कांग्रेस की मजबूरी है कुमारस्वामी सरकार, पर क्या सिद्धारमैया पर चलेगा राहुल गांधी का जोर?

0
79

राजनीति एक अलग तरह का व्यापार है और कर्नाटक के पूर्व सीएम सिद्धारमैया यह अच्छी तरह से जानते हैं. राज्य में दोबारा कांग्रेस की सरकार लाने में असफल होने के बाद उन्हें अपने प्रतिद्वंद्वियों यानी कि गौड़ा परिवार के साथ काम करना पड़ रहा है. उनके करीबियों का मानना है कि सिद्धारमैया ने एचडी कुमारस्वामी की तुलना में येदियुरप्पा को चुना होता.

कांग्रेस हाई कमान चाहता है कि कांग्रेस-जेडीएस का गठबंधन बना रहे और सिद्धारमैया को राजनीति की कड़वी सच्चाई का सामना करना पड़ रहा है.

पीएम मोदी, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष येदियुरप्पा के खिलाफ इतना कुछ बोलने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री बीजेपी को सत्ता में वापस लाने का आरोप अपने ऊपर नहीं ले सकते थे. लेकिन गौड़ा परिवार के हाथ में सत्ता होने को लेकर उनकी असहजता दिनोंदिन बढ़ती जा रही है.

तीन सप्ताह पहले जब कुमारस्वामी सरकार की कैबिनेट का गठन हुआ तब से ही सिद्धारमैया गठबंधन सरकार के बारे में बोलने लगे हैं. उनके करीबी माने जाने वाले कई विधायकों को कैबिनेट में जगह नहीं मिली है और इससे वह नाराज हैं.

यह भी पढ़े  कर्नाटक में मंत्री पद न मिलने से कांग्रेस विधायकों में गुस्सा, भाजपा में हो सकते हैं शामिल!

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जानते थे कि यदि कोई परेशानी खड़ी कर सकता है तो वह सिद्धारमैया ही हैं. इसलिए उन्होंने सिद्धारमैया को कांग्रेस लेजिस्लेटिव पार्टी का नेता और कांग्रेस-जेडीएस कोऑर्डिनेशन कमिटी का चेयरमैन बना दिया ताकि वह खुश रहें और नियंत्रण में रहें.

हालांकि सिद्धारमैया इससे खुश नजर नहीं आ रहे हैं. वह मंगलुरु के समीप एक नैचुरोपैथी सेंटर में चले गए हैं, उन्होंने कहा कि वह काफी थक गए हैं और उन्हें डिटॉक्स ट्रीटमेंट की आवश्यकता है.वहां उन्होंने अपने भरोसेमंद विधायकों से मुलाकात की. वहां उनके बीच हुई प्राइवेट बातचीत कुछ अज्ञात लोगों ने मीडिया में लीक कर दी. प्रदेश कांग्रेस के नेताओं की मानें तो गौड़ा और राहुल गांधी को कड़ा संदेश देने के लिए सिद्धारमैया इन लोगों का इस्तेमाल कर रहे हैं.

सिद्धारमैया चाहते हैं कि उनके कम से कम 2-3 भरोसमेमंद विधायकों को कैबिनेट में जगह दी जाए और उनकी पसंद के नेता को कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमिटी का अध्यक्ष बनाया जाए.

यह भी पढ़े  कर्नाटक में अब गठबंधन नाटक: विभागों के बंटवारे पर कांग्रेस-JDS में सियासी गतिरोध जारी

कुमारस्वामी यह बात जानते हैं. उन्होंने राहुल गांधी से कहा है कि यदि वह चाहते हैं कि सरकार बनी रहे तो उन्हें सिद्धारमैया को काबू में रखना होगा. बता दें कि कुमारस्वामी और सिद्धारमैया के बीच संबंध सहज नहीं हैं. जेडीएस के एक नेता ने कहा, “गौड़ा से ज्यादा राहुल गांधी इस सरकार को बनाए रखना चाहते हैं. यह सरकार गिरी तो कांग्रेस अपना आधार खो देगी. लेकिन कुमारस्वामी के साथ ऐसी स्थिति नहीं है. वह विक्टिम कार्ड खेलते हुए बीजेपी के पास वापस जा सकते हैं.”

दूसरी बात यह है कि जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन कई कारणों से अस्तित्व में आया था. इनमें से ज्यादातर कारण राष्ट्रीय हैं न कि क्षेत्रीय. गैर-बीजेपी/एनडीए रीजनल पार्टियों ने कांग्रेस-जेडीएस के लिए साथ आने का मंच तैयार किया. ये पार्टियां 2019 के आम चुनाव में मोदी के खिलाफ एकजुट हो रही हैं. अब यदि कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन टूटता है तो क्षेत्रीय पार्टियां कांग्रेस को कभी माफ नहीं करेंगी.

इन संवेदनशील मुद्दों को ध्यान में रखते हुए राहुल गांधी ने सरकार को बचाए रखने का भार कर्नाटक में अपनी पार्टी के नेताओं पर डाल दिया है. वह जेडीएस को खुश रखने के लिए झुकने को तैयार हैं.

यह भी पढ़े  Karnataka election 2018: कांग्रेस नेता सुबह बीजेपी में हुए शामिल, शाम को इस्तीफा देकर फिर पकड़ा 'हाथ'

कांग्रेस पर दबाव बनाने के लिए कुमारस्वामी भी पीएम मोदी से अपने रिश्ते अच्छे बनाए हुए हैं. यह भी देखा जा रहा है कि प्रदेश बीजेपी भी कांग्रेस पर फोकस कर रही है और जेडीएस पर हमले करने से बच रही है. यदि लोकसभा चुनाव से पहले कुमारस्वामी सरकार गिर जाती है तो कांग्रेस और सिद्धारमैया पर इसका आरोप आएगा. बीजेपी चाहती है कि ऐसा ही हो. इस तरह सरकार गिराने का आरोप बीजेपी के सिर नहीं आएगा और उसे वोक्कालिगा वोटर्स के गुस्से का शिकार नहीं होना पड़ेगा.

अब तो यह देखना होगा कि सिद्धारमैया पर राहुल गांधी का कितना जोर चलता है. यह तय है कि राहुल गांधी सरकार को बनाए रखने के लिए हरसंभव कोशिश करेंगे क्योंकि इस पर उनका सबकुछ दांव पर लगा है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here