अविश्वास प्रस्ताव भारी मतों से खारिज: विपक्षी एकजुटता पर उठे सवाल, नमो ने दिखाया आईना

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जैसी आशा थी, वही हुआ। विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव भारी मतों से खारिज हो गया। अविश्वास प्रस्ताव के विरोध में 325 वोट पड़े, जबकि पक्ष में महज 126 वोट पड़े। इस प्रस्ताव पर कुल 451 सदस्यों ने वोट डाले। इस तरह से 199 मतों के अंतर अविश्‍वास प्रस्‍ताव गिर गया। प्रस्ताव पर वोटिंग के बाद लोकसभा की कार्रवाई सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।

बता दें कि यह प्रस्ताव आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर टीडीपी लेकर आई थी। इस अविश्‍वास प्रस्‍ताव को कांग्रेस समेत और अन्‍य विपक्षी दलों का समर्थन हासिल था। अविश्‍वास प्रस्‍ताव पर विपक्ष की किरकिरी के बाद अब उसकी एकजुटता पर भी सवाल उठने लगे हैं।

अविश्‍वास मत में एनडीए के सहयोगी दल शिवसेना सदन में उपस्थित नहीं थी तो बीजद और टीआरएस ने सदन से बहिर्गमन किया। अन्नाद्रमुक ने सरकार का साथ दिया। उससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कांग्रेस और खासकर राहुल गांधी के हर आरोप का न सिर्फ तीखा जवाब दिया, बल्कि आगामी चुनाव का आधार भी तैयार किया।

वह विपक्षी गठबंधन के ढीले तारों को भी झकझोरते दिखे। यह भी स्पष्ट कर दिया कि 2019 के लिए तो विपक्ष को कोई ख्वाब नहीं देखना चाहिए। राहुल ने उन्हें राफेल में ‘भागीदार’ ठहराया तो उन्होंने इसे हथियार बनाते हुए कहा कि वह चौकीदार भी हैं और देश के करोड़ों गरीबों, युवाओं, कामगारों के सपनों के भागीदार भी। राहुल ने उन्हें अपनी आंखों में देखने की चुनौती दी तो उन्होंने ‘नामदार परिवार’ पर परोक्ष तंज करते हुए कह दिया कि एक कामदार उनसे कैसे आंखें मिला सकता है।

लगभग डेढ़ घंटे के उनके भाषण में अधिकांश हिस्सा कांग्रेस के अतीत, साथियों के लिए कांग्रेस के व्यवहार, तुष्टिकरण की कांग्रेस की राजनीति पर केंद्रित रहा। वह परोक्ष रूप से कथित महागठबंधन के साथियों को यह जताने से नहीं चूके कि जो कांग्रेस के साथ खड़ा होगा उसका डूबना तय है।

शुक्रवार को लगभग 10 घंटे की चर्चा में विपक्ष और खासकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी आक्रामक रहे। चर्चा में कई रंग दिखे। राफेल डील को लेकर राहुल ने गंभीर आरोप लगाया और नाटकीय अंदाज में मोदी से गले भी मिले। उसी वक्त से माना जा रहा था कि मोदी का जवाब भी तीखा होगा। जब वक्त आया तो प्रधानमंत्री ने सीधे-सीधे विपक्ष की मंशा पर सवाल उठाया और इसे नकारात्मक राजनीति और अहंकार करार दिया।

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उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस का अहंकार है जिससे उन्हें लगता है कि वह सरकार गिरा सकते हैं और बना सकते हैं। सामने बैठीं सोनिया गांधी का नाम लिए बगैर उन्होंने कहा कि 1999 में 272 सांसद होने का दावा किया गया था। इस बार भी उनकी ओर से दावा किया था कि उनके पास सरकार को हटाने के लिए नंबर हैं। उनका गुरूर उन्हें बताता है कि वह भाग्यविधाता हैं, और यह भूल जाते हैं कि भाग्यविधाता जनता है।

कांग्रेस का उतावलापन ठीक नहीं
एक शायरी में उन्होंने कहा, ‘न मांझी न रहबर न हक में हवाएं हैं, कश्ती भी जर्जर यह कैसा सफर है।’ प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस की ओर से जिस तरह उतावलापन और बचकानापन दिखाया जा रहा है वह देश के लिए ठीक नहीं है। मोदी हटाओ ही उनका एकमात्र मुद्दा है। राहुल को यहां पहुंचने की जल्दी है। बिना चर्चा, बिना वोटिंग मुझे उठने को कहा गया। मैं भी हैरान रह गया। मैं चार साल के काम के बल पर खड़ा हूं, अड़ा भी हूं।

2024 में अविश्वास प्रस्ताव के लिए राहुल को शक्ति दें भगवान
कांग्रेस की ओर से महागठबंधन का खाका बुना जा रहा है। मोदी ने उस पर भी तंज किया और कहा कि 2019 में कांग्रेस के बड़ा दल बनने पर प्रधानमंत्री बनने का ख्वाव देखा जा रहा है, लेकिन उन साथियों का क्या जो प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं। यह सरकार का फ्लोर टेस्ट नहीं है बल्कि कांग्रेस के तथाकथित साथियों का सपोर्ट टेस्ट है। लेकिन ऐसा कुछ होने नहीं जा रहा है। राहुल की शिवभक्ति पर कटाक्ष करते हुए मोदी ने कहा कि भगवान उन्हें इतनी शक्ति दें कि 2024 में वह फिर से राजग सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकें।

