इंसेफलाइटिस का कहर जारी ,अब तक 48 बच्चों की मौत, आज मुजफ्फरपुर पहुंचेगी जांच टीम

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बिहार में एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रॉम यानि AES का कहर लगातार जारी है और इस बीमारी से होने वाली मौत का आंकड़ा भी लगातार बढ़ रहा है. पिछले 24 घंटे में 10 और बच्चों ने दम तोड़ दिया है तो वहीं 23 नए बच्चों को भर्ती कराया गया है. मरने वाले दस बच्चों में से सात की मौत एसकेएमसीएच में जबकि तीन की मौत केजरीवाल अस्पताल में हुई है. इस बीच नये बीमार बच्चों को इन दोनो अस्पतालों में भर्ती कराया गया है. तत्काल 60 बच्चे दोनों अस्पतालों में भर्ती हैं. एसकेएमसीएच के शिशु रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ गोपाल शंकर सहनी नें बताया कि बीमार बच्चों की संख्या में बढोतरी की वजह से दो नये पीआईसीयू खोले गये हैं. वैसे कई बच्चे ठीक होकर घर भी लौट रहे हैं.

मुजफ्फरपुर में अब तक 34 बच्चे मरे : निदेशक प्रमुख
निदेशक प्रमुख डॉ आरडी रंजन, राज्य वैक्टर बॉर्न डिजीज कंट्रोल अधिकारी डॉ एमपी शर्मा व राज्य जेई एईएस के नोडल समन्वयक संजय कुमार एसकेएमसीएच में पहुंचे और का जायजा लिया. निदेशक प्रमुख ने बताया कि अब तक 109 बच्चे चमकी तेज बुखार से पीड़ित हुए हैं. यह आंकड़ा जनवरी से 10 जून तक है. अब तक मरने वालों की संख्या 34 है.

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इसके बाद भी पीड़ित व मरने वाले संख्या का सही आकलन किया गया है. जेइ के चार पीड़ित मरीज मिले है. किसी इंसेफेलाइटिस से बच्चों की मौत नहीं हुई. जो भी बच्चे मरे है उनमें हाइपोग्लेसिमिया, सोडियम पोटाशियम की कमी थी. तेज धूप के साथ आर्द्रता इसमें बहुत बड़ा कारण है.

मौत का आंकड़ा

बच्चों की मौत का आंकड़ा अब 48 तक जा पहुंचा है वहीं 60 बच्चों को इलाज के लिए भर्ती कराया गया है. मरने वाले दस बच्चों में से सात की मौत एसकेएमसीएच में जबकि तीन की मौत केजरीवाल अस्पताल में हुई है. अस्पताल से अब तक 22 बच्चों को इलाज के बाद छुट्टी दी जा चुकी है. इससे पहले रविवार की रात से सोमवार देर रात तक 20 बच्चों की मौत हो गई थी.

आज आएगी टीम
बच्चों की लगातार हो रही मौत के बीच आज केंद्र से एक जांच टीम मुजफ्फरपुर पहुंचेगी. केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग की सात सदस्यीय टीम पटना पहुंच चुकी है.

कम पड़ रहे ICU
शहर के दो अस्पतालों में अब तक 48 बच्चों की मौत हो चुकी है. बच्चों की बीमारी को देखते हुए चार ICU चालू किए गए हैं, फिर भी बेड कम पड़ रहे हैं. एक बेड पर दो-दो बच्चों का इलाज किया जा रहा है. इस बीच SKMCH से अच्छी खबर भी आ रही है और इलाज के लिए भर्ती कुछ बीमार बच्चे ठीक हो रहे हैं. 6 बच्चों को इलाज के बाद PICU से सामान्य वार्ड में शिफ्ट किया गया है.

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एक्शन में सरकार
इससे पहले सूबे के सीएम नीतीश कुमार ने सोमवार को इस मामले में विभाग के प्रधान सचिव को ध्यान देने की नसीहत दी. सीएम ने कहा था कि बच्चों की मौत पर सरकार चिंतित है और इससे कैसे निपटा जाए इस पर काम चल रहा है. सीएम ने मुख्य सचिव को AES पर खुद नजर रखने का निर्देश दिया. जबकि इस बीमारी को लेकर उन्‍होंने जागरुकता फैलाने की जरुरत बताई है.

स्वास्थ्य मंत्री की सफाई
स्वास्थ्य मंत्री ने इन मौतों का कारण कुछ और बताया था. मंगल पाण्डेय ने सोमवार को कहा था कि अभी तक 11 बच्चों के मौत की पुष्टि हुई है लेकिन इसमें एईएस यानि इनसेफेलाइटिस से अभी तक किसी बच्चे की मौत नहीं हुई है. उन्‍होंने कहा कि हाईपोगलेसिमिया से 10 बच्चों की मौत हुई है जबकि एक बच्चे की मौत जापानी इनसेफेलाइटिस से हुई है. जबकि बच्चों की मौत को लेकर विभाग गम्भीर है. बिहार में AES यानि (एक्यूट इन्सेफेलाइटिस) से 12 जिले और 222 प्रखंड प्रभावित हैं.

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आपको बता दें कि पिछले दिनों विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार अधपकी लीची को भी इसका कारण माना गया है. दरअसल लीची में पाया जाने वाला एक विशेष प्रकार का तत्व इस बुखार का कारण हो सकता है. हर साल कई बच्चे इंसेफलाइटिस की भेंच चढ़ जाते हैं.

भारतीय राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र और सीडीसी ने 2013 और 2014 में इस पर शोध किया. रिपोर्ट के अनुसार, “2013 के परीक्षणों में एक विशेष लक्षण पाया गया जो किसी टॉक्सिन की वजह से हो सकता है.” 2014 के परीक्षण के दौरान भी बुखार के पीछे किसी संक्रमण का प्रमाण नहीं मिला. इससे भी किसी टॉक्सिन के संपर्क में आने की संभावना को बल मिला. यही नहीं, बुखार फैलने का दौर प्रायः मुजफ्फरपुर में लीची के उत्पादन के मौसम में आता है.

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