ईट भट्ठा मालिक ई-चालान के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटायेंगे

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राज्य के ईट भट्ठा मालिक ई-चालान के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटायेंगे। यह जानकारी बिहार ईट निर्माता संघ के प्रधान महासचिव राजेन्द्र प्रसाद और कोषाध्यक्ष अशोक कुमार सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि खान एवं भूतत्व विभाग को पकी हुई ईट एवं उसके व्यवसाय पर कर लगाने का अधिकार नहीं है। यह सेल्स टैक्स के अधीन आता है। संघ के अधिकारियों ने इस बाबत एक ज्ञापन राज्य के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी को भी दिया और हस्तेक्षप करने की मांग की है। मालूम है कि सरकार ने 15 जनवरी से ई चालान को अनिवार्य कर दिया है। संघ के नेताओं का कहना है कि उन लोगों का व्यवसाय मौसमी लघु उद्योग के अन्तर्गत आता है। ईट भट्टों पर खनन एवं बिक्री कर पूर्व से ही अपने प्रदेश में समाहितकरण नीति के तहत निर्धारित रहा है। इन नेताओं ने कहा कि ईट उद्योग एक लघु सीजनल कुटीर उद्योग है जिस पर पूर्व से ही अनेक प्रकार की सरकारी नीतियां लागू हैं। जिसमें पर्यावरण, अनापत्ति प्रमाण पत्र, सहमति पत्र, स्वच्छता प्रमाण पत्र आदि शामिल है। इस प्रकार पुन: अगर ई चालान आदि की प्रक्रिया अपनाने हेतु बाध्य किया जाता है तो इस व्यवसाय से जुड़े लोगों के समक्ष अनेक समस्याएं उत्पन्न होंगी। जिसका प्रभाव आम लोगों पर पड़ेगा। संघ का मानना है कि यह व्यवसाय मध्यम वर्ग के लोगों द्वारा संचालित व्यवसाय है। जिसमें सबसे अधिक लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। अगर किसी प्रकार की कठिनाई हुई तो हर वर्ग प्रभावित होगा। संघ के नेताओं का मानना है कि खान एवं भूतत्व विभाग राज्य में इंस्पेक्टर राज को बढ़ावा देना चाहता है। नेताओं ने कहा कि ई चालान से ईट भट्टा मालिकों को ईट का दाम बढ़ाना पड़ेगा। जिससे आम उपभोक्ता प्रभावित होंगे। मकान बनाना महंगा हो जायेगा।

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