कर्नाटक में आएगी बीजेपी या कांग्रेस-जेडीएस? गवर्नर के पास ये हैं विकल्प

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कर्नाटक में 222 सीटों पर वोटिंग नतीजे आ चुके हैं. यहां बीजेपी 104, कांग्रेस 78 और जेडी (सेक्युलर) 38 सीटों पर विजयी हुई है. एक तरफ कांग्रेस-जेडीएस मिलकर सरकार बनाने के तैयार हैं तो दूसरी तरफ बीजेपी भी सरकार बनाने के दावा पेश कर चुकी है. ऐसे में देखना होगा कि कर्नाटक के गवर्नर वजुभाई सरकार बनाने के लिए पहले किसे आमंत्रित करते हैं. सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी के पास 104 सीटें हैं, जो बहुमत के आंकड़े (112) से आठ कम है.

सरकार बनाने के लिए किसे पहले बुलाना चाहिए, इसपर संवैधानिक विशेषज्ञों की राय अलग-अलग है. कांग्रेस का कहना है कि गोवा और मणिपुर में भी सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए बुलाना चाहिए था, जहां उनकी पार्टी ने सबसे ज्यादा सीटें हासिल की लेकिन फिर भी बीजेपी ने क्षेत्रीय पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बना ली.

टाइम्स ऑफ इंडिया ने पूर्व अटॉर्नी जनरल सोली सोराबजी के हवाले से बताया कि सरकार बनाने के लिए सबसे बड़ी पार्टी को पहले आमंत्रित किया जाना चाहिए. इस पार्टी को बहुमत साबित करने के लिए 7-10 दिनों का समय मिलना चाहिए. अगर वे बहुमत साबित करने में नाकामयाब रहते हैं तो दूसरी सबसे बड़ी पार्टी या गठबंधन को बुलाना चाहिए. अगर वे भी सरकार नहीं बना पाते तो राष्ट्रपति शासन लगा देना चाहिए.

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हालांकि इसमें दूसरा पहलू यह भी है कि अगर गठबंधन करने वाली पार्टियों के पास बहुमत है तो उन्हें सरकार बनाने की इजाजत मिलनी चाहिए. 2006 में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच की टिप्पणी के मुताबिक, “अगर कोई पार्टी, किसी अन्य राजनीतिक पार्टी या विधायकों के समर्थन से सरकार बनाने का दावा पेश करती है और बहुमत के संबंध में गवर्नर को संतुष्ट करती है तो गवर्नर उन्हें सरकार बनाने से नहीं रोक सकते…”

क्या थी मेघालय, मणिपुर, गोवा और दिल्ली की स्थिति
मेघालय (2018)- 60 सीट – यहां कांग्रेस को 21 सीटें मिली थीं. जबकि एनपीपी (19) ने बीजेपी (2), यूडीपी (6), एचएसपीडीपी (2) और आईएनडी (1) के साथ मिलकर सरकार बना ली.

मणिपुर (2017) – 60 सीट- यहां 28 सीटों के साथ कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी थी. बहुमत के लिए कांग्रेंस के पास 3 सीटों की कमी थी. यहां भी 21 सीटें जीतने वाली बीजेपी ने एनपीपी (4), एनएफपी (4) और एलजेपी (1) के साथ मिलकर सरकार बना ली.

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गोवा (2017) – 40 सीट – यहां कांग्रेस के पास 17 सीटें थीं, जो कि बहुमत से 4 कम थी. बीजेपी ने यहां 13 सीट जीती और एमजीपी (3), जीएफपी (3) और आईएनडीएस (3) के साथ मिलकर सरकार बना ली.

दिल्ली (2013) – 70 सीट – यहां 32 सीट जीतकर बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी थी. जबकि आम आदमी पार्टी ने 28 सीटें जीती. ‘आप’ ने कांग्रेस के 8 विधायकों के सपोर्ट से यहां सरकार बना ली. हालांकि, 49 दिन में ही ये सरकार गिर गई.

हालांकि कुछ एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह गवर्नर के अंतिम निर्णय पर निर्भर करता है. ऐसे कुछ उदाहरण भी हैं, जब ‘सिंगल लार्जेस्ट पार्टी’ को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया गया.

महाराष्ट्र (2014) – 288 सीट – यहां बीजेपी ने 122 सीटें जीती थीं. शिवसेना के पास 63, कांग्रेस के पास 42 और एनसीपी के पास 41 सीटें थीं. यहां गवर्नर ने बीजेपी को आमंत्रण दिया और उन्होंने सरकार बनाई.

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राजस्थान (2008)- 200 सीट – यहां कांग्रेस 96 सीट जीतकर सिंगल लार्जेस्ट पार्टी थी. बीजेपी ने 78, बीएसपी ने 6, आईएनडीएस ने 14 और अन्य ने 6 सीटें जीती थीं. यहां कांग्रेस ने दावा पेश किया और बीएसपी व आईएनडीएस के साथ मिलकर सरकार बनाई.

लोकसभा चुनाव (1996) – बीजेपी ने 161, कांग्रेस ने 140, जेडी ने 46, लेफ्ट ने 46 और अन्य ने 152 सीटें जीती. उस वक्त वाजपेयी नेतृत्व में बीजेपी ने गठबंधन की सरकार बनाई. हालांकि यह सरकार सिर्फ 13 दिन ही टिक पाई.

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