उच्चतम न्यायालय ने दिया ऐतिहासिक फैसला,रणजी ट्रॉफी चैम्पियनशिप में खेलेगी बिहार की टीम

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उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को बिहार के क्रि केटरों को उम्मीद की नयी किरण देते हुए बिहार क्रि केट एसोसिएशन (बीसीए) को इस साल होने वाली रणजी ट्रॉफी और अन्य क्रि केट प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने की स्वीकृति दे दी। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा और न्यायाधीश एएम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूढ़ वाली पीठ ने इस बात का संज्ञान लिया कि बिहार को पिछले कई वर्षो से रणजी ट्राफी जैसे टूर्नामेंट में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं दी गयी। पीठ ने स्पष्ट किया कि वह किसी भी बहस या याचिका पर विचार-विमर्श के बिना ही खुद यह आदेश दे रही है। पीठ ने कहा, बिहार को क्रि केट खेलनी चाहिए। यह आदेश क्रि केट एसोसिएशन आफ बिहार (सीएबी) के सचिव आदित्य वर्मा की अंतरिम याचिका के बाद आया है, जिन्होंने सुनवाई की मांग की थी और जिसमें उन्होंने कहा था कि देश की तीसरी सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले प्रदेश से अनुचित बर्ताव किया जा रहा है और उसे रणजी ट्रॉफी व अन्य क्षेत्रीय व राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेने का मौका नहीं दिया जा रहा है। पीठ ने कहा,‘‘अंतरिम कदम के तहत बिहार क्रि केट एसोसिएशन (बीसीए) को रणजी ट्रॉफी और इस तरह की अन्य प्रतिस्पर्धाओं में भाग लेने के लिए योग्य माना जाना चाहिए और इस अदालत के आदेश के बाद चुनी गयी बीसीए को इसका प्रभारी होना चाहिए।राज्य बंटवारे के बाद बिहार को नुकसानवर्ष 2000 के नवम्बर में बिहार से अलग होकर झारखंड राज्य बनने के बाद ही बिहार क्रि केट पर संकट के बादल छाने लगे थे। राज्य की क्रि केट को बिहार क्रि केट संघ (बीसीए) देखता था, जिसकी स्थापना 1936 में हुई थी, लेकिन बंटवारे के बाद बीसीए के साथ छेड़छाड़ होने लगी और बोर्ड में भी राजनीति शुरू हो गयी। आखिरकार बोर्ड के चुनाव में वोट को लेकर जो राजनीति हुई, उसके नतीजे में बिहार की मान्यता खत्म कर झारखंड राज्य क्रि केट एसोसिएशन (जेएससीए) को रणजी खेलने का अधिकार दे दिया गया। किसी तरह तीन सत्र बिहार के नाम से बोर्ड की प्रतियोगिता में राज्य की टीम खेली, लेकिन सत्र 2004-05 से बिहार को वंचित कर झारखंड को सभी प्रतियोगिताओं में खेलने का अधिकार मिल गया। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी मामला चला, लेकिन तस्वीर नहीं बदली। इस दौरान बिहार की प्रतिभा दब गयी।

