आज 30 सितम्बर का इतिहास

0
285

30 सितम्बर सन 1444 ईसवी को इटली के पास्तुकला के कलाकार डोनैटो ब्रामेन्ट का जन्म हुआ। उन्होंने इटली में वस्तुकला और शिल्पकला की ख्याति के काल में जीवन बिताया।

उन्होंने अपने दो साथियों माइकल आन्ज और रेफ़ाइल की सहायता से ऐतिहासिक गिरिजाघर सेन्ट पीटर्ज़ की इमारत को नये सिरे से बनाया।

उन्होंने इसी प्रकार इटली के मीलान नगर में सेंन्ट मैरी गिरिजाघर की इमारत भी बनाई। वर्ष 1514 ईसवी में उनका निधन हो गया।

30 सितम्बर सन 1938 ईसवी को जर्मनी में मूनीख़ का ऐतिहासिक सम्मेलन आयोजित हुआ। इस सम्मेलन में जर्मनी के नेता हिटलर इटली के नेता मोसोलीनी , फ़्रांस के प्रधान मंत्री एडवर्ड डेलाडी और ब्रिटेन के प्रधान मंत्री नोबल चेम्बरलन ने भाग लिया। इस सम्मेलन का उदेदश्य जर्मनी और चेकेस्लवाकिया के बीच मतभेदों के दूर करने का मार्ग खोजना था। इस सम्मेलन का परिणाम चेकेस्लवाकिया का कुछ भाग जर्मनी में जुड़ जाने के रुप में निकला।

इस संधि का योरोप की बाद की घटनाओं पर प्रभाव पड़ा इसी प्रकार इससे पश्चिमी देशों के साम्राज्यवाद का भी पर्दाफ़ाश हुआ। इसके अतिरिक्त इस सम्मेलन से हिटलर को ऐसा लगा कि योरोप उसके वर्चस्वाद के मुक़ाबले में बहुत अधिक प्रतिरोध नहीं कर कर रहा है।

यह भी पढ़े  आज 2 मार्च 2019 का इतिहास

दूसरे विश्व युद्ध में जर्मनी की पराजय के बाद सन 1945 ईसवी को चेकसलवाकिया ने अपनी भूमि जर्मनी से वापस ले ली।

30 सितम्बर सन 1985 ईसवी को भूकम्प की तीव्रता को ऑकने वाले यंत्र रेक्टर स्केल के अविष्कारक चार्ल्ज रेक्टर का अमरीका में निधन हुआ। वे 75 वर्ष के होकर मरे । उन्होंने अपने एक साथी शोधकर्ता की सहायता से भूकम्प को उस की उर्जा के आधार पर, जो भूकम्प से निकलती है तथा इसकी लहरों के आधार पर 9 प्रकारों में विभाजित किया और रेक्टर स्केल को पेश किया। इससे पहले वैज्ञानिक भूकम्प के ज़ाहिरी प्रभाव को देखते हुए उसकी तीव्रता नापते थे। जो स्वीकार्य नहीं होती थी।

30 सितंबर वर्ष 1961 को सीरिया यूनाइटेड अरब रिपब्लिक से निकल गया। फ़रवरी वर्ष 1958 में सीरिया में, साम्यवादियों के बढ़ते हुए प्रभाव को रोकने के लिए सीरिया ने मिस्र में विलय कर लिया था और इस प्रकार दोनों देशों पर आधारित यूनाइटेड अरब रिपब्लिक अस्तित्व में आया। बाद में यमन भी इसमें शामिल हो गया किन्तु जमाल अब्दुन्नासिर की नीतियों के कारण यूनाइटेड अरब रिपब्लिक की गाड़ी अधिक समय तक न चल सकी। इस समझौते पर 22 फ़रवरी वर्ष 1958 को मिस्र की ओर से जमाल अब्दुन्नासिर और सीरिया की ओर से शेकरी क़ूतली ने हस्ताक्षर किए थे।  जमाल अब्दुन्नासिर को नये गणतंत्र का प्रमुख बनाया गया जबकि क़ाहिरा को राजधानी बनाया गया था।

यह भी पढ़े  आज 07 अप्रैल 2018 का इतिहास

 

30 सितंबर वर्ष 1965 को इन्डोनेशिया में कम्युनिज़्म समर्थित क्रांति के विरुद्ध सोहारतू की सेना ने भाग लिया। इस रक्तरंजित झड़प में पचास हज़ार से एक लाख लोग मारे गये थे। इस युद्ध में सफलता के बाद वह इस देश के राष्ट्रपति बने। उनका शासन काल वर्ष 1967 से वर्ष 1998 तक चला। उन्होंने आरंभ में एक बैंक क्लर्क के रूप में विफलता के बाद वर्ष 1940 में Royal Netherlands East Indies Army ज्वाइन कर ली। बाद में इन्डोनेशिया की स्वतंत्रता के लिए बनने वाली सेना में कमान्डर के रूप में शामिल हुए यहां तक कि इन्डोनेशिया को स्वतंत्रता मिली। इन्डोनेशिया की स्वतंत्रता के समय वे मेजर जनरल के पद तक पहुंच गये थे। जनरल सोहारतू ने इन्डोनेशिया में तीन दशकों तक शासन किया। वर्ष 1998 में जनप्रदर्शन के कारण वे त्यागपत्र देने पर विवश हुए। 27 जनवरी वर्ष 2008 को जनरल सोहरती का निधन हो गया।

30 सितंबर वर्ष 1895 को लेबनान के प्रसिद्ध कलाकार, कवि और लेखक जिबरान ख़लील ने शिक्षा आरंभ की। वह युवाकाल में ही अमरीका चले गये थे। स्कूल के प्रशासन ने उन्हें पलायन करके आने वाले छात्रों के विशेष स्कूल में प्रवेश दिया ताकि वे अंग्रेज़ी भाषा सीख सकें। स्कूल में पढ़ने के साथ साथ उन्होंने अपने घर के पास फ़ाइन आर्ट के स्कूल में भी शिक्षा जारी रखी। इसी स्कूल में उनके शिक्षक ने फ़ाइन आर्ट के प्रसिद्ध कलाकर, चित्रकार और प्रकाशक फ्रेड हालैंड डे से परिचित कराया जिन्होंने जिबरान की योग्यता को निखारने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई और उनके उत्साह को बढ़ाया। वर्ष 1898 में पहली बार जिबरान की बनाई हुई चित्रकारी के नमूने एक पुस्तक के मुख्य पृष्ठ के रूप में प्रयोग किए गये। जिबरान ख़लील ने अपनी पुस्तक दा प्राफ़िट के कारण, ख्याति प्राप्त की।

यह भी पढ़े  आज 11 दिसम्बर का इतिहास

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here