ऐतिहासिक काव्य नाटक‘‘जयचंद के आंसू‘‘ का मंचन

0
112

डॉ छोटू नारायण सिंह लिखित एवं भारतीय संस्कृति-साहित्य के लेखक एवं विज्ञान लेखक अरविन्द कुमार द्वारा नाट्य-रूपांतरित एवं सुनिता भारती द्वारा निर्देशित ऐतिहासिक काव्य नाटक ‘‘जयचंद के आंसू’ का मंचन किया गया। नाटक का प्रस्तुतीकरण संस्कृति संरक्षण और शिक्षा सुधार के लिए कार्यरत संस्था ‘‘फेसेस’ द्वारा किया गया। पटना रंगमंच के लिए यह पहला काव्य नाटक है। इस अवसर पर पटना संग्रहालय के अपर निदेशक डॉ. विमल तिवारी मुख्य अतिथिएवं डॉ. उमेश द्विवेदी और शिवनारायण झा कुणाल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कथासार : 1192 में मुहम्मद गोरी को आमंत्रित करने के बाद जो अनेक घटनाक्रम चलते हैं और जिनकी परिणति पृवीराज की मृत्यु और भारत की पराधीनता में होती है, उससे जयचंद अनुद्वेलित नहीं रहा होगा। उसके मन में भी उत्ताप की अग्नि जलती है और उसे अपने कुकृत्यों के लिए गहरा पश्चाताप होता है। नाटक में दिखाया गया है कि आपसी विद्वेष, मद और भौतिक स्वार्थ से अभिभूत हो कर व्यक्ति अपनी संस्कृति और राष्ट्र से द्रोह तो करता है, किन्तु इसका परिणाम स्वयं उसके लिए भी घातक होता है। पृवीराज को कैद करने के बाद मुहम्मद गोरी अपने सहयोगी जयचंद पर भी आक्रमण करता है और उसे राज-च्युत कर देता है। पहले दृश्य में जब जयचंद गोरी से इस अनपेक्षित आक्रमण का कारण पूछता है तो गोरी जयचंद को उसके कुकृत्यों के लिए धिक्कारते हुए अपने प्रतिपक्षी पृवीराज के शौर्य और राष्ट्रभक्ति के लिए उसकी खुले हृदय से प्रशंसा करता है। यही इस काव्य नाटक की विशेषता है, जहां विरोधी भी पृवीराज जैसे राष्ट्र-भक्तों के लिए आदर का भाव रखता है किन्तु गद्दारों से नफरत करता है, भले ही गद्दारों ने उसके विजय अभियान में उसका साथ दिया हो।शेष पांच दृश्यों में अपनी मृत्यु के पहले की एक रात में, जयचंद की मन:स्थिति को दिखाया गया है, जिसमें उसके ह्रदय में जलती पश्चाताप की ज्वाला एवं जीवन काल की परिस्थिजन्य विवशताओं की अच्छी-बुरी स्मृतियों का सजीव चितण्रहै।

यह भी पढ़े  कुछ भी हो, अगले साल केंद्र में सरकार नरेंद्र मोदी की ही बनेगी :नीतीश कुमार

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here