आज जेडीयू में शामिल होंगे ‘इलेक्शन गुरू’ प्रशांत किशोर, मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी

0
12

बिहार में बहार है, नीतीशे कुमार है’ के नारे के साथ नीतीश कुमार को बिहार के मुखिया की कुर्सी दिलाने वाले रणनीतिकार आज सुबह 11 बजे जेडीयू में शामिल होंगे. आज पटना में नीतीश के घर पर जेड़ीयू की बड़ी बैठक है. जानकारी के मुताबिक आने वाले दिनों में प्रशांत किशोर को बिहार में पार्टी और सरकार में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है. नीतीश कुमार के महागठबंधन छोड़ने के बाद प्रशांत किशोर ने उनसे किनारा कर लिया था.

खबरों की माने तो नीतिश कुमार प्रशांत किशोर को नंबर दो की पोजीशन देने का मन बना चुके हैं. प्रशांत किशोर पार्टी और सरकार के बीच पुल का काम करेंगे. आने वाले समय में प्रशांत किशोर के चुनाव लड़ने की भी खबरें हैं. प्रशांत किशोर को बीजेपी और कांग्रेस दोनों का करीबी माना जाता है. ऐसे में जेडीयू से राजनीतिक पारी के शुरुआत की खबर से उन्होंने सभी को थोड़ा सा हैरान जरूर किया है.

यह भी पढ़े  अनाथ बच्चियों के साथ हुई घटना पर बिहार ही नहीं पूरी दुनिया दुखी : रघुवर

पीएम मोदी 48% लोगों की पसंद, 11% के साथ राहुल दूसरे नंबर पर: प्रशांत किशोर का सर्वे
हाल ही में प्रशांत किशोर की संस्था इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी ने लोकसभा चुनाव को लेकर बड़ा सर्वे किया था. आंकड़ों की बात करें तो पीएम मोदी 48 प्रतिशत लोगों की पसंद बने हैं, दूसरे नंबर पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी हैं जो 11 प्रतिशत लोगों की पसंद है. राहुल से मोदी 400% से भी ज्यादा की बढ़त लिए हुए हैं. मोदी का मुकाबला करने निकले बाकी सिंगल डिजीट में ही नहीं बल्कि 3-4-5 प्रतिशत में हैं. सर्वे के नतीजे राजनीतिक हैं लेकिन इसके बाद बीजेपी को कांग्रेस पर हमला बोलने का एक और मौका मिल गया है.

बैठक से पहले बोले RCP सिंह- कोई छोटा या बड़ा भाई नहीं
बैठक से पहले जेडीयू के बड़े नेता आरसीपी सिंह ने ये कहकर सियासी खलबली मचा दी है कि बिहार में कोई बड़ा और कोई छोटा भाई नहीं है.  आरसीपी सिंह का ये बयान इस मायने में काफी अहम हो जाता है क्योंकि बीजेपी खुद को बड़ा भाई मानते हुए लोकसभा की ज्यादा सीटों पर लड़ना चाहती है. जबकि जेडीयू पुराने रिश्तों की दुहाई देकर ज्यादा सीटों की मांग कर रही है. बिहार में लोकसभा की 40 सीट है, बीजेपी के पास अभी 22 सांसद हैं. चर्चा है कि जेडीयू 12 से 15 सीटों पर लड़ सकती है, ऐसे में बीजेपी को अपनी कुछ सीटें जेडीयू को देनी होगी.

यह भी पढ़े  छह बच्चों की असमय मौत से गम में बदल गई पूजा की खुशी

कौन हैं प्रशांत किशोर?
2014 में बीजेपी की सरकार बनने के बाद अचानक चर्चा में आए प्रशांक किशोर को बेहतरीन चुनावी रणनीतिकार के रूप में जाना जाता है. जंग का मैदान कितना भी बड़ा हो प्रशांत किशोर हमेशा पर्दे के पीछे रहते हैं. उन्हें पीके नाम भी जाना जाता है.

प्रशांत किशोर इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी नाम का संगठन चलाते हैं जो लीडरशिप, सियासी रणनीति, मैसेज कैंपेन और भाषणों की ब्रांडिंग करता है. 2014 में बीजेपी का साथ छोड़ने के बाद प्रशांत किशोर ने 2015 में बिहार चुनाव के लिए नीतीश-लालू के महागठबंधन से हाथ मिला लिया था.

इसके बाद साल 2017 में YSRC से जुड़ गए. पार्टी चीफ जगन मोहन रेड्डी ने खुद प्रशांत की मुलाकात पार्टी के बड़े नेताओं से करवाई थी. प्रशांत की प्लानिंग जहां बिहार में तो काम कर गई लेकिन YSRC को आंध्रप्रदेश के बायपोल चुनाव में कामयाबी नहीं मिल पाई. प्रशांत किशोर ने उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के लिए भी काम किया लेकिन सफलता नहीं दिला पाए.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here