अपराध के मामले में बिहार 22वें स्थान पर : मुख्यमंत्री

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को बिहार विधान सभा में कहा कि देश के अन्य राज्यों की तुलना में बिहार में बहुत कम अपराध हुए हैं। अपराध के मामले में बिहार 22वें स्थान पर है। अपराध नियंतण्रके लिए राज्य सरकार लगातार समीक्षा करते रहती है। हम निरंतर प्रयास करते हैं, लेकिन यह दावा नहीं कर सकते हैं कि घटना नहीं होगी। आज सोशल मीडिया का समाज में बहुत ज्यादा प्रभाव हो गया है। सोशल मीडिया समाज में तनाव पैदा कर रहा है। पांच से ज्यादा व्यक्ति अगर मिलकर किसी घटना को अंजाम देते हैं तो वह सामान्य दंगा है। दो समुदाय आपस में भिड़ गए तो वह दंगा नहीं है। फिरौती, नक्सली एवं बलात्कार की घटनाओं में कमी आयी है। उन्होंने कहा कि हत्या की घटनाओं का सबसे बड़ा कारण भूमि और सम्पत्ति विवाद है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा वर्ष 2016 के जारी आंकड़ों के अनुसार, प्रतिवेदित अपराध दर के आधार पर बनाए गए राज्यों की सूची में बिहार का स्थान 22वां है। उन्होंने बताया कि हत्या के मामले में बिहार 17वें, डकैती में 15वें, लूट में 12वें, बलात्कार में 34वें, अपहरण एवं फिरौती में 23वें और महिलाओं के खिलाफ ¨हसा के मामले में 19वें स्थान पर है। किसी भी परिस्थिति में अपराध, भ्रष्टाचार और सांम्प्रदायिकता से समझौता नहीं किया जाएगा। यह सच है कि ठोस कदम उठाए जाने के बावजूद अपराध की घटनाएं हुई हैं, लेकिन यह भी सच है कि कोई भी सरकार अपराध को शून्य पर लाने का दावा नहीं कर सकती।’ मुख्यमंत्री ने कहा कि भूमि एवं संपत्ति विवाद के कारण सबसे ज्यादा घटनाएं होती हैं। हत्या की घटनाओं में 60 प्रतिशत भूमि विवाद के कारण होती हैं। भूमि विवाद निपटाने के लिए सरकार ने सीओ एवं थानेदार को जिम्मेवारी दी है। सप्ताह में एक दिन थानेदार एवं सीओ एक साथ बैठक कर भूमि विवाद का निपटारा करें। अगर कहीं पर सीओ एवं थानेदार हर सप्ताह बैठक नहीं करते हैं तो मुझे और मेरे कार्यालय को सूचना दें, तत्काल कार्रवाई होगी। सीओ एवं थानेदार की बैठक का पर्यवेक्षण एसडीओ एवं डीएसपी करेंगे और जिलाधिकारी पूरे मामले की मोनेटरिंग करेंगे। भूमि विवाद का निपटारा होते ही अत्या एवं अपराध की घटनाओं में कमी आएगी। भूमि विवाद निपटाने के लिए , सीओ एवं थानेदार की बैठक हर सप्ताह होती है। पहले पारिवारिक बंटवारा नहीं होता था, जिसके कारण विवाद होता था। हमने तय किया कि 100 रुपये में पारिवारिक बंटवारा हो जाएगा। पहले ज्यादा पैसा लगता था, जिसके कारण बंटवारा नहीं होता था। जमीन का एरियल सव्रे हो गया है, अब जमीनी सव्रे हो रहा है। राज्य में विधि-व्यवस्था को और चुस्त-दुरुस्त बनाए रखने के लिए सरकार ने पुलिस विभाग की संरचना में बदलाव किया है। उन्होंने बताया कि पुलिस मुख्यालय और जिलों में पुलिस अधीक्षक के बीच सिर्फ एक स्तरीय पुलिस तंत्र काम करेगा । वर्तमान में पुलिस अधीक्षक और पुलिस मुख्यालय के बीच रेंज और जोन स्तर पर पुलिस अधिकारी और पुलिस बल तैनात रहते हैं। उन्होंने कहा कि जोन स्तर को अब समाप्त कर दिया गया है और 12 रेंज हीं कार्य करेंगे । इसमें पुलिस महानिरीक्षक या उप महानिरीक्षक स्तर के अधिकारी होंगे। ये पुलिस अधीक्षक और मुख्यालय के बीच कोऑर्डिनेटर होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस वालों के लिए जितना हो सकता था हमने किया। पुलिस भवन बनाया, जिसकी छत पर हेलिकॉप्टर उतर सकता है। हम तो पुलिस वालों को सब चीज दे रहे हैं। अब तो पुलिस की भी जवाबदेही है कि वह जनता की सुरक्षा करे। अब पुलिस वाला कोई गड़बड़ी करेगा तो छोड़ेंगे नहीं। अपराध नियंतण्रके लिए 15 अगस्त तक विधि व्यवस्था एवं अनुसंधान के लिए अलग-अलग थानेदार होंगे। एक थाना प्रभारी के अंदर दो थानेदार होंगे। कम से कम दो साल तक थानेदार को अनुंसधान कार्य में रहना होगा। अपराध की प्रवृत्ति को समाप्त करना होगा। रीजनल ट्रेनिंग सेंटर में एक बार आठ हजार पुलिस वालों को प्रशिक्षण मिलेगा। 43 हजार पुलिस की बहाली हुई है। पुलिस बल में हमेशा युवा रहें, इसलिए नियमित रूप से पुलिस की बहाली हो रही है। नव नयुक्त सिपाही में 11 हजार महिलाएं हैं। लोगों के एकाउंट से पैसे गायब हो जा रहे हैं । साइबर अपराध को रोकने के लिए सरकार द्वारा स्टेट साइबर लेबोरेटरी सेंटर बनाया जा रहा है। हर जिले में साइबर क्राइम सेंटर बनेगा । पटना जिला में हर जगह सीसीटीवी लगाकार अपराध नियंतण्रका प्रयास किया जाएगा । पांच जांच में से किसी भी एक जांच में दोषी पाये जाने वाले पदाधिकारी को दस साल तक नहीं मिलेगी थानेदारी। राज्य सरकार ने पुलिस जोन को समाप्त कर दिया है। अब पुलिस मुख्यालय एवं एसपी के बीच में केवल 12 रेंज होंगे, पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, गया और पूर्णिया में पुलिस महानिरीक्षक जबकि बेतिया, सारण, सहरसा, मुंगेर, शाहाबाद, बेगूसराय में पुलिस उप महानिरीक्षक होंगे। जिस थाना में महिला सिपाही के लिए अलग से शौचालय व स्नानघर नहीं होगा, वहां महिला सिपाही की पोस्टिंग नहीं होगी। सभी थानों को कम्पयूटर नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है। सभी पुलिस थानों की हाजत में बंद कैदी के साथ मानवाधिकार का उल्लंघन नहीं हो, उसके लिए सभी थानों की हाजत में सीसीटीवी लगाए जाएंगे। सीसीटीवी के लिए 282 करोड़ रुपये दिया गया है। अपराध नियंतण्र के लिए 43 पुलिस अनुमंडल में अपर पुलिस अनुमंडल पदाधिकारी की तैनाती होगी। पुलिस गश्ती को तेजी करना होगा, इसके लिए सभी पुलिस गाड़ियों में जीपीएस लगाया जा रहा है। पुलिस गश्ती से लोगों का कौन्फीडेंस बढ़ता है। पुलिस वाले बगैर छुटटी के ज्यादा काम करते हैं। इसलिए उन्हें 13 माह का वेतन दिया जा रहा है। गंभीर अपराध वाले थानों को चिन्हित किया गया है। 314 लापरवाह पुलिस पदाधिकारियों के विरूद्ध विभागीय कार्रवाई चल रही है। दो दर्जन डीएसपी के विरूद्ध कार्रवाई हो रही है। पुलिस वालों का आम लोगों के साथ अच्छा व्यवहार हो इसलिए सभी थानों में आगन्तुक कक्ष बनाया जाएगा। इसके लिए 24 करोड़ 20 लाख की मंजुरी दे दी गयी है। थाना भवन की की जमीन के लिए डीएम एवं एसपी को जिम्मा दिया गया है। सभी थानों का अपना थाना भवन बनाया जा रहा है। 202 थानों के लिए भूमि उपलब्ध है। 109 में काम शुरू किया गया है। बिहार का अपना रैपीड एक्सन फोर्स बनायेंगे ।थाना भवन के लिए जमीन का जिम्मा एसपी-डीएम को दिया गया ।पुलिस थाना के हाजत में सीसीटीवी लगेगा। हर जिले में साईबर क्राईम सेंटर बनेगा ।

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