आईजीआईएमएस में सेंट्रल ब्लड क्लेक्शन लैब व पेन एंड पैलिएटिव केयर यूनिट का शुभारंभ

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Patna-Feb.20,2019-Bihar Health Minister Mangal Pandey is inaugurating Central Blood Collection at Indira Gandhi Institute of Medical Sciences (IGIMS) in Patna.

स्वास्य मंत्री मंगल पांडेय ने बुधवार को सुपरस्पेशलिटी संस्थान आईजीआईएमएस में 6.5 करोड़ की लागत से सेंट्रल ब्लड क्लेक्शन लैब और पेन एंड पैलिएटिव केयर यूनिट ओपीडी का उद्घाटन किया। उक्त दोनों सुविधाओं के शुरू होने से आईजीआईएमएस में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों को ब्लड जांच कराने एवं रिपोर्ट प्राप्त करना आसान होगी। वहीं पेन एंड पैलिएटिव केयर ओपीडी के शुरू होने से कैंसर के वैसे मरीजों को के लिए रामबाण होगा,जिन्हें किसी प्रकार का ऑपरेशन,कैसर की दवा या सेकाई नहीं की जा सकती है। पैलिएटिव केयर से जुड़े मरीजों को मुफ्त दवाइयां भी वितरण किया जाएगा। आईजीआईएमएस में यह ओपीडी शुरू करने वाला पहला संस्थान हुआ। इस मौके पर निदेशक डॉ एन आर विास,डॉ एस के शाही,डॉ उदय कुमार,डॉ मनीष मंडल,डॉ बिपिन कुमार,डॉ रंजीत गुहा,डॉ कृष्ण गोपाल,डॉ अमन कुमार,डॉ अनुराग(सीएमआ) मौजूद थे।मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ मनीष मंडल ने बताया कि सेंट्रल ब्लड क्लेक्शन लैब से अब दो घंटे में ही रजिस्र्टड मोबाइल पर मरीजों को रिपोर्ट उपलब्ध करायी जाएगी। डॉ मंडल ने बताया कि ‘‘सेंट्रल ब्लड क्लेक्शन ऑटोमेशन’ के तहत मरीजों का ब्लड क्लेक्शन से लेकर रिपोर्टिग तक की व्यवस्था पूरी तरह डिजिटल फॉर्म में की जाएगी। फिलहाल यह सुविधा ओपीडी और इमरजेंसी मरीजों को मुहैया करायी जाएगी। कुछ दिन बाद वार्ड के मरीजों को भी इससे जोड़ा जाएगा। इस नयी व्यवस्था के तहत एक घंटे में 4200 ब्लड टेस्ट संभव हो सकेगा। 24 घंटे ब्लड टेस्ट की सुविधा अनवरत मिलेगी। अब इस नए सिस्टम की स्थापना के बाद इन तमाम समस्याओं से छुटकारा मिलेगी और किसी प्रकार की गड़बड़ी की आशंका भी नहीं रहेगी। बायोकेमेस्ट्री विभागाध्यक्ष डॉ (प्रो) उदय कुमार ने बताया कि नयी सिस्टम के शुरू होने के बाद मरीज का रजिस्ट्रेशन होते ही ब्लड जांच से संबंधित ब्यौरा सर्वर से जुड़े लैब इंफॉम्रेशन सिस्टम(एलआईएस) में ऑटोमेटिक चला जाएगा। बिलिंग काउंटर पर रजिस्ट्रेशन नंबर आते ही संबंधित मरीज का चिकित्सक द्वारा लिखी गयी ब्लड जांच से संबंधित सभी ब्यौरों की जानकारी मिल जाएगी और उसके अनुसार ही बिलिंग की जाएगी। कैशमेमो पर ही बारकोड प्रिंट हो जाएगा। इसके बाद टोकन काउंटर पर बारकोड को स्कैन करते ही संबंधित मरीज की सारी जानकारी एवं चिकित्सक द्वारा लिखी गयी जांच का पूरा ब्यौरा उपलब्ध होगा। टोकेन उसी मरीज को दिया जाएगा जो जरूरी जांच के लायक होंगे। ऐसा नहीं होने पर मरीज को दूसरे दिन बुलायी जाएगी। फिलहाल यह व्यवस्था नहीं होने के कारण मरीज और काउंटर पर बैठे स्टॉफ को परेशानी होती है। उसके बाद डिस्प्ले पर टोकेन नंबर आने पर ही ब्लड क्लैक्शन सैंपल देना होगा। वर्तमान व्यवस्था के तहत मरीज को पहले जांच से संबंधित विभाग को ढूंढ़कर जाना होता है उसके बाद स्टॉफ द्वारा रिनंबरिंग किया जाता है और उसके बाद ब्लड सैंपल क्लेक्शन किया जाता है। एपीटीएल (ऑटोमेटेड फ्लेबोटॉमी टय़ूब लेबलिंग सिस्टम) सिस्टम लग जाने के बाद टय़ूब का चयन, टेस्ट का प्रकार, बारकोड की प्रिटिंग, एनालाइजर के जरूरत के अनुसार ब्लड सैंपल क्लेक्शन टय़ूब पर बारकोड चिपकाना आदि कार्य ऑटोमेटिक संभव होगा। वर्तमान व्यवस्था के तहत एक मरीज की जांच पर करीब 3-5 मिनट लगता है। लेकिन नए सिस्टम के तहत एक घंटे में 1440 टय़ूब तैयार किया जा सकेगा। इस नए सिस्टम के शुरू होने के बाद बेमेल ब्लड सैंपल,गलत मरीज का ब्लड क्लेक्शन आदि होने की संभावना पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। नए सिस्टम की स्थापना कर रहे कंपनी द्वारा संस्थान को शून्य प्रतिशत गलतियां की गारंटी प्रदान की गयी है। ऑटोमेटेड टय़ूब शॉर्टर(एटीएस)-इससे सैंपल क्लेक्शन टय़ूब को जांच के लिए विभागावार छंटाई कर उपलब्ध कराएगा। न्यूमेटिक टय़ूब ट्रांसपोर्ट (पीटीएस)-इस सिस्टम द्वारा सैंपल क्लेक्शन टय़ूब को छंटाई के उपरांत 5 सेकेंड प्रति मीटर की रफ्तार से विभाग को उपलब्ध कराया जा सकेगा। इस सिस्टम के तहत ब्लड टेस्ट के लिए एकत्रित मरीजों के ब्लड को लैब तक एक मिनट के अंदर वैक्यूम से पहुंचाया जा सकेगा। ब्लड सैंपल को लैब तक भेजने के लिए वैक्यूम सिस्टम में तापमान नियंत्रित रहेगा। भविष्य में वार्डवार सैंपल एकत्रित करके वैक्यूम कंटेनर में डालने के बाद कम्प्यूटराइज्ड सिस्टम से इसका संचालन होगा।लैब में ब्लड सैंपल पहुंचने के उपरांत नए ऑटोमेटिक रोबोटिक आर्म मशीन द्वारा 122 प्रकार की जांच की जा सकेगी। इस मशीन से एक घंटे में 4200 ब्लड टेस्ट संभव हो सकेगा। उसके बाद मरीज का रिपोर्ट पूर्व से बने आईडी पर अपलोड हो जाएगा।

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