आज का दिनः 5 मई 2019, महादेव का महामान है- मासिक कार्तिगाई दीपम्!

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दक्षिण भारत का प्रमुख त्योहार है- कार्तिगाई दीपम्, जिसे दक्षिण भारतीय हिन्दू लंबे समय से मनाते आ रहे हैं. कार्तिगाई के दिन का पालन हर महीने किया जाता है लेकिन सबसे मुख्य दिन, कार्तिकाई (जो अन्य हिन्दु कैलेण्डरों में वृश्चिक सौर माह से मेल खाता है) के महीने में पड़ता हैं। द्रिक पञ्चाङ्ग साल में सभी कार्तिकाई के दिनों को सूचीबद्ध करता है और इसमें सबसे मुख्य कार्तिकाई के दिन जिसे कार्तिकाई दीपम कहते हैं, शामिल है।

तिरुवन्नामलई की पहाड़ी में कार्तिगाई का त्यौहार बहुत प्रसिद्ध हैं। कार्तिगाई के दिन पहाड़ी पर विशाल दीप जलाया जाता है जो पहाड़ी के चारों ओर कई किलोमीटर तक दिखता है। इस दीप को महादीपम कहते हैं और हिन्दु श्रद्धालु यहाँ जाते हैं और भगवान शिव की प्रार्थना करते हैं।

* इस अवसर पर श्रद्धालु शाम को अपने घरों और आसपास तेल के दीपक जलाकर खुशियां मनाते हैं.

* कार्तिकाई दीपम का नाम कृत्तिका नक्षत्र से लिया गया है, इसीलिए इसे कार्तिकाई कहा जाता है क्योंकि इस दिन कृत्तिका नक्षत्र प्रबल होता है.

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* धर्मधारणा के अनुसार भगवान श्रीविष्णु और ब्रह्मा के समक्ष अपनी अपनी श्रेष्ठता साबित करने के लिए भगवान शिव ने स्वयं को प्रकाश की अनन्त ज्योत में बदल लिया था, इसीलिए कार्तिगाई दीपम भगवान शिव की सर्वोच्च सत्ता के सम्मान के रूप में मनाया जाता रहा है.

* धर्म में दीपक का विशेष महत्व है क्योंकि यह अंधकार की नकारात्मकता को दूर करता है और यदि अंखड दीपक प्रज्ज्वलित किया जाए तो पूजा-साधना के शुभ परिणाम शीघ्र प्राप्त होते हैं!

क्या आप कार्तिगाई दीपम त्योहार के बारे में जानते हैं?
कार्तिगाई दीपम विशेष तौर से तमिल हिन्दुओं द्वारा मनाया जाने वाला त्योहार है। यह त्योहार तमिल लोगों द्वारा मनाये जाने वाले सबसे पुराने त्यौहारों में से एक है। त्योहार के दिन शाम के समय घरों और गलियों में तेल के दीपक एक पंक्ति में जलायें जाते हैं।
‘कार्तिगाई दीपम’ और ‘कार्तिकाई दीपम’ का उपयोग आपस में अदल-बदल कर किया जाता है।
कार्तिगाई दीपम का नाम ‘कार्तिकाई’ या कृत्तिका नक्षत्र से लिया गया है। जिस दिन कृत्तिका नक्षत्र प्रबल होता है, उस दिन ‘कार्तिगाई दीपम’ को मनाया जाता है। यह त्योहार भगवान शिव के सम्मान में किया जाता है। हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव ने भगवान विष्णु और ब्रह्मा को अपनी श्रेष्ठता साबित करने के लिए स्वयं को प्रकाश की अनन्त ज्योत में बदल लिया था।
हालाँकि कार्तिगाई के दिन का पालन हर महीने किया जाता है, लेकिन सबसे मुख्य दिन, कार्तिकाई के महीने में पड़ता है। द्रिक पंचांग साल में सभी कार्तिकाई के दिनों को सूचीबद्ध करता है और इसमें सबसे मुख्य कार्तिकाई के दिन जिसे ‘कार्तिकाई दीपम’ कहते हैं, शामिल है। तिरुवन्नामलई की पहाड़ी में कार्तिगाई का त्यौहार बहुत प्रसिद्ध है। कार्तिगाई के दिन पहाड़ी पर विशाल दीपक जलाया जाता है, जो पहाड़ी के चारों ओर कई किलोमीटर तक दिखता है। इस दीपक को ‘महादीपम’ कहते हैं और हिन्दू श्रद्धालु यहाँ जाते हैं और भगवान शिव की प्रार्थना करते हैं।

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१६ जनवरी (बुधवार) मासिक कार्तिगाई
१३ फरवरी (बुधवार) मासिक कार्तिगाई
१२ मार्च (मंगलवार) मासिक कार्तिगाई
०८ अप्रैल (सोमवार) मासिक कार्तिगाई
०५ मई (रविवार) मासिक कार्तिगाई
०२ जून (रविवार) मासिक कार्तिगाई
२९ जून (शनिवार) मासिक कार्तिगाई
२७ जुलाई (शनिवार) मासिक कार्तिगाई
२३ अगस्त (शुक्रवार) मासिक कार्तिगाई
१९ सितम्बर (बृहस्पतिवार) मासिक कार्तिगाई
१६ अक्टूबर (बुधवार) मासिक कार्तिगाई
१३ नवम्बर (बुधवार) मासिक कार्तिगाई
१० दिसम्बर (मंगलवार) कार्तिगाई दीपम्

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