उप्र में पिछड़ों पर बड़ा दांव लगाएगी भाजपा

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भाजपा आने वाले लोकसभा चुनाव में उप्र को लेकर काफी गंभीर है। वह सूबे में जातीय समीकरण दुरुस्त करने पर जोर दे रही है। बूथवार बनाई जा रही समितियों में सभी वर्ग के प्रतिनिधित्व के साथ पिछड़ों को विशेष तरजीह मिल रही है। पिछड़े नेताओं को आगे कर भाजपा संभावित महागठबंधन का प्रभाव कम करने का चक्रव्यूह तैयार कर रही है। यह संकेत साफ है कि भाजपा पिछड़ों पर बड़ा दांव लगाएगी।1भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक 11 और 12 अगस्त को मेरठ में होगी और इस बैठक में मिशन 2019 के अभियान की रूपरेखा तय होगी। इस बैठक के बाद भाजपा पिछड़ों का बड़ा सम्मेलन करेगी। फिर जातिवार पिछड़ों की बैठक होगी। प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय और प्रदेश महामंत्री सुनील बंसल लगातार संगठन की समीक्षा कर रहे हैं।

बंसल ने क्षेत्रवार बैठकों में भी बूथ समितियों से लेकर क्षेत्र स्तर तक नए नेतृत्व उभारने की पहल शुरू कर दी है। दरअसल, भाजपा 2014 और 2017 के फामरूले पर ही पिछड़ों को आगे करने जा रही है। 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछड़ों के सबसे बड़े कार्ड थे और 2017 के चुनाव से पहले उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को भाजपा ने प्रदेश अध्यक्ष बनाकर चुनावी अभियान शुरू किया। केशव मौर्य की अगुवाई में निकली परिवर्तन यात्रओं ने सपा सरकार के खिलाफ माहौल बनाया। दोनों चुनावों में भाजपा को प्रचंड बहुमत मिला। भाजपा ने केशव प्रसाद मौर्य को उप मुख्यमंत्री बनाकर पिछड़ों को तोहफा दिया। योगी सरकार में पिछड़ी जाति के कई विधायकों को कैबिनेट और स्वतंत्र प्रभार का मंत्री बनाकर तरजीह दी गई। इधर, सहकारी संस्थाओं से लेकर विभिन्न संस्थाओं में पिछड़ों को नामित किया जा रहा है।

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जिस जाति के सांसद का कटेगा टिकट, उसी जाति का होगा उम्मीदवार : भाजपा कसौटी पर खरा न उतरने वाले दो दर्जन से ज्यादा सांसदों का टिकट काटने का मन बना चुकी है। कई सांसद चिह्न्ति हैं और उनमें पिछड़ी जाति के भी हैं। सूत्रों का कहना है कि भाजपा जिस जाति के सांसद का टिकट काटेगी, उसी जाति का उम्मीदवार भी बनाएगी। उदाहरण के तौर पर अगर किसी निषाद का टिकट कटा तो उसकी जगह निषाद, बिंद या मल्लाह को ही टिकट मिलेगा। इसी तरह किसी राजभर का टिकट कटा तो राजभर समाज से ही उम्मीदवार बनेगा। दलितों और सवर्ण सांसदों के टिकट कटने में भी यही फामरूला लागू होना है।
अगले माह पिछड़ों का बड़ा सम्मेलन और फिर होंगी जातिवार बैठकें ,सरकारी संस्थाओं में भी पिछड़ों को दी जा रही तरजीह

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने विपक्षी दलों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष में रहते हुए भी जो लोग एसी कमरों से बाहर नहीं निकले, उन्हें मोदी और योगी की सरकार पर सवाल उठाने का नैतिक हक नहीं है। जबकि सत्ता में होने के बावजूद भाजपा संगठन और सरकार दोनों ही जनता के बीच जनाकांक्षाओं के अनुरूप कार्य कर रही है। डॉ. पांडेय बुधवार को पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। योगी ने कहा था कि हमसे गले मिलने के लिए राहुल गांधी दस मिनट सोचेंगे, इस संदर्भ में पूछे जाने पर डॉ. पांडेय ने कहा कि राहुल को योगी से गले मिलने की सोचने की बजाय उनका चरण छूना चाहिए। योगी संत हैं और गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर हैं। इससे राहुल का लोक-परलोक दोनों सुधर जाएगा। उन्होंने बसपा और सपा के संभावित गठबंधन पर भी प्रहार किया। कहा, मायावती जाति और धन-दौलत का दोहन करने वाली नेता हैं। वह हताशा में हैं और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने को भाजपा के बारे में अनाप-शनाप बोल रही हैं। उन्होंनेयोगी के कामकाज की सराहना करते हुए कहा कि स्वयं अपने सवा साल के कार्यकाल में योगी सभी जिलों का दौरा कर जमीनी हकीकत परख चुके हैं।

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