अयोध्या केस में अब आगे क्या होगा? संविधान पीठ के सभी जज आज मिलकर करेंगे चर्चा

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सदियों पुराने अयोध्या के रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद की सुनवाई पूरी हो गई है. पिछले चालीस दिनों से सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की रोजाना सुनवाई हो रही थी, हिंदू-मुस्लिम पक्षकारों की ओर से लगातार दलीलें दी गईं, अदालत में तीखी बहस भी हुई. बुधवार को शाम 5 बजे इस मामले की बहस खत्म हुई और सर्वोच्च अदालत ने अपना फैसला रिजर्व रख लिया. अब हर किसी की नज़र सिर्फ इस मामले के फैसले पर है. आज संविधान पीठ के सभी जज एक साथ सात नंबर चैंबर में बैठेंगे और अबतक की हुई दलीलों पर चर्चा करेंगे.

सुप्रीम कोर्ट में अब क्या होगा?
बुधवार को इस मामले पर बहस खत्म हुई तो सर्वोच्च अदालत की ओर से सभी पक्षों को मोल्डिंग ऑफ रिलीफ के लिए तीन दिन का समय दिया गया. अगले तीन दिन में पक्षकारों को लिखित हलफनामा अदालत में सबमिट करना होगा. इसके साथ ही मामले की सुनवाई करने वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ मुद्दों पर विचार करने के लिए गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट चैंबर में बैठेगी और मामले पर विचार करेगी.

इस बीच मध्यस्थता पैनल की रिपोर्ट पर भी संविधान पीठ चर्चा करेगा। बता दें कि चालिस दिन की लगातार सुनवाई को बाद इस मामले में मध्यस्थता पैनल ने भी एक रिपोर्ट दाखिल की है.इस रिपोर्ट में क्या है इसकी पूरी जानकारी तो सामने नहीं आई है लेकिन कहा जा रहा है कि फैसले से पहले सुन्नी वक्फ बोर्ड और हिंदू पक्ष किसी ठोस नतीजे पर पहुंचे हैं. मध्यस्थता पैनल की इस रिपोर्ट पर भी संविधान पीठ के जज आपस में चर्चा करेंगे. जानकारी मिली है कि सुन्नी वक्फ बोर्ड ने अयोध्या मामले में मीडिएशन पैनल के सामने एक प्रपोजल सबमिट किया है. इस प्रपोजल के मुताबिक बोर्ड विवादित ज़मीन पर अपना दावा छोड़ने को तैयार है लेकिन इसके लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड ने तीन शर्तों को सामने रखा है.
तो क्या मान लिया जाए कि सुन्नी वक्फ बोर्ड विवादित जमीन पर दावा छोड़ने को तैयार है? सुन्नी वक्फ बोर्ड ने जो शर्ते रखी हैं उसमें धार्मिक स्थल अधिनियम 1991 की रिपोर्ट को लागू करने की बात कही गई है. धार्मिक स्थल अधिनियम 1991 में ये व्यवस्था है कि देशभर में अयोध्या को छोड़कर जो बाकी विवादित धर्म स्थल हैं वहां यथास्थिति बनाई रखी जाएगी, आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया यानी एएसआई के कंट्रोल वाली मस्जिदों में नमाज़ पढ़ने की मंजूरी दी जाए और तीसरी शर्त है कि अयोध्या में सभी मस्जिदों की मरम्मत कराई जाए और उन मस्जिदों में भी नमाज़ पढ़ने दी जाए जहां अभी नमाज नहीं होती है. चर्चा तो ये भी है कि सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से अदालत में टाइटल सूट वापस लेने की भी अर्जी दी जा सकती है. हालांकि इस पर अबतक कुछ भी साफ नहीं हुआ है. कल की सुनवाई के बाद मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के जफरयाब जिलानी ने साफ कहा कि इस तरह के किसी प्रस्ताव की उन्हें कोई जानकारी नहीं है.
इस बीच सुनवाई खत्म होने के बाद सुप्रीम कोर्ट से एक दिलचस्प तस्वीर सामने आई। कोर्ट में एक-दूसरे की दलीलों को काटने वाले वकील गले में हाथ डाले एक साथ नजर आए. सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील राजीव धवन और रामलला विराजमान के वकील के परासरन ने सुनवाई पूरी होने के बाद एक साथ तस्वीर खिंचवाई.

