अमित शाह के आगमन पर राजनीति गरमाई

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file photo

 

पटना – भाजपा अध्यक्ष अमित शाह अपने एक दिवसीय दौरे पर गुरुवार को पटना पहुंच रहे हैं। उनके दौरे को लेकर बिहार विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष और राजद के युवा नेता तेजस्वी यादव ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बाद अमित शाह बिहार आ रहे हैं। कुछ दिनों के बाद इसके साइड इफेक्ट्स दिखेंगे। तेजस्वी यादव ने ट्वीट करते हुए अमित शाह के दौरे पर हमला बोला है। बिहार दौरे के दौरान अमित शाह की मुलाकात बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ भी होगी। दोनों नेता एक दिन में दो बार मिलेंगे। पहले तो अमित शाह और नीतीश कुमार की मुलाकात नाश्ते के दौरान होगी, फिर रात में मुख्यमंत्री आवास पर दोनों डिनर साथ करेंगे। बिहार के राजनीतिक गलियारे में कायस लगाये जा रहे हैं कि दोनों के बीच लोकसभा चुनाव को लेकर सीट शेयरिंग पर भी बात होगी। दोनों नेता सीट शेयरिंग का फॉमरूला तय कर सकते हैं। 

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह कल बिहार आ रहे हैं। उनके बिहार दौरे से पूर्व ही युवा कांग्रेस ने उनके लिए सवालों की फेहरिस्त जारी कर दी है। युवा कांग्रेस अध्यक्ष कुमार आशीष ने कहा कि बिहार की जनता और विशेषकर छात्र-युवा वर्ग को जिस तरह से मोदी-शाह की टीम ने छल-कपट का बर्ताव किया है वो कभी मंजूर नहीं है। बिहार आने से पहले अमित शाह को इन सवालों का जवाब देना होगा नहीं तो कल पटना की सड़कों पर उनका प्रतिकार होना तय है। बिहार के विशेष राज्य दर्जा का क्या हुआ। बिहार के किस शहर में बना एजुकेशन हब। नोटबंदी के दौरान कितने करोड़ का घपला शाह जी की टोली ने किया। जय शाह के खाते में धन की बेतहाशा वृद्धि कैसे हुई। जस्टिस लोया को किसने मारा। बिटकॉइन घोटाले का कितना माल आपने खाया। बिहार के शिक्षा बजट में इतनी कटौती क्यों। इतने सैनिक सीमा पर शहीद क्यों हो रहे। प्रतिवर्ष 2 करोड़ युवाओं को रोजगार देने वाले ने करोड़ों युवाओं को बेरोजगार किया। कितने नये युवाओं को रोजगार मिला। राज्य में डबल इंजन की सरकार होने के बावजूद विकास कायरे में बाधा क्यों। श्री आशीष ने कहा कि इन सवालों का बिन्दुवार जवाब बिहार की जनता को दीजिये तब ही बिहार में पांव रखिये। अमित शाह जी, झूठे वादों से युवा वर्ग ऊब चुका है।

राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने कहा कि भाजपा गठबंधन के मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश जी की अमित शाह से यह पहली मुलाकात होगी। विधानसभा के पिछले चुनाव में नीतीश जी महागठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री के चेहरा थे। अमित शाह उस चुनावी अभियान में बिहार के लोगों को चेता रहे थे कि नीतीश अगर मुख्यमंत्री बनेंगे तो पाकिस्तान में दिवाली मनेगी। इसलिए पहली मुलाकात में पुरानी बात की याद से थोड़ी झेंप तो होगी। लेकिन दोनों की बातचीत का असली पेच तो बड़े भाई का दर्जा का है। बिहार में चेहरा किसका बड़ा होगा ! नीतीश कुमार का या नरेंद्र मोदी का ! बड़ा भाई कौन है, या किसका चेहरा बड़ा है, इसकी कसौटी क्या होगी? स्वाभाविक है कि आगामी चुनावों में जो ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ेगा बिहार की जनता उसे ही बड़े भाई का दर्जा देगी। क्या भाजपा के लिए यह संभव है। सहज बुद्धि तो कहती है कि यह नामुमकिन है। तब नीतीश कुमार क्या रुख अपनायेंगे यह देखना दिलचस्प होगा।

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