एनडीए के दलों के भीतर भी सीट शेयरिंग को लेकर मंथन शुरू

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लोकसभा चुनाव 2019 की हलचल के बीच एनडीए के दलों के भीतर भी सीट शेयरिंग को लेकर मंथन शुरू हो गया है। एनडीए के भीतर दूसरी सबसे बड़ी पार्टी लोकजनशक्ति गत लोकसभा चुनाव की सभी सात सीटों का आज के परिप्रेक्ष्य में न केवल आकलन करने लगी है बल्कि विकल्प को लेकर अन्य ज्यादा सफलता देने वाले लोकसभा क्षेत्रों का भी अपने दल के रणनीतिकारों से आकलन कराने में जुट गयी है। मिली जानकारी के अनुसार लोजपा नेतृत्व जदयू के गठबंधन में शामिल होने के बाद से ही अपनी सातों सीटों का आकलन शुरू कर दिया था। सीट एडजस्टमेन्ट की स्थिति में अगर किसी लोकसभा सीट को छोड़ना पड़े तो उसके बदले कौन लोकसभा सीट वर्तमान एनडीए गठबंधन के साथ मिलकर जीत दिलाने वाली हो सकती है। लोजपा के राजनीतिक गलियारों की मानें तो लोजपा के रणनीतिकारों ने वर्ष 2014 में लड़ी जाने वाली लोकसभा सीटों का आज के परिप्रेक्ष्य में ग्रेडिंग कर मूल्यांकन को एक रूप देने का काम किया है। इतना ही नहीं जिन लोकसभा सीटों से जनता का रिस्पांस सही नहीं मिला है वहां या तो उम्मीदवार या फिर लोकसभा सीटों को बदलने पर सहमति भी बनाने में जुट गयी है। बहरहाल लोजपा के भीतर एनडीए के नये घटक बने जदयू की हिस्सेदारी को लेकर भी मंथन जारी है। जब से बड़े भाई की भूमिका की घोषणा जदयू के भीतर से शुरू हुई लोजपा के भीतर भी सीट एडजस्टमेंट को लेक र संशय की स्थिति बन गयी है। राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी ने तो न किसी को कम न किसी को ज्यादा देने की बात छेड़कर अपना रुख साफ कर दिया है। लोजपा के भीतर पिछले कई माह से मुंगेर, वैशाली, नालंदा व खगड़िया लोकसभा के विकल्प को लेकर मंथन जारी है। कयास लगाया जा रहा है इन सीटों पर लोजपा एडजस्टमेन्ट के दायरे में फेर-बदल कर सकती है। इन सीटों के बदले अन्य सीटों की डिमांड भी कर सकती है। लोजपा की चिंता खास कर नालंदा सीट को लेकर है। जदयू से बढ़ती दोस्ती के कारण इस सीट की दावेदारी नहीं कर सकती है। मगर इसके बदले अन्य सीट पर दावेदारी की बात र्चचा में है। लोजपा का एलान है कि गत लोकसभा चुनाव की हिस्सेदारी से कम का सवाल ही नहीं है। एनडीए के भीतर गत लोकसभा प्रदर्शन को ध्यान में रखकर मेरी हिस्सेदारी सात से भी ज्यादा होती है। हालांकि इन सब मुद्दों पर लोजपा के प्रदेश अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस कहते हैं कि एनडीए के भीतर यह कोई मुद्दा नहीं है। यह मुद्दा बनाया जा रहा है। सही बात है कि एनडीए के भीतर महागठबंधन को सिर्फ हराने की रणनीति पर र्चचा हो रही है। इसके लिए एनडीए के नामचीन नेताओं के बीच कुछ सीटों को लेकर रणनीति बनायी जा रही है। संभव है कुछ लोकसभा सीटों का बदलाव चुनावी जीत को ध्यान में रख कर किया भी जा सकता है। इस बदलाव से एनडीए के भीतर शामिल कोई भी दल हो सकता है।

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