आज से 21 जिलों में दी जाएगी फाइलेरिया की खुराक

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पटना – फाइलेरिया या हाथीपांव की रोकथाम के लिए बिहार के इक्कीस जिलों में सोमवार से मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) की शुरुआत होने जा रही है। लिम्फैटिक फाइलेरिया उन्मूलन के लिए ग्लोबल एलायंस (जीएइएलफ) के 10 वें सम्मेलन के बाद पूरे देश में फाइलेरिया के रोकथाम के लिए अभियान शुरू होने जा रहा है। केन्द्र सरकार ने वर्ष 2022 तक पूरे देश से फाइलेरिया उन्मूलन का लक्ष्य रखा है। विशेषज्ञों की मानें तो फाइलेरिया रोग के रोकथाम के लिए ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के स्तर को बढ़ाने की जरूरत है। इसके लिए सख्त निगरानी पण्राली लागू करनी होगी और साथ ही इस उद्देश्य के लिए जीविका मंच का इस्तेमाल करने की संभावनाएं भी तलाशनी होंगी। एमडीए कार्यक्रम के अंतर्गत दो साल से अधिक उम्र के सभी व्यक्तियों को दवाओं की खुराक दी जाती है। केवल दो साल से छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार लोगों को इससे छूट दी जाती है।राज्य कार्यक्रम अधिकारी बिपिन कुमार सिन्हा ने कहा कि इस रोग की चपेट वाले हर जिले में साल में एक बार एमडीए का चरण आवश्यक तौर पर चलाया जाना चाहिए। इसका संक्रमण आमतौर पर बचपन में होता है और इससे लसिका पण्राली या लिम्फेटिक सिस्टम को अप्रत्यहक्ष रूप से नुकसान पहुंचता है। फाइलेरिया के खिलाफ जंग में सबसे अहम हथियार दवाओं की खुराक ही है। बाकी बचे शेष तेरह जिलों को इसी साल एमडीए के अगले चरण में कवर किया जाएगा। जहांनाबाद और शेखपुरा को इस साल की शुरुआत में पहले ही कवर किया जा चुका है। एनवीबीडीसीपी के अनुसार वर्तमान समय में 65 करोड़ से ज्यादा भारतीयों के इस रोग का शिकार बनने का खतरा है। देश भर के इक्कीस राज्यों और संघ शासित प्रदेशों के 256 जिलों में यह रोग पाया गया है। इनमें बिहार के 38 जिले भी शामिल हैं। इनमें अररिया, बांका, बक्सर, बेगूसराय, भागलपुर, पूर्वी चम्पारण, गया, गोपालगंज, जमुई, खगड़िया , कैमूर, मधुबनी, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, पटना, सारण, सीतामढ़ी, सीवान, पश्चिम चम्पारण, सहरसा और सुपौल जिले में दवा वितरण की शुरुआत होने जा रही है। ज्ञात हो कि नयी दिल्ली में जीएइएलएफ के 10 वां सम्मेलन आयोजित किया गया था जिसमें विश्व के 60 देशों ने भाग लिया था।

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