इस बार होगी पूर्ण नवरात्रि इस बार नवरात्रि के साथ हैं कई महासंयोग

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पटना :शारदीय नवरात्र इस बार 21 सितंबर, बृहस्पतिवार से शुरू हो रहा है। पूरे नौ दिन मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-आराधना होगी। इस बार नवरात्रि पूरे नौ दिन की होगी। कई बार नौ दिन की नवरात्रि की तिथि घट जाती थी। यानी एक ही दिन दो तिथि का पड़ना, ऐसे में एक ही दिन दो देवियों की पूजा हो रही थी। इस बार नवरात्रि अपने साथ कई महासंयोग ला रही है। पर्व गुरुवार से शुरू हो रहा है और माना जाता है कि इस दिन नवरात्रि शुरू होने के कारण मां जगदम्बा पालकी में बैठकर आएंगी। इस मुहूर्त में करें कलश स्थापना 21 सितंबर से इस बार नवरात्रि पर्व की शुरुआत होने जा रही है। आश्विन माह में पड़ने वाली इस नवरात्रि को शारदीय नवरात्रि कहा जाता है। इस बार नवरात्रि का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 3 मिनट से 8 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। नवरात्रि के दौरान माता के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना की जाती है। इसके बाद लगातार नौ दिनों तक माता की भक्ति में पूजा और उपवास आदि किया जाता है और अष्टमी और नवमी में कन्या पूजा की जाती है।वैसे तो एक साल में कुल मिलाकर चार नवरात्रियां आती हैं (इनमें दो गुप्त नवरात्रि होती हैं) जो चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ महीने में पड़ती हैं। 21 सितंबर को सुबह मां के शैलपुत्री रूप की पूजा होगी। नवरात्रि के पहले दिन कलश की स्थापना की जाती है। साथ ही कलश में स्वास्तिक का चिह्न बनाया जाता है जो कि काफी शुभ माना जाता है। इसके अलावा कलश में मौली बांध कर उसमें अक्षत डालकर जल से उसको भर देते हैं। जानिये किस दिन बन रहा है कौन-सा संयोगगुरुवार से नवरात्रि शुरू हो रही है और इस दिन हस्त नक्षत्र में घट स्थापना के साथ शक्ति उपासना का पर्व काल शुरू होगा। 21 सितंबर प्रतिपदा को घटस्थापना होगी और इस दिन हस्तनक्षत्र योग बन रहा है। 22 सितंबर द्वितीया को रवियोग, 23 सितंबर तृतीया को रवियोग और सर्वार्थसिद्धि योग बन रहा है। 24 सितंबर चतुर्थी को रवियोग, 25 सितंबर को रवियोग व सर्वार्थसिद्धि और 26 व 27 सितंबर को रवियोग बन रहा है। 28 सितंबर दुर्गाष्टमी को महानिषा पूजा है। वहीं 29 सितंबर महानवमी को रवियोग बन रहा है। नवरात्रि के अगले दिन यानी विजयादशमी को रवियोग और सर्वार्थसिद्धि योग बन रहा है।
उ21 सितंबर को पहला दिन- शैलपुत्री को आंवले का तेल चढ़ाएंउ22 सितंबर को दूसरा दिन- ब्रrाचारिणी को फीता बांधेंउ23 सितंबर को तीसरा दिन-चंद्रघंटा को सिंदूर चढ़ाएंउ24 सितंबर को चौथा दिन- कूष्मांडा को दर्पण अर्पित करेंउ25 सितंबर को पांचवां दिन- स्कंदमाता को पाउडर चढ़ाएंउ26 सितंबर को छठा दिन- कात्यायनी को गुड़हल का पुष्प चढ़ाएंउ27 सितंबर को सातवां दिन- कालरात्रि को काजल चढ़ाएंउ28 सितंबर को आठवां दिन- महागौरी का व्रत करेंउ29 सितंबर को नौवां दिन- सिद्धिदात्री का हवन करें और नारियल चढ़ाएं

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