एक अक्टूबर को सौ साल का हो जायेगा पटना विविद्यालय

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पटना:देश का सबसे पुराने विविद्यालयों में पटना विविद्यालय का सातवां स्थान है। 1 अक्टूबर को यह सौ वर्ष का हो जायेगा। इस विविद्यालय की स्थापना एक अक्टूबर 1917 को हुई थी। इस विविद्यालय ने आजादी की लड़ाई देखी है। यहां पढ़े कई विद्यार्थियों ने आजादी की लड़ाई में अपने प्राण न्योछावर कर दिये तो यहां से पढ़कर निकले कितने विद्यार्थी आज भी देश के बड़े पदों पर कार्यरत हैं। यहां से बड़े-बड़े राजनेता भी निकले जो आज देश व राज्य की संवैधानिक कुर्सी पर बैठ कर विविद्यालय के साथ-साथ राज्य व देश की गरिमा बढ़ा रहे हैं। हालांकि पिछले डेढ़ दशक से विविद्यालय की गरिमा धूमिल होनी शुरू हुई जो आज तक जारी है।

पुरानी गरिमा वापस होगी : कुलपति

पटना विविद्यालय के वर्तमान कुलपति प्रो. रासबिहारी प्रसाद सिंह पुरानी गरिमा लौटाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने इसी विविद्यालय में अध्ययन-अध्यापन किया है। कुलपति प्रो. सिंह कहते हैं, कि हमारा सपना उसी समय पूरा होगा जब विविद्यालय की पुरानी गरिमा वापस लौटेगी। तीन साल के कार्यकाल में बहुत कुछ करना है। समय बहुत कम है। विविद्यालय के सौ वर्ष पूरे हो चुके हैं। आज विविद्यालय उन लोगों को याद कर रहा है, जो यहां पढ़े और देश की सेवा की तथा विविद्यालय की गरिमा में चार चांद लगाये। यह बिहार का एकमात्र ऐसा विविद्यालय है जहां छात्र, कर्मचारी, शिक्षक एक ही कैंपस में रहते हैं। यह पूरी तरह आवासीय विविद्यालय है। विविद्यालय की पुरानी गरिमा वापस करने के लिए शताब्दी वर्ष में शामिल होने को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को आमंत्रित किया गया है।

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पुराने छात्रों से लिया जायेगा सहयोग : कुलपति प्रो. रासबिहारी प्रसाद सिंह ने कहा कि यह विविद्यालय केवल अपने दम पर पुरानी गरिमा को वापस लाने की लड़ाई नहीं लड़ सकता। इसमें आम जन, सामाजिक कार्यकर्ता- सभी का सहयोग चाहिए। यहां के पूर्ववर्ती छात्रों को शताब्दी वर्ष समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। पूर्ववर्ती छात्र सम्मेलन भी आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन के जरिये पूर्ववर्ती छात्रों से विविद्यालय हित में सहयोग की अपील की जायेगी। यहां पढ़कर निकले विद्यार्थी देश में ही नहीं पूरे विश्व में अच्छे पदों कार्यरत हैं और कई बड़े-बड़े व्यवसाय से जुड़े हैं।

1917 में लागू हुआ पटना विविद्यालय अधिनियम : 1917 ई. में पटना विविद्यालय अधिनियम लागू हुआ। अध्यापन एवं आवासीय पटना विविद्यालय के प्रथम कुलपति जेजी जेनिंग्स हुए। 1917 में इस विविद्यालय के कॉलेज में कुल छात्रों की संख्या 382 थी और 33 शिक्षक कार्यरत थे। सीनेट में मनोनीत सदस्यों की संख्या अधिक से अधिक 15 और निर्वाचित सदस्यों की संख्या अधिक से अधिक 50 थी।

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देश के नामचीन लोग हुए सीनेट सदस्य : पटना विविद्यालय के प्रथम सीनेट के सभी सदस्य कुलाधिपति द्वारा मनोनीत किये गये जिनमें डॉ. राजेंद्र प्रसाद, सच्चिदानंद सिन्हा, सर अली इमाम, न्यायमूर्ति ज्वाला प्रसाद, राय बहादुर द्वारका नाथ, राय बहादुर पुण्रेदू नारायण सिन्हा, खान बहादुर सैय्यद मोहम्मद, फखरुद्दीन, रामावतार शर्मा, राय बहादुर योगेश, चंद्र राय, आरपी खोसला, डीएन सेन, शरदचंद्र राय और योगेंद्र नाथ समाद्दार जैसे बिहार के लोकप्रिय व विद्वान प्रथम सीनेट के सदस्य थे।

1922 तक नहीं था अपना भवन : 1922 तक पटना विविद्यालय का अपना कोई स्वतंत्र भवन (कार्यालय) नहीं था। पटना हाई कोर्ट भवन के एक भाग में विविद्यालय से संबंधित कार्य किये जाते थे। ओल्ड सचिवालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में सीनेट की बैठकें होती थीं। 1922 में सरकारी आदेश से पटना विविद्यालय को बोर्ड ऑफ रेवेन्यू द्वारा खाली कराये गये कमरे प्राप्त हुए। ये कमरे मगध महिला कॉलेज में स्थित हैं। आज यहां इलाहाबाद बैंक की शाखा कार्यरत है।

पौने दो लाख रुपये के दान से बना सीनेट हॉल : 1925 में मुंगेर के राजा देवकीनंदन प्रसाद सिंह ने सीनेट हाउस बनाने के लिए पौने दो लाख रुपये दान दिये। इस रकम से यह भवन तैयार हुआ और इसका नाम पटना के तत्कालीन कमिश्नर सर हेनरी व्हीलर के नाम से व्हीलर सीनेट हॉल रखा गया। आज भी इस हॉल को इसी नाम से जाना जाता है। यह अपने-आप में विशाल भवन है।

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यहां से होता था मैट्रिक परीक्षा का संचालन : देश की आजादी के बाद पटना विविद्यालय से माध्यमिक परीक्षा का संचालन, परीक्षाफल की घोषणा, प्रमाण पत्र जारी करने का काम होता था। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की स्थापना 1951 में हुई।

पीयू ने खरीदा दरभंगा हाउस : 1955 में सात लाख रुपये में दरभंगा राज से दरभंगा हाउस खरीदा गया जिसमें 1956 से कई विषयों के स्नातकोत्तर विभाग हैं। इस राजमहल का पूर्वी भाग रानी ब्लॉक और पश्चिमी भाग राजा ब्लॉक के नाम से जाना जाता है।

जेपी आंदोलन में छात्रों ने लिया बढ़-चढ़ कर हिस्सा : 1974 के जेपी आंदोलन में यहां के छात्रों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया जिसमें राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद, वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी व अन्य राजनेता शामिल हुए। आज बिहार सरकार में कार्यरत कई आईएएस अधिकारियों ने यहां से पढ़ाई की है जिसमें मुख्य सचिव अंजनी कुमार शामिल हैं।

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