अर्थव्यवस्था को ताकत दे सकते हैं निफ्ट के छात्र :राज्यपाल

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PATNA SK M HALL MEIN NIFT(NATIONAL INSTITUTE OF FASHION TECHNOLOGY) KE DIKSHANT SAMAROH MEIN RAJPAL SATAYAPAL MALLICK AND OTHER

पटना। प्रदेश के राज्यपाल सत्यपाल मल्लिक ने कहा कि ‘‘ नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी, पटना लगातार विगत कुछ वर्षो से देश के शीर्ष 10 फैशन संस्थानों में शुमार होते आ रहा है, यह गौरव की बात है। ‘‘ निफ्ट’ से डिग्री हासिल कर निश्चय ही यहां के विद्यार्थी फैशन और डिजाइन की दुनिया में भी बेहतर सृजनात्मक काम करेंगे, जिससे दुनिया में बिहार और भारत का नाम रोशन होगा। उन्होंने ये बातें स्थानीय श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में ‘‘ निफ्ट’, पटना के दीक्षांत समारोह 2018 को संबोधित करते हुए कहीं। राज्यपाल ने कहा कि ‘‘ मेक इन इंडिया’ की भांति ‘‘क्रियेट इन इंडिया’ की चुनौती को स्वीकार करते हुए ‘‘निफ्ट’ के विद्यार्थी जब फैशन और डिजाइन की दुनिया में भी कीतिमान रचें तो इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को भी ताकत मिलेगी।उन्होंने कहा कि ‘‘बाबरनामा’ में बाबर ने भारतवर्ष की तमाम कमियों की ओर इशारा करने के बावजूद, यहां की ‘‘कारीगरी’ की दिल खोलकर प्रशंसा की है। इससे साबित होता है कि हम शुरू से ही फैशन और डिजाइन की दुनिया में अत्यन्त उत्कृष्ट रहे हैं। उन्होेंने कहा कि मेरठ के एक दर्जी ने बुलावे पर इंग्लैंड जाकर महारानी विक्टोरिया व उनके पारिवारिक सदस्यों के कपड़ों की उत्कृष्ट सिलाई कर बख्शीश प्राप्त की थी तथा उसे मेरठ में नि:शुल्क दुकान मिली थी। बाद में उसकी दुकान वाला मुहल्ला ही ‘‘दर्जी का मुहल्ले’ के रूप में विख्यात हुआ। राज्यपाल श्री मलिक ने कहा, कारीगरी तथा डिजाइनिंग को हर युग में सम्मान मिलता रहा है। उन्होंने ‘‘अशोक स्तंभ’ का भी इसी क्रम में उदाहरण दिया। राज्यपाल ने कहा कि बड़े डिजाइनर अपने नाम और प्रसिद्धि के बाद, कई छोटे कलाकारों और डिजाइनरों की कृतियों को लेकर उनकी ब्रांडिंग कर देते हैं तथा इसके बदले उन सहयोगियों को काफी कम राशि थमाकर उन्हें संतुष्ट करने का प्रयास करते हैं। यह प्रवृत्ति उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि कम मशहूर किन्तु कारीगरी में बेहतर हुनर रखने वाले कलाकारों को पूरी संवेदनशीलता के साथ उनके हुनर का पुरस्कार दिया जाना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि प्राचीन युग में हमारे देश में बिना सिले-सिलाये कपड़े भी लोग सुरुचिपू़र्ण ढंग से पहन लेते थे और सुदर्शन दीखते थे। उन्होंने कहा कि पटना संग्रहालय की यक्षिणी या अन्य कई कलाकृतियों को देखकर इस तय को समझा जा सकता है। उन्होंने कहा कि ‘‘जीन्स’ पहले श्रमिक वर्ग का परिधान था, फिर बाद में यह विद्रोही समाज का परिधान माना जाने लगा और अब इसे हर समाज और उम्र के लोग अपना चुके हैं। इससे स्पष्ट है कि हर युग में फैशन और डिजाइन की दुनिया तथा सौन्दर्य बोध में भी परिवर्त्तन होते रहते हैं। दीक्षान्त समारोह में ‘‘निफ्ट’, पटना के निदेशक प्रो संजय श्रीवास्तव ने अकादमिक प्रति-प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। राज्यपाल ने सफल छात्रों में डिग्री का भी वितरण किया।

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