आज 17 अप्रैल 2018 का इतिहास

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17 अप्रैल सन 1953 ईसवी को कम्बोडिया को फ़्रांस से स्वतंत्रता मिली। कम्बोडिया पर 15वीं शताब्दी से विदेशी हस्तक्षेप आरंभ हुए। 19वीं शताब्दी के मध्य में कम्बोडिया के नरेश ने पड़ोसी देशों के आक्रमणों का मुकाबला करने के लिए फ़्रांस से सहायता चाही और फ़्रांस ने सन 1863 से इस देश को अपने अधीन कर लिया और यह स्थिति 1953 तक जारी रही। स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद के वर्षों विशेषकर 1960 के दशक में कम्बोडिया की स्थिति बड़ी ही तनावपूर्ण रही। अंतत: सन 1999 में इस देश में संसदीय चुनाव हुए जिसके बाद इस देश में शाति की स्थापना हुई।

थाइलैंड लाओस और वियतनाम इसके पड़ोसी देश है।

 

17 अप्रैल वर्ष 1915 को पहली बार विश्व में घुटन पैदा करने वाली गैस का प्रयोग किया गया। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान अमानवीय कार्यवाही करते हुए जर्मनी ने ब्रिटिश और फ़्रांसीसी सैनिकों के विरुद्ध इस गैस का प्रयोग किया जिसमें संयुक्त सेना के बहुत से सैनिक मारे गये। गैस युद्ध के नाम से प्रसिद्ध इस युद्ध में जर्मनी को किसी सीमा तक सफलता प्राप्त हुई। प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद युद्ध में रासायनिक गैसों के प्रयोग पर प्रतिबंध लगाने के प्रयास आरंभ हुए जो युद्ध में रासयनिक शस्त्रों के प्रयोग और उनके विस्तार पर प्रतिबंध के समझौते के रूप में सामने आया। इसके बावजूद कुछ देशों की ओर से युद्धों के दौरान रासयनिक शस्त्रों के प्रयोग का क्रम जारी रहा जिसमें अमरीका की ओर से वियतनाम पर रासयनिक बमबारी और आठ वर्षीय थोपे गये युद्ध के दौरान ईरानी जनता के विरुद्ध इराक़ी शासन द्वारा रासयनिक शस्त्रों का प्रयोग करना शामिल है।

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17 अप्रैल सन 1915 ईसवी को विश्व में पहली बार घातक गैस का प्रयोग युद्ध में हुआ। यह अमानवीय कार्रवाई प्रथम विश्व युद्ध में हुई। जर्मनी ने ब्रिटेन और फ़्रांस के विरुद्ध लड़ाई में फ़्रांस के एपर नामक क्षेत्र में इस गैस प्रयोग करके संयुक्त सेना के बहुत से सैनिकों को मौत की नींद सुला दिया। गैस युद्ध के नाम प्रसिद्ध इस लड़ाई में जर्मनी को थोड़ी सफलता मिली। प्रथम विश्व युद्ध के पश्चात इस बात के प्रयास आरंभ हुए कि लड़ाइयों में रासायनिक गैसों के प्रयोग पर प्रतिबंध लगाया जाए। जिनके परिणाम स्वरुप रासायनिक हथियारों के उत्पादन प्रसार और प्रयोग पर प्रतिबंध से संबंधित कई अंतर्राष्टीय समझौते हुए। इसके बावजूद बहुत से देश अत्यंत आधुनिक और घातक रासायनिक शस्त्रों को प्रयोग कर रहे हैं जिसका एक उदाहरण अमरीका द्वारा वियतनाम पर होने वाली रासायनिक बम्बारी है। इसी प्रकार 1980 से 88 के बीच इराक़ द्वारा ईरान के विरुद्ध रासायनिक हथियारों का प्रयोग है।

17 अप्रैल सन 1946 ईसवी को सीरिया को अतिग्रहणकारी सेना से मुक्ति मिली। और यह देश स्वतंत्र हो गया। अतीत में सीरिया और इसके आस पास के कुछ क्षेत्रों को मिलाकर शाम कहा जाता था।

