अरुण जेटली के बहाने PM नरेंद्र मोदी पर क्यों हमले कर रहे हैं यशवंत सिन्हा

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नरेंद्र मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर अब भीतर से ही हमला शुरू हो गया है. अटल सरकार में वित्तमंत्री रहे बीजेपी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने कहा कि अर्थव्यवस्था की जो हालत है, उसमें चुप रहना देश के लिए ख़तरनाक होगा. उन्होंने कहा कि अरुण जेटली लोगों को क़रीब से गरीबी दिखाने पर तुले हैं. “अब अगर मैं चुप रहा तो देशहित के ख़िलाफ़ होगा”, इस ऐलान के साथ पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने बुधवार को इंडियन एक्सप्रेस में एक लेख लिखकर सरकार के आर्थिक इंतज़ामों की धज्जियां उड़ा दीं. उन्होंने लिखा- वित्त मंत्री ने अर्थव्यवस्था तहस-नहस कर दी है. वे एक मायने में सबसे ख़ुशक़िस्मत वित्त मंत्री थे. तेल के अंतरराष्ट्रीय दाम गिरने से लाखों करोड़ रुपये उन्हें मिले लेकिन इससे हासिल मौक़ा उन्होंने गवां दिया आज निजी निवेश दो दशकों में सबसे ज़्यादा सिकुड़ा हुआ है.

औद्योगिक उत्पादन ढहने के कगार पर है. खेती बुरी तरह दबाव में है. कंस्ट्रक्शन उद्योग की हालत ख़राब है जहां से खासा रोज़गार निकलता है. नोटबंदी घट रही आर्थिक तबाही साबित हुई है. बुरी तरह से लागू हुई जीएसटी ने कारोबारियों को तबाह कर दिया है और लाखों को बेरोजगार कर दिया है. तीन साल में जीडीपी सबसे निचले 5.7 फ़ीसदी के स्तर पर है. जी़डीपी का ये हिसाब 2015 में बदले हुए पैमानों पर है. पुराने पैमानों पर जीडीपी में बढ़ोतरी 3.7 फ़ीसदी रह गई है.

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यशवंत सिन्हा के यहीं नहीं रुके. तंज कसते हुए उन्होंने ये भी कह दिया कि प्रधानमंत्री कहते हैं, उन्होंने गरीबी देखी है, वित्त मंत्री कुछ और क़रीब से गरीबी दिखाने पर आमादा हैं. अपने एक दिग्गज नेता के इस हमले से सकपकाई बीजेपी का कोई नेता दोपहर तक कुछ बोल नहीं सका. आधिकारिक तौर पर पार्टी ने यशवंत सिन्हा के लेख पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, लेकिन पार्टी सूत्रों से सफ़ाइयां आती रहीं. उनके मुताबिक लेख में कई दावे ग़लत हैं. मोदी सरकार ख़स्ताहाल अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाई तीन साल में अर्थव्यवस्था सुधरी है. एक तिमाही के आधार पर पूरी जीडीपी पर सवाल उठाना गलत है.

नोटबंदी और जीएसटी से दीर्घकालीन फायदे होंगे. यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी जैसे नेताओं की हताशा दिख रही है. इधर सोशल मीडिया पर यशवंत सिन्हा की लगाई हुई आग बिल्कुल वायरल होती नज़र आई. विपक्ष ने चुटकी लेने में देर नहीं की. राहुल गांधी ने ट्वीट किया, “देवियों और सज्जनों, मैं आपका कोपायलट और वित्त मंत्री बोल रहा हूं. कृपया अपने सीट की पेटी कस लें और सावधान हो जाएं. विमान के डैने उखड़ चुके हैं”. वैसे यशवंत सिन्हा के इस लेख से पहले सरकार को अर्थव्यवस्था की चुनौतियों का अंदाज़ा लगता दिख रहा है. दो दिन पहले ही सरकार ने पांच लोगों की आर्थिक सलाहकार समिति भी बना डाली. कभी हार्वर्ड का मज़ाक उड़ाने वाले प्रधानमंत्री के सलाहकारों की इस मंडली में कैंब्रिज के पढ़े और सिंगापुर में पढ़ाने वाले शामिल हैं.

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इस समिति में बिबेक देबरॉय अध्यक्ष हैं जो  नीति आयोग के भी सदस्य हैं, ट्रिनिटी कॉलेज कैंब्रिज से पढ़े हैं, सिंगापुर यूनिवर्सिटी में पढ़ाते रहे हैं और सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च में प्रोफ़ेसर रहे हैं. दूसरे सदस्य रतन वाटल नीति आयोग के मुख्य सलाहकार रहे हैं, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में काम किया, पूर्व वित्त सचिव रहे हैं और आंध्र कैडर के आइएएस हैं. तीसरे सदस्य डॉ सुरजीत भल्ला दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में पढ़ाते रहे हैं, वो वर्ल्ड बैंक, रैंड कारपोरेशन, गोल्डमैन साक्स और डाउचे बैंक जैसी संस्थाओं में काम कर चुके हैं. चौथे सदस्य डॉ रथिन रॉय ने सेंट स्टीफेंस और जेएनयू मे पढाई के बाद कैंब्रिज से पीएचडी की है, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस ऐंड पॉलिसी में प्रोफ़ेसर रहे हैं, कई सरकारी कमेटियों में रहे हैं, कई देशों में आर्थिक डिप्लोमैट रहे हैं और डॉ आशिमा गोयल येल यूनिवर्सिटी में  विज़िटिंग फेलो हैं, इंदिरा गांधी रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट में प्रोफेसर हैं, कई कमेटियों में रह चुकी हैं और कई किताबें लिख चुकी हैं. यशवंत सिन्हा ने अपने लेख में इन पांचों को पांच पांडवों की संज्ञा दी है और कहा है कि अब यही लोग मोदी सरकार का महाभारत लड़ेंगे.

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