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एक महीने में रिटायर होंगे चीफ जस्टिस

इस मामले की सुनवाई संविधान पीठ कर रही है, जिसकी अगुवाई चीफ जस्टिस रंजन गोगोई कर रहे हैं. चीफ जस्टिस अगले महीने की 17 तारीख यानी 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं. ऐसे में वकीलों को उम्मीद है कि उनके रिटायरमेंट से पहले इस मामले में फैसला आ जाएगा. इससे पहले खुद चीफ जस्टिस भी कह चुके हैं कि इस मामले की सुनवाई वह 18 अक्टूबर से पहले खत्म करना चाहते हैं, क्योंकि एक महीना फैसला लिखने के लिए भी चाहिए. अगर ऐसा नहीं होता है, तो फैसला आने में लंबा समय लग सकता है.

फैसला रिजर्व होने से फैसला आने तक का सफर

अक्सर लोगों के दिमाग में ये बात रहती है कि फैसला रिजर्व होने के बाद क्यों एक महीना लग रहा है. लेकिन फैसला लिखे जाने में काफी समय व्यतीत होता है, क्योंकि इसके लिए एक लंबी रिसर्च जरूरी होती है. फैसले के दौरान पुराने और ऐतिहासिक जजमेंट का उदाहरण दिया जाता है, शेर-शायरी, कविताएं, श्लोक आदि भी जजमेंट का हिस्सा होते आए हैं. अयोध्या मामले के मूल दस्तावेज़ भी करीब 30 हजार पेज से ज्यादा हैं.

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सुनवाई के आखिरी दिन हुई तीखी बहस
सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को इस मामले की आखिरी सुनवाई हुई और सभी पक्षों ने अपनी अंतिम दलीलें दीं. सुबह में हिंदू पक्षकारों ने अपनी दलीलें खत्म की और उसके बाद सबसे आखिरी दलील मुस्लिम पक्ष की ओर से राजीव धवन ने दलील दी. हिंदू पक्षकारों की तरफ से ऐतिहासिक ग्रंथों, भावनाओं और ASI की रिपोर्ट का हवाला दिया और विवादित ज़मीन पर अपना हक जताया.

दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष की ओर से राजीव धवन ने हिंदू पक्षकारों की दलीलों को गलत बताया और हर एक दलील का तीखा जवाब दिया. बुधवार को ही सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान माहौल इतना गर्म था कि राजीव धवन ने अदालत में हिंदू पक्षकार की ओर से पेश किया गया नक्शा ही फाड़ दिया. हालांकि, बाद में उन्होंने अदालत में ही कहा कि नक्शा उन्होंने चीफ जस्टिस की हामी के बाद ही फाड़ा था.

मध्यस्थता फेल होने के बाद शुरू हुई थी रोजाना सुनवाई
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से इस ऐतिहासिक मामले में पहले मध्यस्थता का रास्ता अपनाने को कहा गया था, लेकिन ये सफल नहीं हो सका था. इसी के बाद 6 अगस्त से सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की रोजाना सुनवाई चल रही है, अदालत ने हफ्ते में पांच दिन इस मामले को सुना. आखिरी कुछ दिनों में सुनवाई का वक्त एक घंटे के लिए बढ़ा दिया गया था.

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इस मामले को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के अलावा संविधान पीठ में जस्टिस एस.ए. बोबड़े, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एसए नज़ीर भी शामिल हैं.

 

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