ऐसा पहली बार हुआ है जब कुल 51 सदस्यीय वर्किंग कमेटी में बिहार से किसी नेता को जगह नहीं दी गयी है. इसमें 23 सदस्य मनोनीत किये गये हैं. 18 स्थायी आमंत्रित सदस्य और 10 विशेष आमंत्रित सदस्य शामिल हैं.
हालांकि इसमें दो सदस्यों का मनोनयन होना है. ऐसे में स्थानीय नेता यह अनुमान लगा रहे हैं कि आने वाले समय में उन दोनों खाली सीटों पर बिहार के नेता ही चुनकर जायेंगे. वर्किंग कमेटी की अगली बैठक 22 जुलाई को बुलायी गयी है. कांग्रेस की इस नयी वर्किंग कमेटी में बिहार से किसी नेता को शामिल नहीं किये जाने से चर्चाओं का बाजार गर्म है.
राजनीतिक विश्लेषक इसे प्रदेश की उपेक्षा बता रहे हैं और इसकी एक बड़ी वजह बिहार कांग्रेस में आपसी कलह को भी ठहरा रहे हैं. जिस कारण राहुल गांधी नाराज बताये जाते हैं. हालांकि, पिछली बार वर्किंग कमेटी की बैठक में डॉ शकील अहमद और मीरा कुमार शामिल थीं.
51 सदस्यीय वर्किंग कमेटी में सूबे के किसी नेता को जगह नहीं दी गयी
 
राहुल गांधी की नयी टीम में युवा 
इस नयी वर्किंग कमेटी को राहुल गांधी की नयी टीम के रूप में देखा जा रहा है. इसमें युवा चेहरों को मौका दिया गया है. उत्तर प्रदेश से जितिन प्रसाद को विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया गया है. ज्योतिरादित्य सिंधिया, गौरव गोगोई, दीपेंद्र हुड्डा को कार्यसमिति में जगह दी गयी है. पूर्व प्रदेश अध्यक्ष  अरुण यादव को भी जगह दी गयी है. वहीं, हरियाणा से कुलदीप विश्नोई भी जगह पाने में कामयाब रहे हैं.
दलितों को मिला प्रतिनिधित्व : वहीं दलितों का प्रतिनिधित्व ठीक-ठाक है. कुमारी शैलजा, मल्लिकार्जुन खड़गे, पीएल पुनिया व मुकुल वासनिक को जगह मिली है.
कई वरिष्ठ नेताओं का नाम नहीं : इस वर्किंग कमेटी में दिग्विजय सिंह, मोहन प्रकाश, सीपी जोशी, जनार्दन द्विवेदी, ऑस्कर फर्नांडिस, सुशील कुमार शिंदे, कश्मीर के पूर्व महाराजा डॉ कर्ण सिंह का नाम नहीं है.
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