कला और साहित्य में बिहार का अवदान अनुपम :राज्यपाल

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Patna-Oct.28,2018-Bihar Governor Lalji Tandon and others are releasing book during programme in honour of Acharya Shri Ranjan Suridev at Tara Mandal auditorium in Patna.

बिहार की धरती के सपूतों का भारतीय संस्कृति, कला, भाषा और साहित्य की दुनिया को अनुपम अवदान रहा है। भारतीय शिक्षित समाज, लोकतांत्रिक व्यवस्था और समतामूलक समन्वयकारी सोच को विकसित करने में बिहार ने सदा महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। ज्ञान, कर्म और नीति की सुदीर्घ परम्परा बिहार में रही है। उक्त उद्गार राज्यपाल लाल जी टंडन ने इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, नयी दिल्ली द्वारा स्थानीय तारामंडल सभागार में ‘‘संस्कृति से संवाद श्रृंखला’ के 10 वें संस्करण के रूप में संस्कृत, हिन्दी एवं प्राकृत-पाली के प्रकांड विद्वान आचार्य श्रीरंजन सूरिदेव के सम्मान में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए व्यक्त किये। समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए राज्यपाल श्री टंडन ने कहा कि बिहार में कौटिल्य, चंद्रगुप्त, याज्ञवलक्य, मंडन मिश्र , भारती मिश्र सहित अनेक विद्वानों- दार्शनिकों एवं तत्वचिंतकों की सुदीर्घ परम्परा रही है। विक्रमशिला एवं प्राचीन नालंदा विविद्यालय में देश-विदेश से विद्यार्थी विद्या अध्ययन के लिए आते थे। ज्ञान, कर्म, कला और संस्कृति के क्षेत्र में बिहार का अमूल्य योगदान रहा है। राज्यपाल ने कहा कि कालान्तर में भारतीय संस्कृति में जो विसंगतियां आयीं, उनके निराकरण के लिए हमारा संविधान और उदार सामाजिक-दार्शनिक चिंतन पर्याप्त है। उन्होंने कहा कि डॉ. अम्बेदकर ने भी माना है कि अनेक विसंगतियों के बावजूद भारतीय संस्कृति पूरे विश्व में सवरेत्तम है। राज्यपाल ने कहा कि कार्यक्रम में आत्यन्तिक अस्वस्थता के कारण श्रीरंजन सूरिदेव जी की गैरमौजूदगी के बावजूद उनकी साहित्यिक प्रेरणा हम सबको उनके प्रति श्रद्धावनत होने का सुअवसर देती है। राज्यपाल ने कहा कि साहित्यकार देश और समाज को नयी दिशा और दृष्टि प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि श्रीरंजन सूरिदेव जी के सारस्वत अवदान के प्रति अपना आदर प्रकट करने मैं इस कार्यक्रम के बाद अस्पताल में जाकर उनसे मिलूंगा और उन्हें सम्मानित करूंगा। बाद में राज्यपाल ने कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र की समाप्ति के बाद, कंकड़बाग, पटना स्थित ‘‘साईं हॉस्पीटल’ जाकर वहां इलाज करा रहे श्रीरंजन सूरिदेव जी को अंगवस्त्रम् एवं प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया एवं उनके शीघ्र स्वस्थ होने तथा सुदीर्घ जीवन के लिए अपनी मंगलकामनाएं व्यक्त कीं। ज्ञातव्य है कि आज ही श्रीरंजन सूरिदेव का जन्मदिन भी है और उन्होंने अपने 93 वर्ष पूरे किए हैं। राज्यपाल ने आचार्य सूरिदेव को जन्मदिन की भी बधाई दी। समारोह के उद्घाटन सत्र में केन्द्रीय स्वास्य राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि श्रीरंजन सूरिदेव भारतीय ज्ञान परम्परा के एक सुदृढ़ स्तंभ हैं। समारोह के उद्घाटन सत्र में माखनलाल चतुव्रेदी पत्रकारिता एवं संचार विविद्यालय, भोपाल के पूर्व कुलपति अच्युतानंद मिश्र, इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी, प्रो. अरुण कुमार भगत , शहर की मशहूर समाज सेविका और महिला कल्याण समिति की सचिव श्रीमतीअर्चना राय भट्ट आदि ने भी भाग लिया किया। धन्यवाद ज्ञापन अभिजीत कश्यप एवं संचालन कृष्णकांत ओझा ने किया। कार्यक्रम में डॉ. शिवनारायण ने श्रीरंजन सूरिदेव के भेजे गये संदेश को पढ़कर सुनाया जिसमें उन्होंने कहा है कि वे शब्द और संस्कृति की साधना में आगे भी लगे रहेंगे। कार्यक्रम में राज्यपाल ने अरुण कुमार भगत द्वारा संपादित ग्रंथ ‘‘साहित्य और साहित्यकार-सर्जक -आचार्य श्रीरंजन सूरिदेव’ को भी लोकार्पित किया।

