अवध में आनन्द भयो जय रघुवर लाल की

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मां जानकी की प्राकट्य स्थली सीतामढ़ी के खड़का रोड स्थित मिथिलाधाम में बने विशाल पंडाल में चल रहे रामकथा के पांचवे दिन कथावाचक मानस मर्मज्ञ मोरारी बापू ने हनुमान चालीसा व वेदमंत्रोचारण के पाठ के बाद प्रवचन शुरू किया। व्यास पीठ से सीतामढ़ी को मां जानकी की पावन भूमि बताते हुये इसके वृहद विस्तार करने की भावना जताई और कहा कि तीर्थ को जागने की भी तिथि होती है। आस्था चैनल के माध्यम से 170 देशों में चल रहे कथा को देखने वालों में जो प्रेमी प्रवृति के राम प्रेमी हैं मां जानकी प्रेमी है वो जरूर यहॉं आयेंगे और उनके यहॉं आने से इस धरती की महिमा चारों दिशाओं में फैल जायेगी। सत्संग की महिमा बताते हुये कहा बिनु सत्संग विवेक ना होई, राम कृपा बिना सुलभ ना सोई। विवेक की प्राप्ति सिर्फ सत्संग से ही होती है। उन्होंने नव युवा पीढ़ियों को सत्संग की प्रेरणा दी। बापू ने भारतीय सभ्यता की मूल चीजों पर टिप्पणी करने वालों लेखकों की किताबों को ना पढ़ने की नसीहत देते हुये रामायण को अध्ययन करने की सलाह दी। कहा कि इसका सबसे बड़ा महत्व यह है कि यह विवेक, संस्कार नष्ट नहीं होने देगी। सनातन धर्म और वैदिक परम्परा पर टिप्पणी करने वालों पर एतराज जताया। राम श्लोक है लेकिन चौपाईयॉं सीता है। विनम्रता का नाम राम है। जो झुक जाये वही राम है। अपने आपको सबको चाहने वाला बताते हुंये कहा कि जो पूरी दुनिया को अपना ना माने तो उसको बापू कहलाने का हक नहीं। मेरी व्यासपीठ गंगा की तरह बहती रहेगी मेरा कोई ग्रूप नही है। मेरे ब्लड का ग्रुप भी ओ है। कहते हैं कि ओ ग्रुप सबमें चलता है। इसलिए हम सबके हैं और सब हमारे हैं। आदमी की पहचान के पॉंच प्रमाण बताते हुये कहा कि मॉं पहला प्रमाण है, सत्य का, प्रेम का, करूण का। दूसरा प्रमाण बाप। तीसरा प्रमाण समुद्र, चौथा प्रमाण जन्म स्थान, पॉचवा प्रमाण स्वर्ग। बाकी आपको जो समझना हो समझो। उनहोंने कहा कि श्रद्धा और विास का संलग्न नही होता तब तक राम का प्राक्टय नहीं होता। रामजन्म के प्रसंग ‘‘.. अवध में आनन्द भयो जय रघुवर लाल की’ गायन के साथ पांचवे दिन की कथा का समापन हुआ। बुधवार को काशी नरेश अनंत नारायण सिंह सपत्नीक, जिला परिषद अध्यक्ष उमा देवी, विधान पार्षद देवेश चन्द्र ठाकुर पूर्व मंत्री सुनील कुमार पिन्टू, मनोज कुमार, सुधाकर झा, उमेशचन्द्र झा, अरुण गोप आदि भी रामकथा के दौरान उपस्थित थे। आज काफी संख्या में सीतामढ़ी व बाहर के लोगों ने आरती में हिस्सा लिया। आज बापू ने प्रसादशाला व पाकशाला का भी भ्रमण किया।

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