उन्नाव गैंगरेप: यूपी के डीजीपी बोले- CBI तय करेगी BJP विधायक गिरफ्तार होंगे या नहीं

0
193

उन्नाव गैंगरेप केस में आरोपी बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की गिरफ्तारी फिलहाल टलती दिख रही है. यूपी के डीजीपी ओपी सिंह और प्रधान गृह सचिव अरविंद कुमार ने गुरुवार को प्रेस कांफ्रेंस में स्पष्ट तौर से कहा, ‘आरोप के आधार पर बीजेपी विधायक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है. अब यह मामला सीबीआई को सौंप दी गई है. ऐसे में सीबीआई तय करेगी की कुलदीप सिंह सेंगर को गिरफ्तार किया जाए या नहीं.’ उन्होंने साफ तौर से कहा कि मामले की पहले जांच कराई जाएगी. साक्ष्य मिलने के बाद ही सीबीआई तय करेगी की गिरफ्तारी हो या नहीं.

इससे पहले उन्होंने कहा कि पीड़िता के पिता के साथ 3 अप्रैल 2018 को मारपीट की गई, जिसके बाद जेल में उनकी मौत हो गई. इस मामले की दो स्तरों पर जांच कराई गई. डीआईजी (जेल) की जांच रिपोर्ट में पता चला है कि पीड़िता के पिता को जेल ले जाने से पहले उनका ठीक से मेडिकल चेकअप नहीं कराया गया था, जिसकी वजह से ये नहीं पता चल पाया था कि शरीर में अंदरुनी चोट थी या नहीं. जेल के अंदर तबियत बिगड़ने पर जेल प्रशासन ने उन्हें जिला अस्पताल में भेजने को कहा था, लेकिन उनका इलाज जेल के अंदर बने अस्पताल में ही किया गया. इस मामले में लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई हो चुकी है.

यह भी पढ़े  कई गलतियों की वजह से BHU प्रशासन की हुई फजीहत

राज्य सरकार के दोनों आला अफसरों ने स्पष्ट किया कि शासन किसी भी तरह से आरेापी विधायक को बचाने की कोशिश नहीं कर रही है.

CMS और EMO सस्पेंड
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने उन्नाव के CMS डॉ. डीके द्विवेदी और इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर (EMO) प्रशांत उपाध्याय को सस्पेंड कर दिया है. पीड़िता के पिता के इलाज में लापरवाही बरतने के आरोप में डॉ. मनोज कुमार, डॉ. जीपी सचान और डॉ. गौरव अग्रवाल के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी. वहीं सफीपुर के सीओ को भी सस्पेंड करने का फैसला किया गया है.

इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला
प्रदेश के डीजीपी ओपी सिंह ने बताया कि विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ आईपीसी धारा 363, 366, 376, 506 और पॉस्को एक्ट तहत मामला दर्ज हुआ है. जानकारी के मुताबिक एफआईआर में शशि सिंह का नाम भी शामिल है.

पीड़िता के परिवार को सुरक्षा
दोनों आला अफसरों ने कहा कि पीड़िता के परिवार को सुरक्षा मुहैया कराई गई है. पीड़िता का परिवार बार-बार अपनी जान को खतरे की बात करता रहा था, जिसके बाद यह फैसला लिया गया है. प्रशासन ने एसआईटी के साथ जेल डीआईजी और उन्नाव जिला प्रशासन से मामले में रिपोर्ट तलब की थी. एक साथ तीन रिपोर्ट मिलने के बाद गृह विभाग ने ये बड़ा फैसला लिया है. उन्होंने यह भी बताया कि एसआईटी की टीम ने उन्नाव का दौरा किया था. इस दौरान पीड़िता पक्ष के साथ आरोपी विधायक के लोगों से भी पूछताछ की गई थी.

यह भी पढ़े  बुलंदशहर: हिंसा मामले में 4 गिरफ्तार 27 लोग नामजद, मास्‍टर माइंड योगेश राज की तलाश में पुलिस

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here