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एक कामदार नामदार से कैसे आंख मिला सकता है
राहुल ने चुनौती दी थी कि प्रधानमंत्री उनसे आंखें नहीं मिला सकते। मोदी का पलटवार राहुल पर भारी पड़ा। उन्होंने कहा, मैं गरीब का बेटा आपसे क्या आंख मिलाऊंगा। आप तो नामदार हो, हम तो कामदार हैं। आपकी आंख में आंख हम नहीं डाल सकते। सुभाष चंद्र बोस, मोरारजी देसाई, जयप्रकाश नारायण, चौधरी चरण सिंह, सरदार वल्लभ भाई पटेल ने आंख में आंख डाली, उनके साथ क्या किया गया। प्रणब मुखर्जी ने आंख में आंख डाली तो क्या किया गया। शरद पवार के साथ क्या किया गया।

आंख की हरकत सबने देखी
राहुल के आंख मारने वाली हरकत पर प्रधानमंत्री ने तंज किया, ‘आंख की बात करने वालों की हरकतों को आज पूरे देश ने देख लिया कि आप कैसे आंख चला रहे थे।’

कांग्रेस को खुद पर अविश्वास
प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस को खुद पर अविश्वास है, यह अविश्वास ही उनकी कार्यशैली और संस्कृति का हिस्सा है। उसे स्वच्छ भारत, योग दिवस, प्रधान न्यायाधीश और रिजर्व बैंक पर विश्वास नहीं है। देश के बाहर पासपोर्ट की ताकत बढ़ रही है, इस भी विश्वास नहीं। उसे चुनाव आयोग पर विश्वास नहीं, ईवीएम पर विश्वास नहीं। क्योंकि उन्हें अपने पर विश्वास नहीं है। यह अविश्वास इसलिए बढ़ा क्योंकि सत्ता को वह अपना विशेष अधिकार मानते थे, जब जनाधिकार बढ़ने लगा तो परेशानी बढ़ने लगी।

राफेल-डोकलाम पर चेताया
राफेल और डोकलाम जैसे मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने आगाह किया। उन्होंने कहा कि जब डोकलाम पर स्थिति संभाल रहे थे तो आप चीन के राजदूत से बात कर रहे थे। देश के विषयों पर गंभीरता होनी चाहिए, हर जगह बचकानी हरकत से बचना चाहिए। देश की सुरक्षा के विषयों पर इस प्रकार का खेल देश माफ नहीं करेगा। राफेल के साथ भी ऐसा ही हुआ। यह समझौता दो देशों के बीच हुआ है और पूरी पारदर्शिता के साथ हुआ है। प्रार्थना है कि इतने संवेनदशील मुद्दे पर बचकाने बयान से बचा जाए। सर्जिकल स्ट्राइक को जुमला बताना भी बचकाना है।

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आंध्र के विशेष दर्जे का भी जवाब दिया
बहस की शुरुआत आंध्र प्रदेश के लिए विशेष राज्य के दर्जे से हुई थी। उन्होंने उनका भी जवाब दिया और कहा कि टीडीपी ने अपनी विफलता छुपाने के लिए यूटर्न लिया है। चंद्रबाबू से फोन पर कहा था कि बाबू आप वाईएसआर के जाल में फंस रहे हो। उन्होंने कालाधन, जीएसटी, आयुष्मान भारत और रोजगार जैसे कई मुद्दों पर सरकार की उपलब्धियां गिनाईं।

कांग्रेस ने बैंकों के 52 लाख करोड़ रुपये लुटाए
एनपीए की समस्या के लिए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों को कठघरे में रखते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने 2009 से 2014 तक देश के बैंकों को खाली कर दिया। आजादी के 60 साल में देश के बैंकों ने 18 लाख करोड़ रुपये कर्ज दिए थे। लेकिन 2008 से 2014 तक छह साल में यह राशि 52 लाख करोड़ रुपये हो गई। कांग्रेस जब तक सत्ता में रही बैंकों को लूटती रही। दुनिया में नेट बैंकिग शुरू होने से पहले भारत में कांग्रेस ने टेलीफोन बैंकिंग शुरू कर दी। अपने चहेतों के लिए बैंकों को लुटा दिया गया। लोन चुकाने के समय दूसरा लोन दे दिया गया। यह एनपीए का जंजाल पूरी तरह कांग्रेस का है। अब हमने इसकी जांच शुरू की। 12 बड़े मामलों में तीन लाख करोड़ रुपये की राशि फंसी है। यह राशि कुल एनपीए का 25 फीसद है। तीन बड़े मामलों में 45 फीसद रिकवरी भी हो चुकी है।

पूरे भाषण में नारेबाजी हुई
प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के तमाम आरोपों का सिलसिलेवार जवाब दिया। उनके जवाब के दौरान अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले तेदेपा के सदस्य पूरे वक्त नारेबाजी करते रहे।

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