आठवें थिएटर ओलम्पिक्स के नाटक पटना में भी

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ART AND CULTURE MINISTER KRISHNA KUMAR RISHI KA PRESS CONFRENCE

देश में हो रहे 8वें थिएटर ओलम्पिक्स का को-होस्ट पटना भी बन चुका है। आगामी 3 से 16 मार्च 2018 के बीच 14 दिनों तक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के नाटकों की प्रस्तुति दी जाएगी। दुनिया का यह सबसे बडा थिएटर फेस्टिवल भारत में पहली बार आयोजित हो रहा है। थिएटर ओलम्पिक्स 2018 का आयोजन नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के तत्वावधान में भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से बिहार सरकार के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के साथ मिलकर किया गया है। इस बात कि जानकारी सोमवार को पत्रकार वात्र्ता में कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री कृष्ण कुमार ऋ षि ने दी। मंत्री ने बताया कि प्रेमचंद रंगशाला में 14 दिनों की प्रस्तुतियों के तहत पटना में दुनिया के विभिन्न हिस्सों से सम्बंधित 14 नाटकों का मंचन होगा। जिनमें से कुछ अपने कंटेंट, स्टाइल और एस्थेटिक्स के लिए मशहूर हैं। यह शहर नाटक के शक्तिशाली प्रभाव से अनभिज्ञ नहीं है, बल्कि वर्षो से नये कलाकारों के पालन और उद्भव का केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि यह पहला मौका है जब बिहार के किसी शहर में इतने बडे थियेटर फेस्टिवल का आयोजन किया जा रहा है। विभाग के प्रधान सचिव चैतन्य प्रसाद ने कहा कि हमें खुशी है कि एनएसडी ने सबसे बड़े थियेटर त्योहार को बनाए रखने के लिए शहरों में से एक बिहार के पटना को चुना है। कार्यक्रम के संयोजक व वरिष्ठ रंग निर्देशक संजय उपाध्याय ने बताया कि पहले यह कार्यक्रम दो मार्च से आयोजित था। लेकिन होली के कारण इसका आगाज तीन मार्च से होगा। इस दौरान कुल चार अंतरराष्ट्रीय नाटकों का मंचन होगा। जिसमें एक इटली और तीन बंगलादेश का होगा। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, पंजाब, मध्य प्रदेश, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर से कुल 14 नाटय़ संस्थाएं अपने रंगशिल्प को मंच पर जीवंत करेंगी। मंच नाटकों के अलावा बिहार की विभिन्न नाटय़ संस्थाओं की ओर से नुक्कड़ नाटकों और सांस्कृतिक मंडलियों के तत्वावधान में लोकगीत व लोकनृत्य की प्रस्तुति दी जाएगी। साथ ही देश के शीर्षस्थ रंगकर्मियों और संस्कृतिकर्मियों के संवाद सत्र का आयोजन भी इस महोत्सव का हिस्सा होगा। जो भारतीय नृत्य कला मंदिर में होगा। कुल मिलाकर दो सप्ताह की ये अवधि रंगकर्म को समर्पित होगी और भारतीय रंगमंच के लिए ये पल अविस्मरणीय रहेंगे। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में प्रवेश पास के आधार पर होगा। प्रवेश पास नि:शुल्क प्रेमचंद रंगशाला, ललित कला अकादमी और विभाग के कार्यालय से प्राप्त किया जा सकता है। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के एक्टिंग चेयरमैन डॉ. अजरुन देव चरण ने कहा कि कला, संचार का सबसे पुराना माध्यम है। एक कलाकार के लिए इससे बडी प्रसन्नता का अवसर कोई नहीं होती है कि वह कला को प्रोत्साहित करने वाले दर्शकों के समक्ष अपनी प्रस्तुति दे। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि यह ऑडिएंस दुनिया के किस हिस्से से संबंध रखता है। उन्होंने कहा कि भारत में दुनिया के इस सबसे बड़े फेस्टिवल को लेकर आने में हमें बेहद गर्व है। 51 दिनों तक देशभर में चलने वाले इस राष्ट्रीय महोत्सव के दौरान, हम दुनिया भर के देशों के बीच की सीमाओं को खत्म कर एक नियंतण्र गांव में तब्दील करने का प्रयास कर रहे हैं। यह नियंतण्र थिएटर फेस्टिवल अपनी यात्रा के तहत देश भर के 17 शहरों से गुजरेगा, इस पूरे महोत्सव में 30 देशों के 25,000 से भी अधिक कलाकार, 450 प्रस्तुतियां देंगे, 600 एम्बिएंस परफॉरमेंस होंगे और 250 से भी अधिक यूथ फोरम शोज होंगे। फेस्टिवल का समापन 8 अप्रैल 2018 को मुम्बई में होगा। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के डायरेक्टर प्रोफेसर वामन केंद्रे ने कहा कि थिएटर ओलम्पिक्स को भारत में लाने के लिए हम पिछ्ले तीन साल से स्वपन देख रहे थे। हमने जो सपना देखा था वह अंतत: पूरा हो गया। इस सपना को पूरा करने में मिनिस्ट्री ऑफ कल्चर और डॉ़ महेश शर्मा की भूमिका बेहद अहम रही है। हमने सदियों से शेक्सपीयर और बटरेल्ट ब्रेच जैसे नाटककारों को भारतीय थिएटर का हिस्सा बनते देखा है। मगर तमाम महान नाटककारों के होते हुए भारतीय रचनाएं दुनिया के पटल पर अपना वह स्थान नहीं बना सकी हैं। हम आज भी इस तरह का प्रभाव छोड़ने के लिए प्रयासरत ही हैं। भारतीय थिएटर को दुनिया के पटल पर स्थापित कर पाने की दिशा में यह एक बड़ी खामी है। हमे अपनी 2500 साल पुरानीथिएटर परम्परा पर गर्व है। इस मौके पर विभाग के अपर सचिव आनंद कुमार, नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के डीन शांतैनु बोस, विभाग के तारानंद महतो वियोगी, संजय कुमार समेत अन्य अधिकारी मौजूद थें। थिएटर ओलम्पिक्स के बारे में :थिएटर ओलम्पिक्स की स्थापना 1993 में डेल्फी, ग्रीस में हुई थी। एक अंतरराष्ट्रीय थिएटर फेस्टिवल, द थिएटर ओलम्पिक्स दुनिया भर के महानतम थिएटर प्रैक्टिशनर्स को एक मंच पर लेकर आता है। यह एक ऐसा मंच है जो दुनिया भर के छात्रों और मास्टर्स के बीच अनुभवों के आदान-प्रदान का जरिया है, जहां भाषा, विचार और संस्ति की भिन्नता कोई मायने नहीं रखती है। अब तक थिएटर ओलम्पिक्स का आयोजन 7 देशों में हो चुका है। जापान (1999), रशिया (2001), टर्की (2006), साउथ कोरिया (2010), चाइना (2014), पोलैंड (2016) में। अगले साल यह फेस्टीवल जपान में आयोजित होगा। मौजूदा एडिशन की थीम है फ्लैग ऑफ फ्रेंडशिप।

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