अररिया उपचुनाव विशेष ………

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Patna-Feb.10,2018-JDU MLA Sarfaraz Alam is joining RJD party in presence of RJD leader Shivanand Tiwari during Milan Samaroh at party office in Patna.

बिहार के अररिया जिले लोकसभा व कैमूर व जहानाबाद जिले के दो विधानसभा क्षेत्र के लिए उपचुनाव की घोषणा हो चुकी है ! इन तीनों सीटों पर 11 मार्च को मतदान होगा जबकि 14 मार्च को मतगणना होगी। जानकारी के मुताबिक 13 फरवरी से नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो जायेगी .

अररिया लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में छह विधानसभा क्षेत्रों को शामिल करके अररिया लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का निर्माण किया गया है! इस लोकसभा क्षेत्र की आबादी 15,87, 348 है, 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में 9,75,811 लोगों ने अपने मतों का प्रयोग किया था यानी यह कह सकते हैं कि लगभग 61 परसेंट लोगों ने अपने मतों का प्रयोग किया था!

2014 के लोकसभा चुनाव को मोदी लहर के नाम से इतिहास में याद रखा जा सकता है, इस मोदी लहर में किसको कितना वोट मिला था

मरहूम तस्लीमुद्दीन (राजद) – 4,07,978
प्रदीप कुमार सिंह (भाजपा) – 2,61, 474
विजय कुमार मंडल (जदयू) – 2,21,769
अब्दुल रहमान (बीएसपी) – 17, 724
श्री तस्लीमुद्दीन ने मोदी लहर में 41.81 प्रतिशत वोटों के साथ विजय प्राप्त किया था जबकि श्री प्रदीप कुमार सिंह को 26.80 प्रतिशत मिला था! इस लोकसभा क्षेत्र का स्थापना 1962 में हुआ था, इस लोकसभा सीट पर पहली बार मुस्लिम उम्मीदवार के रूप में श्री तस्लीमुद्दीन ने जीता था! वोटों के प्रतिशत से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि श्री तस्लीमुद्दीन हिंदू और मुस्लिम भाईचारा का प्रतीक थे !

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सीमांचल के सबसे बड़े नेता और सीमांचल गांधी के नाम से मशहूर मोहम्मद तस्लीमुद्दीन के निधन से अररिया लोक सभा का सीट खाली हो गया था ! उपचुनाव को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो चुका है!

श्री तस्लीमुद्दीन के पुत्र सरफराज आलम अपने पिता का पार्टी राष्ट्रीय जनता दल में शामिल हो चुके हैं अब हंड्रेड परसेंट उम्मीद है कि वह राजद के टिकट से ही अररिया का चुनाव लड़ेंगे ! भारतीय जनता पार्टी के तरफ से अभी पता नहीं खोला गया है किसको टिकट मिलेगा अभी कुछ तय नहीं है !

लगभग यह तय हो गया कि जदयू का कोई उम्मीदवार अररिया उपचुनाव में नहीं आएगा क्योंकि सरफराज आलम इसी वजह से उसकी पार्टी को छोड़ चुके हैं ऐसा राजनीतिक पंडित मानते हैं ! अगर सरफराज आलम को जदयू से टिकट मिलता तो इसका मतलब यह होता कि भाजपा का कोई उम्मीदवार नहीं होता ऐसे में चुनाव एकतरफा होता !

श्री आलम मीडिया में कह रहे हैं कि मेरी मां और सीमांचल की जनता ने राजद में शामिल होने के लिए मेरे ऊपर दबाव बनाया इसलिए सेकुलरिज्म को मजबूत करने के लिए राजद का दामन थाम लिया !

