एनडीए भोज में अमित शाह भी तो नहीं आए थे :उपेंद्र कुशवाह

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.राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा शुक्रवार शाम को आयोजित सुशील मोदी की इफ्तार पार्टी में शामिल नहीं होंगे। इससे पहले वह गुरुवार को एनडीए के भोज कार्यक्रम में भी शामिल नहीं हुए थे। शुक्रवार सुबह वह दिल्ली से पटना आए। एयरपोर्ट से सीधे रोहतास निकल गए। उपेंद्र कुशवाह के इस रैवेये से राज्य में एनडीए गठबंधन को लेकर सियासी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। एनडीए के भोज में शामिल न होने और उनकी नाराजगी संबंधी एक सवाल पर उन्होंने कहा, ” मैं निजी कारणों से शामिल नहीं हो पाया। भोज में तो अमित शाह भी नहीं आए थे तो क्या वह नाराज हैं?

“हम एनडीए के साथ, गठबंधन एकजुट”

– कुशवाह ने कहा, ” रालोसपा एनडीए के साथ है। एनडीए एकजुट है। कोई नाराजगी नहीं। हम गठबंधन से अलग नहीं होंगे।”

– “भोज में तो अमित शाह भी नहीं आए थे तो क्या वह नाराज हैं? मैं व्यक्तिगत कारणों से भोज में शामिल नहीं हो पाया। इसका दूसरा मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए। हमारे सारे नेता भोज में शामिल हुए थे।”

– रालोसपा अध्यक्ष नागमणि के बयान पर कुशवाह ने कहा कि इस बारे में नागमणि से ही पूछा जाए। वे ही इस सवाल का जवाब देंगे।

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– बता दें कि नागमणि ने कहा था कि अगर एनडीए लोकसभा और विधानसभा चुनाव जीतना चाहती है तो उसे उपेंद्र कुशवाहा के चेहरे पर चुनाव लड़ना होगा।

– नागमणि ने यह भी कहा था, “2020 में होने वाले विधानसभा चुनाव में एनडीए की तभी जीत मिलेगी जब उपेंद्र कुशवाहा को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया जाएगा। हम नीतीश के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन वर्तमान परिस्थिति में एनडीए नीतीश के चेहरे से नहीं जीत सकती।”

– एयरपोर्ट से उपेंद्र कुशवाह कार सेरोहतास निकल गए। वहां से उनका कैमूर जाने का कार्यक्रम है।

गठबंधन की एकजुटता पर संकट के बादल

-हालांकि, कुशवाह ने एनडीए की एकजुटता की बात कही है। लेकिन, बताया जा रहा है कि एनडीए भोज में कुशवाहा का शामिल न होना गठबंधन की एकजुटता के लिए चिंता है। वह भी तब जब बिहार में सभी घटक दलों ने अभी से लोकसभा सीटों पर दावेदारी का दांव ठोंक दिया।

– राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कुशवाह को आशंका है कि मौजूदा एनडीए गठबंधन में लोकसभा चुनावों में रालोसपा की सीटें कम हो सकती हैं। ऐसे में वह दबाव की राजनीति कर रहे हैं। पहले भोज व फिर सुशील मोदी की इफ्तार पार्टी में शामिल न होना कुछ इसी ओर संकेत कर रहा है।

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महागठबंधन में शामिल होने का न्योता

पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने कहा कि अगर उपेंद्र कुशवाहा महागठबंधन में आएंगे तो हम उनका स्वागत करेंगे। अगर उपेंद्र कुशवाहा मुख्यमंत्री पद के चेहरे की बात छोड़कर महागठबंधन में आना चाहते हैं तो उनका स्वागत है। महागठबंधन में एक ही चेहरा है तेजस्वी यादव। महागठबंधन में सीटों को लेकर को दिक्कत नहीं है। तेजस्वी यादव ही बिहार के अगले मुख्यमंत्री होंगे। अगर उपेंद्र कुशवाहा एनडीए को शिकस्त देने के उद्देश्य से हमारे साथ आएंगे तो खुले दिल से उनका स्वागत करेंगे।

जोकिहाट ने बिगाड़ा गणित, शुरू हुआ था बयानबाजी का दौर

– जोकीहाट उपचुनाव में जदयू प्रत्याशी की हार के बाद से एनडीए में खटपट जारी है। उपचुनाव में हार के बाद उपेंद्र कुशवाहा ने जहां जल्द से जल्द सीटों के बंटवारे की बात कहकर बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा दी थी। वहीं, चिराग पासवान ने जीते हुई सीटों के साथ कोई समझौता नहीं करने की बात की थी।

– वहीं, जदयू ने एनडीए-1 के पुराने फॉर्मूले के तहत 25 सीटी की मांग की है। यही नहीं, जदयू सांसद पवन वर्मा ने कहा था कि बिहार में नेता सिर्फ नीतीश कुमार ही हैं। वह इसी वजह से अभी भी सीएम हैं। बिहार में नीतीश ही सबकी प्राथमिकता हैं। राज्य में हम बड़े भाई की भूमिका में हैं।

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मामला कहां फंस सकता है?

– जदयू को छोड़कर पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा, लोजपा और रालोसपा ने अच्छा प्रदर्शन किया था। बीजेपी 29 सीटों पर चुनाव लड़ी थी, जिसमें से 22 पर जीत मिली थी। लोजपा 7 पर लड़ी और 6 पर जीती। रालोसपा ने चार सीटों पर चुनाव लड़ा और 3 पर विजय हासिल की थी।

– इस हिसाब से 2014 में एनडीए के खाते में 32 सीटें आईं थी। जेडीयू ने अकेले चुनाव लड़ा और 40 में से 2 पर जीत मिली थीं। इस बार जीतनराम मांझी की पार्टी ‘हम’ एनडीए से कुछ वक्त पहले अलग हो गई।

– 2019 में 40 सीटों का सीट शेयरिंग का मामला फंसता नजर आ रहा है। अगर लोजपा और रालोसपा ने अपना दावा बरकरार रखा तो 11 सीटें इनके खाते में चली जाएंगी। ऐसे में 29 सीटें बचती हैं। भाजपा और जदयू इन्हीं में से सीटें बांटना होगा।

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