आज प्रकृति व विकास के बीच टकराव की स्थिति : मोदी

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PATNA VISHO SANWAD KENDRA MEIN PUSTAK KA VIMOCHAN KERTE DY CM SUSHIL KUMAR MODI AND OTHER

विश्व संवाद केन्द्र, पटना की ओर से प्रकाशित होने वाली स्मारिका ‘‘रत्नगर्भा’ का विमोचन उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने शनिवार को किया। विमोचन के उपरांत उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि आज प्रकृति व विकास के बीच टकराव की स्थिति है। विकास की कीमत प्रकृति व पर्यावरण के नुकसान के रूप में चुकानी पड़ रही है। पर्यावरण असंतुलन के कारण कृषि, स्वास्य और मौसम प्रभावित हो रहा है। ऐसे में यह हम सबका दायित्व है कि प्रकृति के साथ तारतम्य बना कर अगली पीढ़ी के लिए बेहतर धरती देकर जायें। श्री मोदी ने कहा कि पिछले वर्ष बिहार के अररिया व किशनगंज में अतिवृष्टि की वजह से भारी बाढ़ आई। अररिया में पूरे अगस्त महीने में औसत 335 मिमी औसत बारिश होती थी। मगर तीन दिन में 365 मिमी बारिश हो गई, जिसके कारण जिन इलाकों में कभी बाढ़ नहीं आती थी वहां भी 5-6 फुट तक पानी भर गया। पिछले साल 10 नम्बर से पहले खगड़िया व अन्य इलाकों में मक्के की बुआई की गई। मगर तापमान में भारी गिरावट के कारण बाली में दाना नहीं आया। तापमान असंतुलन के कारण ही इस बार वायरल बुखार 5 दिन की जगह 7 दिन तक लोगों को परेशान किया। दुनिया के अनेक हिस्सों में जलसंकट की स्थिति है। सौभाग्य है कि पटना में 24 घंटे पानी उपलब्ध है। चेन्नई, हैदराबाद, रायपुर, जमशेदपुर जैसे शहरों को विकास की कीमत चुकानी पड़ी है। कोसी 120 किमी दूर जाकर बह रही है। गंगा अपनी धारा से दूर हो गई है। भारत सरकार ‘‘नामामि गंगे’ के तहत गंगा की अविरलता और स्वच्छता के लिए अनेक योजनाएं चला रही है। गंगा किनारे के शहरों में एसटीपी का निर्माण, गांवों को ओडीएफ बनाने और बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण का अभियान चल रहा है। हम सबको अपनी आदतों व व्यवहार में बदलाव लाने की जरूरत है। इस अवसर पर पर्यावरणविद् डॉ.मेहता नागेन्द्र सिंह ने कहा कि रत्नगर्भा स्मारिका हमें सचेत करने के लिए है कि अगर प्रकृति से छेड़छाड़ करना हमने बंद नहीं किया तो प्रकृति पंचमुखी रूप में अपने विनाश का बदला हमसे लेगी। उन्होंने कहा कि पर्वत, जंल, नदी व कृषि योग्य भूमि के साथ हमने जो संवेदनहीन व्यवहार किया, उसी का नतीजा है कि आज हमें आधुनिक सुख-सुविधाओं के दौर में अतिवृष्टि, सुखाड़, भूकंप, चक्रवात और ज्वालामुखी जैसी प्राकृतिक आपदाओं का कोपभाजन बनना पड़ रहा है। विश्व संवाद केंद्र के सचिव सह दीघा विधायक डॉ. संजीव चौरसिया ने संस्था की कार्य योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि विश्व संवाद केंद्र मानव के लिए जरूरी विषयों को अपने आरंभिक काल से ही सामने लाता रहा है। इस दिशा में पर्यटन, संस्कृति, सिनेमा और अब पर्यावरण जैसे विषय पर स्मारिका का प्रकाशन सराहनीय है। विश्व संवाद केंद्र के सम्पादक संजीव कुमार ने इस अवसर पर बताया कि भारत के अन्य राज्यों के मुकाबले बिहार को शैडो एरिया में रखा जाता है। देश के अन्य लोगों के मन में बिहार को लेकर जो नकारात्मक छवि पिछले 20-25 सालों में बन गई थी उसमें सुधार के लिए यह संस्था कार्य कर रही है। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए विश्व संवाद केंद्र के अध्यक्ष श्रीप्रकाश नारायण सिंह ने कहा कि समाज का जो वर्ग अपनी प्राकृतिक संपदा को बचाने के लिए संकल्पबद्ध है उसे ‘‘रत्नगर्भा’ ने एक स्वरूप देने का प्रयास किया है। कार्यक्रम का मंच संचालन विपुल कुमार सिंह ने किया। इस अवसर पर समाजसेवी व विश्व संवाद केंद्र के न्यासी हरिशंकर शर्मा, न्यासी विमल जैन, पत्रकार देवेन्द्र मिश्र, कन्हैया भेलारी, राकेश प्रवीर, कुमार दिनेश, कृष्णकांत ओझा समेत पर्यावरणविद् छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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