उपचुनाव काफी पेचीदा होने की उम्मीद है

जदयू हाल के दिनों में बीजेपी के साथ शामिल हुआ है और पहले से भी यह सीट बीजेपी के खाते में रहा है ! बीजेपी के पास आधार यह है कि अररिया लोकसभा क्षेत्र में उनके तीन विधायक जीते हैं और उनका प्रदीप कुमार सिंह 2014 के इलेक्शन में दूसरा स्थान प्राप्त किया था ! जबकि जदयू के पास आधार यह है कि श्री तस्लीमुद्दीन के बेटे हैं श्री सरफराज आलम और जदयू के विधायक हैं ! श्री तस्लीमुद्दीन राजद के सांसद थे !

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भाजपा मुस्लिम उम्मीदवार को दे सकता है टिकट

नई भाजपा हर सीट को जीतने की कोशिश करता है चाहे उसके लिए उसे कोई भी रणनीतिक बदलाव करना क्यों ना पड़े! इन दिनों चर्चाओं का बाजार गर्म है कि किशनगंज के पूर्व सांसद सैयद शाहनवाज को भी अररिया से चुनाव लगाया जा सकता है ! लेकिन अररिया का इतिहास रहा है कि यहां के स्थानीय लोग ही इस संसदीय क्षेत्र में सांसद बन सके हैं !

क्या क्या समीकरण हो सकते है …

तस्लीमुद्दीन

स्वर्गीय तस्लीमुद्दीन का नाम इस इलाके के लिए काफी पुराना है, सीमांचल गांधी के नाम से भी मशहूर रहे हैं ! भारत के उप चुनाव में अक्सर देखा गया है कि निधन के बाद, सांसद के पुत्र या पत्नी चुनाव जीत जाते हैं ! सहानुभूति वोटों का भी एक बहुत बड़ा फेेैक्टर होगा !

फैक्टर – 2 मोदी

भारत में मोदी ब्रांड को भी किसी भी चुनाव में नकारा नहीं जा सकता, क्योंकि जब भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी चुनाव सभा को संबोधित करते हैं तो विपक्षियों का पसीना छुटा देते हैं ! इस लोकसभा क्षेत्र में 6 विधानसभा क्षेत्र हैं जिनमें जदयू – बीजेपी गठबंधन के पास 4 सीटों पर उनके उम्मीदवारों ने चुनाव जीता हुआ है !

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फैक्टर – 3 MY – समीकरण

MY – समीकरण यानि कि मुस्लिम-यादव समीकरण, जनसंख्या के लिहाज से सबसे ज्यादा है ! यह समीकरण लालू प्रसाद यादव के द्वारा बनाया गया है जो उसके लिए जीत का मंत्र साबित हुआ है !

फैक्टर – 4 हिंदुत्व

हाल के दिनों में भी सांप्रदायिक तनाव का माहौल इन क्षेत्रों में रहा था, लेकिन स्थानीय प्रशासन एवं लोगों के द्वारा इसका समाधान निकाल लिया गया था ! लोगों का मानना है कि इस फैक्टर को दरकिनार नहीं कर सकते हैं !

फैक्टर – 5 वोटों का बंटवारा

राकेश कुमार बताते हैं कि अगर वोटों का बंटवारा होता है खास करके अल्पसंख्यक में तो इसका सीधा फायदा बीजेपी को होगा जबकि हिंदुओं में अगर वोटों का बंटवारा होता है तो इसका सीधा फायदा इसके विपक्षी पार्टी को होगा !

फैक्टर – 6 विकास

चूंकि अररिया पूरे भारत का सबसे गरीब जिला है और विकास में सबसे पीछे रहा है ! पर कैपिटा इनकम यानी प्रत्येक व्यक्ति का सालाना कमाई भी पूरे भारत में सबसे कम अररिया जिले का है ! अब अररिया के लोगों को विकास चाहिए, यह भी एक चुनावी मुद्दा हो सकता है !

जो भी उम्मीदवार इन में से ज्यादा फैक्टरों को अपने पक्ष में करेगा उसे चुनाव में जीत मिल सकती है ! यह तो आने वाले समय में ही पता चल पाएगा कि अररिया का अगला सांसद कौन होगा !

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