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इस्लाम के उदय से पूर्व शाम पर ईरान यूनान मिस्र और रोम ने अधिकार किया। इस्लामी सरकार के बन जाने के कुछ ही समय बाद शाम भी इसी सरकार के अधीन हो गया। यह देश उमवी शासकों का केंद्र रहा। कुछ समय बाद इस पर सीरिया ने अधिकार किया और उसके पश्चात यह देश उसमानी शासन के क़ब्ज़े में चला गया। प्रथम विश्व युद्ध में उसमानी शासन के टूट जाने के पश्चात सीरिया फ़्रांस के अधीन हो गया। सीरिया के स्वतंत्रता प्रेमियों ने ज़ोरदार संघर्ष आरंभ किया और जून सन 1941 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटेन और फ़्रांस की सेना ने सीरिया पर क़ब्ज़ा कर लिया किंतु इस देश में स्वतंत्रता के लिए संघर्ष चलते रहे और सन 1946 में जब ब्रिटेन और फ़्रांस की सेनाएं इस देश से वापस गयीं तो इसे पूर्ण रुप से स्वतंत्रता मिली।

 

17 अप्रैल वर्ष 1895 ईसवी को चीन और जापान के मध्य एक महत्त्वपूर्ण समझौते पर इस्ताक्षर होने के बाद कोरिया उपमहाद्वीप के स्वामित्व पर दोनों देशों के मध्य होने वाला युद्ध समाप्त हो गया। ज्ञात रहे कि चीनियों ने जापान को सूचना दिए बिना ही इस महाद्वीप में अपने सैनिकों की संख्या में वृद्धि कर दी थी जबकि जापानियों ने अल्टीमेटम दिए बिना ही चीनी सेना पर आक्रमण कर दिया था। चीन ने कई बार पराजित होने के बाद अंततः इस समझौते की शर्त को स्वीकार किया।

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17 अप्रैल वर्ष 2004 ईसवी को ज़ायोनी शासन के युद्धक विमानों ने फ़िलिस्तीन के प्रतिरोध संगठन हमास के नेता और प्रसिद्ध फ़िलिस्तीनी नेता डाक्टर अब्दुल अज़ीज़ रन्तीसी की कार पर राकेट से आक्रमण करके उनको शहीद कर दिया। अब्दुल अज़ीज़ रन्तीसी शैख़ अहमद यासीन की शहादत के बाद हमास के नेता बने थे। अब्दुल अज़ीज़ रन्तीसी वर्ष 1947 में याफ़ा नगर में जन्मे। उन्होंने सन 1967 में मिस्र के इस्कंदरिया विश्वविद्यालय से चिकित्सा की शिक्षा पूरी की। उन्होंने युवाकाल से ही ज़ायोनियों के विरुद्ध अपने प्रयास आरंभ कर दिए थे और कई बार उन्हें जेल भी जाना पड़ा। हमास आंदोलन के गठन के बाद वह उसके सदस्य बन गये और उसके नेताओं में उनकी गणना होने लगी। 17 अप्रैल वर्ष 2004 ईसवी को ज़ायोनियों ने उनको शहीद कर दिया।

 

17 अप्रैल वर्ष 1950 ईसवी को पाकिस्तान का पहला राष्ट्रीय संग्रहालय स्थापित हुआ। इस दिन गवर्नर जनरल ख़्वाजा नाज़िमुद्दीन ने कराची के फ़्रेयर हाल में पाकिस्तान के इस पहले राष्ट्रीय संग्रहालय का उद्घाटन किया। फ़्रेयर हाल की इमारत को कराची नगर महापालिका से विशेष रूपसे किराए पर लिया गया था। पाकिस्तान की दूसरी ओर तीसरी पंचवर्षीय योजनाओं में राष्ट्रीय संग्रहालय की एक अलग इमारत के बनाने लिए विशेष रूप से राशि विशेष की गयी और वर्ष 1969 में प्रिंस गार्डन में इस इमारत के पूरे होने के बाद संग्रहालय इस इमारत में स्थानांतरित कर दिया गया।

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