उच्च शिक्षा में सुधार के प्रयास तेज होंगे :राज्यपाल

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राज्यपाल लालजी टंडन का पूरा फोकस बिहार के मौजूदा उच्च शिक्षा सुधार पर है। उनका मानना है कि मुख्यतया राजभवन के दो दायित्व हैं। एक संविधान से संबंधित दायित्व है तो दूसरा उच्च शिक्षा से जुड़ा दायित्व। पहली बार कुछ विविद्यालयों/कॉलेजों के उच्च पदाधिकारियों ने अपने दायित्व का पालन नहीं किया और उन्हें हटना पड़ा। राज्यपाल का स्पष्ट मानना है कि प्रदेश में अब उच्च शिक्षण संस्थानों में अनुशासन दिखने लगा है।राज्यपाल लालजी टंडन ने बुधवार को प्रिंट मीडिया के वरिष्ठ प्रतिनिधियों से विचार विमर्श में उच्च शिक्षा के सुधार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई। उन्होंने कहा कि राज्य में विश्वविद्यालीय शिक्षा के विकास प्रयासों को और अधिक तेज किया जाएगा। पिछले वर्ष उच्च शिक्षा में कुछ मूलभूत सुधार किए गए हैं। साथ ही विश्वविद्यालीय शिक्षा के विकास- प्रयासों को और अधिक तेज किया जाएगा। मीडिया के साथ मुखातिब होने से पहले राज्यपाल के प्रधान सचिव विवेक कुमार सिंह तथा उच्च शिक्षा में सुधार के लिए यहां नियुक्त परामर्शी प्रो.आरसी सोबती ने विजन-2025 की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की, जिसके जरिये उच्च शिक्षा में मूलभूत सुधार किया जाना है। 28 फरवरी तक सभी विविद्यालयों से उच्च शिक्षा में सुधार से संबंधित विजन 2025 पर प्रतिवेदन राजभवन में प्रस्तुत करने के लिए निर्देश जारी किया गया है। राज्यपाल श्री टंडन ने आज कहा कि राजभवन ऐसा प्रतीकात्मक स्थान है जिसे संविधान का मंदिर कहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि थोड़े समय में ही उच्च शिक्षा क्षेत्र में जो पहल हुई है वह संतोषप्रद है। उन्होंने कहा कि बिहार आने के बाद देखा कि यहां शैक्षिक कैलेंडर ही लागू नहीं है। छात्रों के उत्तीर्ण करने के बाद डिग्री कब मिलेगी यह निश्चित नहीं था। मेधावी छात्रों के साथ अन्याय हो रहा था। उन्होंने कहा कि लगभग सभी विविद्यालयों में अब शैक्षिक कैलेंडर लागू हो गया है। शायद पहली बार दीक्षांत समारोह भी संपन्न हुआ है। अगले महीने शत-प्रतिशत दीक्षांत (कनवोकेशन) हो जाने की उम्मीद है। उन्होंने साफ कहा कि देश में जो बदलाव की बयार हो रही है, जो स्लोगन दिए गए हैं वे साकार दिख रहे हैं। यहां नारी सशक्तीकरण मिसाल है। दीक्षांत समारोह में 20 गोल्ड मेडल प्राप्त करने वालों में 10-15 से अधिक कन्याएं हैं। देश जिस रास्ते पर चलना चाहता है वह सब यहां मौजूद है। केवल गति देने की जरूरत है।उल्लेखनीय है कि राजभवन में राज्यपाल के प्रधान सचिव विवेक कुमार सिंह तथा उच्च शिक्षा में सुधार के लिए नियुक्त परामर्शी आरसी सोबती ने जहां उच्च शिक्षा में सुधार के लिए अपनी विस्तृत योजना को सामने रखा वहीं उच्च शिक्षा में सुधार के लिए मीडिया पक्ष/राय से भी अवगत हुआ। दोनों तरफ से सकारात्मक विचार विमर्श हुआ। राज्यपाल के प्रधान सचिव विवेक कुमार सिंह मीडिया के कुछ सुझावों से सहमत भी हुए। ‘‘राष्ट्रीय सहारा’ द्वारा यह सवाल किए जाने पर कि किसी भी प्रदेश की पहचान के लिए शिक्षण संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। एक जमाने में नालंदा विविद्यालय ने बिहार की जो पहचान बनायी वो आज तक प्रासंगिक है। लेकिन मौजूदा हालात में यदि आईआईटी व एनआईटी की बात छोड़ दें तो यहां के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज की कोई पहचान देश में नहीं बन पायी है। इस सवाल के जवाब में राज्यपाल के प्रधान सचिव विवेक कुमार सिंह ने कहा कि गुणवत्ता सुधारी जाएगी। उन्होंने कहा कि क्वालिटी ऑफ एजुकेशन पर गौर किया जाएगा। श्री सिंह ने यह भी कहा कि शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की कमी को भी धीरे-धीरे पूरा कर लिया जाएगा।

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