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बिहार की मान्यता खत्म होने से पहले 2003-04 के सत्र में बिहार ने रणजी ट्रॉफी के पांच मैच प्लेट डिवीजन के ग्रुप ए में खेले। बिहार को तब पहले दो मैचों में हार और अंतिम दो मैचों में ड्रॉ का सामना करना पड़ा था। लेकिन बिहार ने अपने तीसरे मैच में विदर्भ की टीम को नागपुर में सात विकेट से हराया था। इस मैच में राजीव कुमार राजा ने शतक (124) और महेन्द्र सिंह धोनी ने अर्धशतक (68) बनाया था। बिहार ने जब रणजी ट्रॉफी का आखिरी सत्र 2003-04 में खेला था तब टीम के कप्तान सुमित पंडा थे। उन्होंने पहले चार मैचों में कप्तानी की। जबकि पांचवें मैच में राजीव कुमार राजा ने कप्तानी की थी। राजीव ने इस मैच में भी नाबाद 155 रन बनाये थे। हालांकि तब बिहार टीम में महेन्द्र सिंह धोनी शामिल थे, लेकिन उन्होंने कभी भी बिहार टीम की कप्तानी नहीं की।
इनका कहना है 
रविशंकर प्रसाद सिंह-बिहार क्रि केट संघ के वर्तमान सचिव ने कोर्ट के निर्देश पर खुशी का इजहार करते हुए कहा है कि हमारी टीम अब दोगुने उत्साह से राज्य के क्रि केटरों के लिए काम करेगी।अजय नारायण शर्मा-बिहार क्रि केटएसोसिएशन के पूर्व सचिव अजय नारायण शर्मा ने माना कि एक न एक दिन बिहार के पक्ष में फैसला आना ही था। उन्होंने कहा कि झूठ हमेशा कामयाब नहीं हो सकता।आदित्य वर्मा-क्रि केट एसोसिएशन ऑफ बिहार (सीएबी) के सचिव आदित्य वर्मा ने कहा कि बिहार को रणजी ट्रॉफी में खेलने देने की लड़ाई वह काफी समय से लड़ रहे थे। कोर्ट के फैसले से लड़ाई में उनकी जीत हुई है।अरुण कुमार सिंह-पटना जिला क्रि केट संघ के सहायक सचिव अरुण कुमार सिंह ने कहा कि यह बिहार के क्रि केटरों की जीत है। अब हमारे खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकेंगे।रामचन्द्र प्रसाद-बिहार और पटना क्रि केट से लंबे समय से जुड़े रहे रामचन्द्र प्रसाद का मानना है कि राज्य के खिलाड़ियों का काफी साल बर्बाद हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद हमारे क्रि केटर भी देश के अन्य क्रि केटरों के साथ कड़ा मुकाबला करेंगे।अधिकारी एमएम प्रसाद-पूर्वी क्षेत्र के पूर्व प्रशिक्षक ने कोर्ट के निर्देश पर खुशी का इजहार किया है। उन्होंने कहा कि मैं देखता हूं कि खिलाड़ियों को खेलने का मौका नहीं मिलता है तो वे कितने दुखी होते हैं। ऐसे में अब हम खेलते हुए अपने क्रि केटरों को देख सकेंगे।सौरव चक्रवर्ती-बिहार विजय मर्चेट टीम के वर्तमान मैनेजर सौरव चक्रवर्ती ने हमारे खिलाड़ियों में प्रतिभा की कमी नहीं है। खेलने का मौका दिये जाने से बिहार के क्रि केटर पूरे देश को बता सकेंगे कि उनमें भी दम है।अब्दुल बारी सिद्दीकी-बिहार क्रि केट संघ के अध्यक्ष रहे अब्दुल बारी सिद्दीकी ने कहा है कि उन्होंने सभी गुट से बिहार के क्रि केट खिलाड़ियों और युवा प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए एकजुट होकर कार्य करने की अपील की है। 

 सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देश के बाद बिहार क्रि केट एसोसिएशन का भारतीय क्रि केट इतिहास में तीसरी बार जन्म हुआ है। बिहार को 1936 में पहली बार बीसीसीआई की मान्यता मिली थी। इसके बाद इसकी मान्यता खत्म होने के बाद बिहार को बोर्ड ने 27 सितम्बर 2008 को एसोसिएट के रूप में मान्यता दी। अब जाकर सुप्रीम कोर्ट ने 4 जनवरी 2018 को बिहार को फिर से पूर्ण मान्यता देने के निर्देश दिया है। वैसे बिहार क्रि केट एसोसिएशन (बीसीए) का इतिहास काफी पुराना है। 1936 में इसका गठन जमशेदपुर में किया गया था। तब एएम हेमन इसके अध्यक्ष, केएडी नौरोजी व एसएम मोइनुल हक उपाध्यक्ष, एन कुरैशी सचिव और नागरवाला कोषाध्यक्ष बने थे। इन सभी के प्रयास से बीसीए के गठन के बाद बिहार ने 1936-37 में रणजी ट्रॉफी का अपना पहला सत्र खेला। तब बिहार का क्रि केट ज्यादातर जमशेदपुर में होता था और एक वार्षिक मैच कलकत्ता पारसी तथा जमशेदपुर पारसी टीम के बीच खेला जाता था।

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