अल्लाह-ईर से अमन, चैन और समृद्धि की कामना के साथ ईद उल अजहा की नमाज अदा

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Patna-Aug.12,2019-Muslim people are offering Namaz on the occasion of Eid-Al-Adha (Bakrid) festival at Gandhi Maidan in Patna.

राजधानी पटना सहित देश भर में हर्षोल्लास के साथ कुर्बानी और त्याग का पर्व बकरीद मनायी गयी। सुबह तयशुदा समय पर कड़ी सुरक्षा के बीच ईदगाहों, खानकाहों और मस्जिदों में ईद-उल-अजहा बकरीद की नमाज अदा की गई। पटना में नमाज अददायगी का मुख्य कार्यक्रम गांधी मैदान में आयोजित किया गया। सैकड़ों अकीदतमंदों ने यहां बकरीद की नमाज अदा की और गले मिल एक-दूसरे को बधाई। मौके पर जिलाधिकारी कुमार रवि और एसएसपी समेत जिले के तमाम आलाधिकारी मौजूद थे। गांधी मैदान में सुरक्षा के तगड़े क्षंतजाम किये गये थे। फुलवारीशरीफ के खानकाह ए मुजिबिया, शाही संगी मस्जिद, नया टोला चौराहा, इसोपुर, हारुन नगर, सबजपुरा, खलीलपुरा समेत ग्रामीण इलाकों में भुसौला दानापुर, जानीपुर, परसा बाजार, संपतचक, बेऊर, पहाड़पुर, पुलिस कॉलोनी, राजा बाजार, समनपुरा, शेखपुरा, हमीदपुर कुर्जी, बांस कोठी, संगम कॉलोनी, मैनपुरा, दुजरा, लाल कोठी, दीघा आदि इलाकों की मस्जिदों एवं ईदगाहों में ईद उल अजहा की नमाज अदा करने वालों की भारी भीड़ उमड़ी। इस दौरान प्रशासन ने सुरक्षा का सख्त इंतजाम किया था। विभिन्न मस्जिदों और सभी प्रमुख चौराहों पर पुलिस की तैनाती थी। मुस्लिम बहुत इलाकों में लोगों ने नमाज के बाद जानवर की कुर्बानी देकर अल्लाह से सलामती की दुआ मांगी। लोगों ने एक-दूसरे से गले मिल बकरीद की मुबारकबाद पेश की। बकरीद की नमाज के समय खुतबे में पेश इमामों ने अपने संदेश में फरमाया की कुर्बानी का मकसद अपने आप के अंदर माल व दौलत एवं बाल बच्चों की मुहब्बत से बढ़कर अल्लाह पाक की मुहब्बत पैदा करना है। यह इकरार करना है कि हर बंदे का माल, उसकी जान, उसकी इबादत और जीवन के सभी कर्म अल्लाह के लिए हैं। कुर्बानी का उद्देश्य अल्लाह की रजामंदी हासिल करना है और अल्लाह के बंदों की मदद करना है। अल्लाह ने खुद फरमाया है कि कुर्बानी का गोश्त और खून अल्लाह को नहीं पहुंचता है बल्कि तुम्हारे दिल का तकवा और अल्लाह का डर अल्लाह ताला तक पहुंचता है। इस दिन गरीबों का खास ख्याल रखना चाहिए और कोशिश करनी चाहिए कि आप की कुर्बानी का गोश्त आस पड़ोस एवं रिश्तेदारों में से उन लोगों तक पहुंच जाए जिनके घर पे कुर्बानी नहीं हुई है। सोमवार को सुबह में तापमान में नमी थी, लेकिन इसके बाद चिलचिलाती धूप निकली। हालांकि इससे त्यौहार के उत्साह में कमी नहीं आयी। लोगों का दोस्तों-रिश्तेदारों के घर आवागमन देर रात तक जारी रहा। फेसबुक व व्हाट्सएप पर भी लोग एक-दूसरे को मुबारकबाद देने में लोग लगे रहे।

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कश्मीर घाटी में सोमवार को छिटपुट विरोध प्रदर्शनों को छोड़कर मस्जिदों में ईद-उल-अजहा की नमाज शांतिपूर्ण संपन्न हुई, लेकिन कर्फ्यू जैसे प्रतिबंध लगे होने के कारण सड़कों से त्योहार की रौनक गायब रही। प्रशासन का दावा है कि लोगों की सहूलियत के लिए व्यापक इंतजाम किए थे। इस मौके पर घाटी में प्रतिबंधों में थोड़ी छूट दी गई थी, ताकि लोग त्योहार के लिए खरीदारी कर सकें। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार जम्मू-कश्मीर में लोग नमाज अदा करने के लिए बड़ी संख्या में बाहर निकले। प्रशासन ने एक बयान में कहा कि श्रीनगर में आतंकवादियों और असामाजिक तत्वों द्वारा शांति व्यवस्था को बाधित करने की आशंका को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील इलाकों में जरूरी प्रतिबंध लगाए गए। स्थानीय मस्जिदों में बड़ी संख्या में लोग नमाज अदा करने पहुंचे। बांदीपोरा में (दार उल उलूम रहिमिया 5000, जामिया मस्जिद 2000), बारामूला (10,000), कुपवाड़ा (ईदगाह 3500), सोपोर (1500), कुलगाम (काजीगुंड 5500, कैमोह 6000), शोपियां (3000), पुलवामा (1800), अवंतीपोरा (2500), अनंतनाग (अचबल 3000), गंदेरबल (7000 से अधिक), बडगाम (चरार-ए-शरीफ 5000, मगाम 8000) और श्रीनगर की स्थानीय मस्जिदों में सैकड़ों लोग एकत्र हुए। प्रधान सचिव और जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल के आधिकारिक प्रवक्ता रोहित कंसल ने कहा, ‘‘‘‘राज्य की मस्जिदों में ईद की नमाज शांतिपूर्ण ढंग से बीत गई। तीन छिटपुट प्रदर्शन हुए, लेकिन कोई घायल नहीं हुआ।’’ प्रशासन ने किसी गोलीबारी की घटना से इंकार किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार हजारों लोगों ने नमाज अदा की। प्रवक्ता ने ट्वीट किया, ‘‘‘‘अनंतनाग, बारामूला, बडगाम, बांदीपुर में बिना किसी अप्रिय घटना के सभी मस्जिदों में शांतिपूर्ण ढंग से ईद-उल-अजहा की नमाज अदा की गई। बारामूला के जामिया मस्जिद में करीब 10,000 लोगों ने नमाज अदा की।’’ प्रवक्ता ने कहा कि जम्मू के ईदगाह में 4,500 से अधिक लोगों ने नमाज अदा की। जम्मू संभाग के संवेदनशील किश्तवाड़, डोडा, रामबन, पुंछ और राजौरी जिले में ईद की नमाज शांतिपूर्ण संपन्न हो गई। अधिकारी ने बताया कि जिला प्रशासन लगातार जम्मू-कश्मीर में स्थिति की समीक्षा कर रहा है। साथ ही यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि प्रतिबंधों से लोगों को कम से कम परेशानी हो। जम्मू-कश्मीर में शांति कायम रखना और किसी भी अप्रिय घटना को रोकना सरकार की प्राथमिकता है। जम्मू के ईदगाह में नमाज अदा करने वाले इमाम दीन ने कहा कि उन्हें अनुच्छेद 370 की परवाह नहीं है, लेकिन वह चाहते हैं कि पाबंदियां समाप्त हों ताकि वह अपने परिवार से बातचीत कर सकें। कश्मीर के विद्यार्थी खुर्शीद डार की भी यही भावना थी।

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