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Patna-Oct.28,2018-Bihar Governor Lalji Tandon is delivering his lecture during programme in honour of Acharya Shri Ranjan Suridev at Tara Mandal auditorium in Patna.

बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन के प्रधानमंत्री आचार्य श्रीरंजन सूरिदेव के शीघ्र स्वास्य-लाभ के लिए सम्मेलन सभागार में मंगल कामना सभा आयोजित की गई। रविवार को उनके 94 वें जन्म-दिवस पर सम्मेलन अध्यक्ष डा. अनिल सुलभ की अध्यक्षता में आयोजित इस सभा में साहित्यकारों ने उनके प्रति मंगल भाव व्यक्त करते हुए उनके शीघ्र स्वस्थ होने तथा शतायु होने की कामना की। स्मरणीय है कि आचार्य सूरिदेव नगर के एक निजी अस्पताल में भर्ती हैं। वे कुछ महीने से किडनी की समस्या से पीड़ित हैं। महीना दिन पूर्व भी वे हृदय में पीड़ा की शिकायत पर अस्पताल ले जाए गए थे। तब से वे बिस्तर पर हीं हैं। उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए डा. सुलभ ने कहा कि आचार्य सूरिदेव ने एक संत की भांति साहित्य की आध्यात्मिक-साधना की है। दो माह पूर्व तक उनकी साहित्यिक सक्रियता बनी रही थी और वे प्रतिदिन कुछ न कुछ लिखते रहे। इनका सान्निध्य और आशीर्वाद पाकर अनेक नवोदित साहित्यकारों ने साहित्य-समाज में प्रतिष्ठा पाई है। वरिष्ठ साहित्यकार जियालाल आर्य ने कहा कि आचार्यजी बहुभाषाविद् विद्वान हैं और उन्होंने भारतीय सभ्यता, संस्कृति और साहित्य के उन्नयन में अपनी लेखनी के माध्यम से अमूल्य कार्य किया है। पटना विविद्यालय के पूर्व कुलपति व साहित्यसेवी डा. एसएनपी सिन्हा ने कहा कि सूरिदेव जी एक विलक्षण साहित्यिक प्रतिभा के महापुरु ष हैं। डा. शिववंश पाण्डेय ने कहा कि साहित्यिक समालोचना और संपादन में आचार्य जी ने एक नई शैली विकसित की है। नृपेंद्र नाथ गुप्त, डॉ. शंकर प्रसाद, कवि बच्चा ठाकुर, कवि योगेन्द्र प्रसाद मिश्र, शायर आरपी घायल, डॉ. शालिनी, डा विनय कुमार विष्णुपुरी, डा मनोज गोवर्धनपुरी, जयप्रकाश पुजारी, आचार्य आनंद किशोर शास्त्री, कुमारी मेनका आदि साहित्यकारों ने भी अपने मंगलभाव प्रकट किए।

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