आज 24 दिसम्बर का इतिहास

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24 दिसम्बर सन 1849 ईसवी को फ़्रांस के सैनिकों ने पश्चिमी अफ़्रीक़ा के गीनी क्षेत्र पर आक्रमण किया। यह आक्रमण गीनी की उपजाऊ भूमि पर अधिकार करने की भूमिका था। इस आक्रमण से पहले फ़्रांस ने गीनी में अपनी एक कम्पनी स्थापित की जिसने आक्रमण के लिए भूमि समतल की। फ़्रांसीसी सैनिकों ने इस क्षेत्र में ठिकाने बनाकर अपनी स्थिति मजबूत का ली।  1913 में यह क्षेत्र औपचारिक रुप से फ़्रांस का उपनिवेश बन गया।

यहॉं तक कि 1958 ईसवी में एक जनमत संग्रह में स्थानीय जनता ने फ़्रांस से स्वतंत्रता की मांग की और इसी वर्ष यह देश स्वतंत्र हुआ।

24 दिसम्बर सन 1865 ईसवी को अमरीका में अश्वेत लोगों विशेषकर श्याम वर्ण के लोगों से मुकाबले के लिए “कू क्लक्स क्लान” नाम से एक गुप्त गुट संगठित किया गया जिसका मानना था कि श्वेतों को दूसरी जातियों पर श्रेष्ठता प्राप्त है। यद्यपि इस गुट की स्थापना के चार वर्ष बाद इसे गैर क़ानूनी घोषित कर दिया गया। किंतु इस गुट ने उसके के बाद भी श्याम वर्ण वालों पर निरंतर आक्रमण करके हिंसा फैलायी। यह गुट उन श्वेतों को भी हताहत कर देता है जो कालों के अधिकारों का समर्थन करते हैं। अमरीका ने इस गुट के सफ़ाये के लिए प्रभावी क़दम नहीं उठाए।

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24 दिसम्बर सन 1951 ईसवी को संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा एक प्रस्ताव पारित किये जाने के बाद लीबिया स्वतंत्र हो गया और मोहम्मद इदरीस अलमेहदी को इस देश का शासक चुना गया। अतीत में यह देश त्राब्लस के नाम से प्रसिद्ध था और वर्षों तक विदेशी शक्तियों के नियंत्रण में रहा। 16वीं शताब्दी में उसमानी शासन ने लीबिया का अतिग्रहण कर लिया प्रथम विश्व युद्ध में जनता के कड़े प्रतिरोध के बावजूद लीबिया/इटली के नियंत्रण में चला गया।  दूसरे विश्व युद्ध में ब्रिटेन और फ़्रांस ने इस देश पर अधिकार किया। अंतत: 1951 ईसवी में लीबिया को स्वाधीनता मिली और 1969 में कज़्ज़ाफ़ी के नेतृत्व में एक विद्रोह के बाद इस देश में प्राजातांत्रिक व्यवस्था स्थापित हुई।  फ़रवरी सन 2011 को लीबिया की जनता ने इस देश के नेता क़ज़्ज़ाफ़ी की तानाशाही से तंग आकर विद्रोह आरंभ किया और 21 अक्तूबर सन 2011 को उनकी हत्या कर दी।

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