कर्ज मुक्त करने की मांग पर दिल्ली में किसानों का जमावड़ा, किया संसद की ओर कूच

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कर्ज माफी और न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की मांग को लेकर ‘अन्नदाता’ दिल्ली की सड़कों पर उतर आए हैं. शीतकालीन सत्र के ठीक पहले संसद तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए हजारों किसानों ने शुक्रवार मेगा रैली कर रहे हैं. ‘किसान मुक्ति मार्च’ के बैनर तले हजारों किसान रामलीला मैदान से संसद भवन की ओर बढ़ रहे हैं. किसानों की सरकार से मांग है कि उन्हें राम मंदिर नहीं चाहिए, कर्ज माफी चाहिए. सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने के तमिलनाडु से आए किसानों ने नग्न होकर प्रदर्शन किया. किसानों के संसद मार्च में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी चीफ शरद पवार, नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता फारूक अब्दुल्ला, लोकतांत्रिक जनता दल के शरद पवार समेत कई नेता शामिल हो सकते हैं.

हालांकि, दिल्ली पुलिस ने संसद मार्ग तक किसानों को पैदल मार्च की परमिशन नहीं दी है. वहीं, किसानों संगठनों का कहना है कि उनका संसद भवन मार्च शांति पूर्वक होगा. किसानों के मार्च के चलते रामलीला मैदान के बराबर की एक सड़क पर यातायात पूरी तरह बंद कर दिया गया है.

किसानों का दिल्ली पहुंचने का सिलसिला बुधवार रात से ही शुरू हो गया था. गुरुवार रात तक रामलीला मैदान में हजारों की संख्या में किसान जमा हो गए थे. गुरुवार को तमिलनाडु से आए किसानों ने आत्महत्या कर चुके किसानों की खोपड़ी के साथ प्रदर्शन किया. उन्होंने धमकी भी दी कि अगर शुक्रवार को किसानों को संसद जाने से रोका गया, तो वो नग्न होकर प्रदर्शन करेंगे.

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समिति के महासचिव अवीक शाहा और स्वराज इंडिया के संयोजक योगेन्द्र यादव की अगुवाई में दक्षिण पश्चिमी दिल्ली के बिजवासन से सुबह शुरु हुयी किसान मुक्ति यात्रा लगभग 25 किमी की पदयात्रा कर देर शाम रामलीला मैदान पहुंची। अखिल भारतीय किसान सभा के सचिव अतुल कुमार अनजान सहित संगठन के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी रामलीला मैदान में आंदोलनकारियों के लिये सुविधाओं का लगातार जायजा लेते रहे।

अनजान ने बताया कि नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुरुग्राम की ओर से भी किसानों के समूह पैदल और वाहनों से रामलीला मैदान पहुंच रहे हैं। फरीदाबाद की ओर आश्रम होते हुये रामलीला मैदान पहुंच रही किसान मुक्ति यात्रा की अगुवाई सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर और वरिष्ठ पत्रकार पी साईनाथ ने की।

इस बीच पूर्व सैनिकों के संगठन ने भी किसानों की मांग का समर्थन करते हुये किसान मुक्ति यात्रा में शिरकत की। संगठन के प्रमुख मेजर जनरल सतबीर सिंह ने कहा कि पूर्व सैनिक किसान आंदोलन में दो दिन तक साथ रहेंगे। अनजान ने बताया कि यह पहला अवसर है जब किसानों के समर्थन में डॉक्टर, वकील, शिक्षक, रंगकर्मी और छात्र संगठनों सहित समाज के सभी वर्गों ने भी किसान आंदोलन में हिस्सेदारी की है।

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साईनाथ की अगुवाई में गठित समूह ‘नेशन फॉर फार्मर्स’ के बैनर तले विभिन्न सामाजिक समूहों ने आंदोलन में शिरकत की है। सभी संगठनों के कार्यकर्ता बिजवासन, मजनू का टीला, निजामुद्दीन और आनंद विहार से किसान आंदोलनकारियों के साथ रामलीला मैदान पहुंच गये।

अनजान ने बताया कि रामलीला मैदान में सरकारी और गैरसरकारी स्तर पर स्वास्थ्य, भोजन और पानी सहित अन्य जरूरी सुविधायें मुहैया करायी जा रही है। लगभग 60 हजार लोगों की क्षमता वाले रामलीला मैदान में एम्स, आरएमएल, लोकनायक, हिंदूराव, अरुणा आसिफ अली अस्पताल सहित दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों के करीब 25 से 30 डॉक्टरों ने रामलीला मैदान पर किसानों के लिए एक निशुल्क स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया। साथ ही विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से भोजन और रात के समय सर्दी से बचने के लिये जरूरी कपड़ों की व्यवस्था की गयी है।

आंदोलन में जुट रही भीड़ को देखते हुये दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किये हैं। पुलिस ने बताया कि बृहस्पतिवार को रामलीला मैदान में पुलिसबल तैनात किया गया है। साथ ही शुक्रवार को रामलीला मैदान से संसद मार्ग तक किसान मार्च मार्ग में भी सुरक्षा और यातायात के विशेष प्रबंध किए गए हैं। पुलिस ने कहा कि किसानों के मार्च के दौरान सड़कों के दोनों तरफ रस्सी होगी और दूसरी तरफ पुलिस तैनात होगी ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि यातायात प्रभावित नहीं हो।

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राजधानी में यातायात प्रभावित ना हो इसके लिए शुक्रवार को 3,500 पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे। कल किसान रामलीला मैदान से संसद मार्ग पर मार्च निकालने वाले हैं। राजनीतिक कार्यकर्ता और आप के पूर्व नेता योगेन्द्र यादव ने ट्वीट किया है, ‘‘आज सुबह बिजवासन से महिला किसानों ने हमें दुआ-सलाम किया। वे लोग किसान मुक्ति मोर्चा में भाग लेने के लिए तैयार हैं। यदि आप किसान नहीं हैं, फिर भी हमारे साथ आएं। हमें भोजन देने वालों के साथ हाथ मिलाएं। जय किसान।’’

वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने भी ट्वीट किया है, ‘‘पिछले 15 साल में भारत में तीन लाख से भी ज्यादा किसानों ने आत्महत्या की है क्योंकि सरकारें लगातार उन्हें धोखा देती रहीं। कल देश भर से आए एक लाख किसान दिल्ली की ओर कूच करेंगे और फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य तथा कर्ज से मुक्ति की मांग करेंगे। उनके साथ एकजुटता दर्शाते हुए खड़े हों।’’

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